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झरिया के पानी पीने से मिली मुक्ति, घर तक पहुंचा नल जल का पानी:

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रायपुर,  छत्तीसगढ़ शासन की जनकल्याणकारी योजना जल जीवन मिशन के तहत गरियाबंद जिला के वनांचल गांव तुपेंगा के ग्रामीणों को अब पीने का शुद्ध पानी मिल रहा है। उन्हें पेयजल के लिए झरिया पर निर्भर नहीं रहना पड़ता है। ग्राम पंचायत मोंहदा के आश्रित ग्राम तुपेंगा में घर-घर तक नल जल का कनेक्शन पहुंच गया है। अब महिलाओं को लंबी दूरी तय कर पानी लेने नहीं जाना पड़ रहा है। इससे ग्रामीणों को सदियों के बाद पानी लाने की झंझट से मुक्ति मिली है। घर में पानी मिल जाने से लोगों को काफी आराम एवं राहत मिली है। इसके लिए ग्रामीणों ने सरकार द्वारा चलाई जा रही जल जीवन मिशन को कारगर बताते हुए शासन प्रशासन का आभार जताया है।

उल्लेखनीय है कि खेतों एवं जंगलों के बीच बसे इस गांव में कुल घर 12 हैं। जल जीवन मिशन के पहले ग्रामीणों को किसी भी प्रकार के जल की पूर्ति के लिए एक मात्र शासकीय हैण्डपम्प एवं झरिया पर निर्भर रहना पड़ता था। ग्राम में मुख्यतः आदिवासी वर्ग निवास करते है। जिनका मुख्य आय स्त्रोत वनोपज संग्रहण एवं कृषि हैं। पहले दूर से पानी लाने के लिए अन्य कार्यों को छोड़कर पैदल दूर जाना पड़ता था। गर्मी, सर्दी, बरसात में काफी समस्याओं का सामना करना पड़ता था। इससे घर के सदस्यों पर विपरीत स्वास्थ्य प्रभाव भी पड़ता था। गांव की रहने वाली जयमति की बताती है कि दूर दूर से पानी लाकर थक जाते थे। जल जीवन मिशन के द्वारा प्रत्येक घरों में नल लगने से सभी के स्वास्थ्य में सुधार एवं शारीरिक कार्य क्षमता में वृध्दि हुई है। साथ ही छोटे बच्चों के साथ खेलने एवं समय बिताने का मौका मिल रहा है। गांव की रहने वाली श्रीमोतिन, रोमिन एवं जयमति जल जीवन मिशन के तहत घर में ही मिल जा रहे पेयजल के बचत पानी के सदुपयोग के लिए अपनी बाड़ियों में साग भाजी भी लगाने का फैसला किया है। साथ ही अच्छे उदाहरण के रूप में अपने आपको पेश कर अन्य ग्रामीणों को भी पानी के सदुपयोग एवं संरक्षण करने को प्रोत्साहित करने का संकल्प लिया है।


रायपुर,  छत्तीसगढ़ शासन की जनकल्याणकारी योजना जल जीवन मिशन के तहत गरियाबंद जिला के वनांचल गांव तुपेंगा के ग्रामीणों को अब पीने का शुद्ध पानी मिल रहा है। उन्हें पेयजल के लिए झरिया पर निर्भर नहीं रहना पड़ता है। ग्राम पंचायत मोंहदा के आश्रित ग्राम तुपेंगा में घर-घर तक नल जल का कनेक्शन पहुंच गया है। अब महिलाओं को लंबी दूरी तय कर पानी लेने नहीं जाना पड़ रहा है। इससे ग्रामीणों को सदियों के बाद पानी लाने की झंझट से मुक्ति मिली है। घर में पानी मिल जाने से लोगों को काफी आराम एवं राहत मिली है। इसके लिए ग्रामीणों ने सरकार द्वारा चलाई जा रही जल जीवन मिशन को कारगर बताते हुए शासन प्रशासन का आभार जताया है।

उल्लेखनीय है कि खेतों एवं जंगलों के बीच बसे इस गांव में कुल घर 12 हैं। जल जीवन मिशन के पहले ग्रामीणों को किसी भी प्रकार के जल की पूर्ति के लिए एक मात्र शासकीय हैण्डपम्प एवं झरिया पर निर्भर रहना पड़ता था। ग्राम में मुख्यतः आदिवासी वर्ग निवास करते है। जिनका मुख्य आय स्त्रोत वनोपज संग्रहण एवं कृषि हैं। पहले दूर से पानी लाने के लिए अन्य कार्यों को छोड़कर पैदल दूर जाना पड़ता था। गर्मी, सर्दी, बरसात में काफी समस्याओं का सामना करना पड़ता था। इससे घर के सदस्यों पर विपरीत स्वास्थ्य प्रभाव भी पड़ता था। गांव की रहने वाली जयमति की बताती है कि दूर दूर से पानी लाकर थक जाते थे। जल जीवन मिशन के द्वारा प्रत्येक घरों में नल लगने से सभी के स्वास्थ्य में सुधार एवं शारीरिक कार्य क्षमता में वृध्दि हुई है। साथ ही छोटे बच्चों के साथ खेलने एवं समय बिताने का मौका मिल रहा है। गांव की रहने वाली श्रीमोतिन, रोमिन एवं जयमति जल जीवन मिशन के तहत घर में ही मिल जा रहे पेयजल के बचत पानी के सदुपयोग के लिए अपनी बाड़ियों में साग भाजी भी लगाने का फैसला किया है। साथ ही अच्छे उदाहरण के रूप में अपने आपको पेश कर अन्य ग्रामीणों को भी पानी के सदुपयोग एवं संरक्षण करने को प्रोत्साहित करने का संकल्प लिया है।


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