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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने महाकुंभ में लगाई आस्था की डुबकी, पत्नी संग किये पूजार्चना:

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महाकुंभ 2025 के अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने प्रयागराज के संगम में साधु-संतों के साथ सोमवार को पवित्र स्नान किया. इससे पहले उन्होंने संतों के साथ चर्चा भी की. उनके आगमन को लेकर प्रशासन ने व्यापक तैयारियां की थीं, और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनका स्वागत किया. अमित शाह सबसे पहले सेल्फी पॉइंट अरैल घाट पहुंचे और फिर अपने परिवार के साथ संगम स्नान के लिए रवाना हुए.स्नान के बाद अमित शाह ने गंगा पूजन में भाग लिया, जिसमें साधु-संतों ने विधिवत पूजा संपन्न करवाई. इस दौरान उन्होंने मछलियों को दाना भी डाला और अपने पोते को संतों से आशीर्वाद दिलवाया. संगम—जहां गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती मिलती हैं—सनातन धर्म में मोक्ष प्राप्ति और आत्मशुद्धि का प्रतीक माना जाता है. केंद्रीय गृह मंत्री ने इस पावन अवसर पर स्नान कर भारत की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं का सम्मान किया.

अमित शाह ने सोशल मीडिया एक्स हैंडल पर इससे पहले पोस्ट किया था कि  “‘महाकुंभ' सनातन संस्कृति की अविरल धारा का अद्वितीय प्रतीक है. कुंभ समरसता पर आधारित हमारे सनातन जीवन-दर्शन को दर्शाता है. आज धर्म नगरी प्रयागराज में एकता और अखंडता के इस महापर्व में संगम स्नान करने और संतजनों का आशीर्वाद लेने के लिए उत्सुक हूं.”


महाकुंभ 2025 के अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने प्रयागराज के संगम में साधु-संतों के साथ सोमवार को पवित्र स्नान किया. इससे पहले उन्होंने संतों के साथ चर्चा भी की. उनके आगमन को लेकर प्रशासन ने व्यापक तैयारियां की थीं, और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनका स्वागत किया. अमित शाह सबसे पहले सेल्फी पॉइंट अरैल घाट पहुंचे और फिर अपने परिवार के साथ संगम स्नान के लिए रवाना हुए.स्नान के बाद अमित शाह ने गंगा पूजन में भाग लिया, जिसमें साधु-संतों ने विधिवत पूजा संपन्न करवाई. इस दौरान उन्होंने मछलियों को दाना भी डाला और अपने पोते को संतों से आशीर्वाद दिलवाया. संगम—जहां गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती मिलती हैं—सनातन धर्म में मोक्ष प्राप्ति और आत्मशुद्धि का प्रतीक माना जाता है. केंद्रीय गृह मंत्री ने इस पावन अवसर पर स्नान कर भारत की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं का सम्मान किया.

अमित शाह ने सोशल मीडिया एक्स हैंडल पर इससे पहले पोस्ट किया था कि  “‘महाकुंभ' सनातन संस्कृति की अविरल धारा का अद्वितीय प्रतीक है. कुंभ समरसता पर आधारित हमारे सनातन जीवन-दर्शन को दर्शाता है. आज धर्म नगरी प्रयागराज में एकता और अखंडता के इस महापर्व में संगम स्नान करने और संतजनों का आशीर्वाद लेने के लिए उत्सुक हूं.”


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