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News (खबरीलाल न्यूज़) : मरीजों के लिये हाइपरबेरिक ऑक्सीजन थेरेपी हैं एक चमत्कार :

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मरीजों के लिये हाइपरबेरिक ऑक्सीजन थेरेपी एक चमत्कार के रूप में सिध्द हो रही हैं इस थेैरेपी से कई अविश्वानिया परिणाम देखने को मिल रहा है।  श्री मेडिशाईन हॉस्पिटल में उपलब्ध हाइपरबेरिक ऑक्सीजन थेरेपी (HBOT) से हाल ही में कई गंभीर मरीजों को नया जीवन मिला है।
अस्पताल के डायरेक्टर डॉ. सुशील शर्मा के अनुसार, मरीज संजय बघेल निवासी जिला कोरिया एक डायबेटिक फुट के मरीज थे,


जिनको विभिन्न अस्पतालों से उनके  पैर काटने की सलाह दी गयी थी, मरीज संजय बघेल निवासी कोरिया अपने पैर के स्वस्थ्य होने की आषा के साथ श्री मेडिशाइन हाॅस्पिटल आये जहां पर उनके डायबेटिज के कारण खराब हुये पैर की सम्पूर्ण जांच के बाद संजय जी को हाइपरबेरिक ऑक्सीजन थेरेपी HBOT की सलाह दी गयी थेरेपी के कुछ सेंसन के बाद ही संजय जी अपने डायबेटिक पैर पर गतिवीधिया महसूस करने लगे सेंसन पूरे होने के बाद उनके पैर के पूरे घाव भर गये और संजय बघेल जी चलने की स्थिति में आ गये।
आज संजय बघेल जी जिनका एक समय पर पैर कटने वाला आज वे हाइपरबेरिक ऑक्सीजन थेरेपी के मदद से ठीक होकर चलने लगे और एक समान्य जीवन की ओर अग्रसर हो गये।  इसी तरह,एक और मरीज सुनील कुमार, निवासी सरोना रायपुर को अचानक सुनाई देना कम हो गया था जिसे सडन हियरिंग लॉस कहा जाता है उन्हे भी हाइपरबेरिक ऑक्सीजन थेरेपी की सलाह दी गयी जिससे उनकी सुनने की क्षमता लौट आई। इसी प्रकार मरीज पवन बाई सिन्हा निवासी न्यू रायपुर को पेशाब के रास्ते खून आने की गंभीर समस्या थी, जिसकी वजह से असहनीय दर्द और असमान्य जीवन का सामना करना पड़ रहा था जो हाइपरबेरिक ऑक्सीजन थेरेपी नियमित सेसंन से नियंत्रित हो गई। मरीज आशीष लकरा, निवासी कोसमी,बलरामपुर को दिमाग में खून की थक्का जमने के कारण  कारण बोलने और चलने में कठिनाई हो रही थी, लेकिन थेरेपी के बाद उनकी स्थिति में अविश्वसनीय सुधार हुआ। वहीं कई वर्षो से विशिनदास निवासी अमलीडीह,रायपुर को सिर के गंभीर चोट के कारण उनके बात करने की क्षमता कम हो गयी और मरीज किसी भी संदेश या वार्तालाप को समझने में असमर्थ था, हाइपरबेरिक ऑक्सीजन थेरेपी के सेंसन के बाद समान्य वार्तालाप करने लगा।
डॉ. शर्मा ने कहा है HBOT से शरीर के ऊतकों को अतिरिक्त ऑक्सीजन मिलती है, जिससे जटिल बीमारियों और चोटों में तेजी से सुधार होता है। डायबेटिक फुट, सडन हियरिंग लॉस, ब्रेन स्ट्रोक, हेड इंजरी जैसी स्थितियों में यह उपचार जीवनदायी साबित हो रहा है। गौरतलब है कि छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश और ओडिशा में HBOT सुविधा केवल श्री मेडिशाईन हाॅस्पिटल,रायपुर में उपलब्ध है, जिसके कारण इन राज्यों के साथ-साथ अन्य राज्यों से भी मरीज इलाज के लिए यहाँ आ रहे हैं।
श्री मेडिशाइन हॉस्पिटल ने 14 वर्ष की सफल स्वास्थ्य सेवा पूरी की है। इस दौरान अस्पताल ने लगातार नई-नई सुविधाएँ जोड़ी हैं, जिनमें आधुनिक उपकरण, अनुभवी चिकित्सक टीम, अत्याधुनिक ऑपरेशन थिएटर, 24×7 इमरजेंसी, फार्मेसी और डायग्नोस्टिक सेंटर प्रमुख हैं।
अस्पताल के डायरेक्टर श्रीमति कात्यायानी शर्मा ने बताया कि इन सुविधाओं के कारण मरीजों को इलाज के दौरान किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता और उन्हें विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सेवाएँ स्थानीय स्तर पर ही उपलब्ध हो रही हैं।


मरीजों के लिये हाइपरबेरिक ऑक्सीजन थेरेपी एक चमत्कार के रूप में सिध्द हो रही हैं इस थेैरेपी से कई अविश्वानिया परिणाम देखने को मिल रहा है।  श्री मेडिशाईन हॉस्पिटल में उपलब्ध हाइपरबेरिक ऑक्सीजन थेरेपी (HBOT) से हाल ही में कई गंभीर मरीजों को नया जीवन मिला है।
अस्पताल के डायरेक्टर डॉ. सुशील शर्मा के अनुसार, मरीज संजय बघेल निवासी जिला कोरिया एक डायबेटिक फुट के मरीज थे,


जिनको विभिन्न अस्पतालों से उनके  पैर काटने की सलाह दी गयी थी, मरीज संजय बघेल निवासी कोरिया अपने पैर के स्वस्थ्य होने की आषा के साथ श्री मेडिशाइन हाॅस्पिटल आये जहां पर उनके डायबेटिज के कारण खराब हुये पैर की सम्पूर्ण जांच के बाद संजय जी को हाइपरबेरिक ऑक्सीजन थेरेपी HBOT की सलाह दी गयी थेरेपी के कुछ सेंसन के बाद ही संजय जी अपने डायबेटिक पैर पर गतिवीधिया महसूस करने लगे सेंसन पूरे होने के बाद उनके पैर के पूरे घाव भर गये और संजय बघेल जी चलने की स्थिति में आ गये।
आज संजय बघेल जी जिनका एक समय पर पैर कटने वाला आज वे हाइपरबेरिक ऑक्सीजन थेरेपी के मदद से ठीक होकर चलने लगे और एक समान्य जीवन की ओर अग्रसर हो गये।  इसी तरह,एक और मरीज सुनील कुमार, निवासी सरोना रायपुर को अचानक सुनाई देना कम हो गया था जिसे सडन हियरिंग लॉस कहा जाता है उन्हे भी हाइपरबेरिक ऑक्सीजन थेरेपी की सलाह दी गयी जिससे उनकी सुनने की क्षमता लौट आई। इसी प्रकार मरीज पवन बाई सिन्हा निवासी न्यू रायपुर को पेशाब के रास्ते खून आने की गंभीर समस्या थी, जिसकी वजह से असहनीय दर्द और असमान्य जीवन का सामना करना पड़ रहा था जो हाइपरबेरिक ऑक्सीजन थेरेपी नियमित सेसंन से नियंत्रित हो गई। मरीज आशीष लकरा, निवासी कोसमी,बलरामपुर को दिमाग में खून की थक्का जमने के कारण  कारण बोलने और चलने में कठिनाई हो रही थी, लेकिन थेरेपी के बाद उनकी स्थिति में अविश्वसनीय सुधार हुआ। वहीं कई वर्षो से विशिनदास निवासी अमलीडीह,रायपुर को सिर के गंभीर चोट के कारण उनके बात करने की क्षमता कम हो गयी और मरीज किसी भी संदेश या वार्तालाप को समझने में असमर्थ था, हाइपरबेरिक ऑक्सीजन थेरेपी के सेंसन के बाद समान्य वार्तालाप करने लगा।
डॉ. शर्मा ने कहा है HBOT से शरीर के ऊतकों को अतिरिक्त ऑक्सीजन मिलती है, जिससे जटिल बीमारियों और चोटों में तेजी से सुधार होता है। डायबेटिक फुट, सडन हियरिंग लॉस, ब्रेन स्ट्रोक, हेड इंजरी जैसी स्थितियों में यह उपचार जीवनदायी साबित हो रहा है। गौरतलब है कि छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश और ओडिशा में HBOT सुविधा केवल श्री मेडिशाईन हाॅस्पिटल,रायपुर में उपलब्ध है, जिसके कारण इन राज्यों के साथ-साथ अन्य राज्यों से भी मरीज इलाज के लिए यहाँ आ रहे हैं।
श्री मेडिशाइन हॉस्पिटल ने 14 वर्ष की सफल स्वास्थ्य सेवा पूरी की है। इस दौरान अस्पताल ने लगातार नई-नई सुविधाएँ जोड़ी हैं, जिनमें आधुनिक उपकरण, अनुभवी चिकित्सक टीम, अत्याधुनिक ऑपरेशन थिएटर, 24×7 इमरजेंसी, फार्मेसी और डायग्नोस्टिक सेंटर प्रमुख हैं।
अस्पताल के डायरेक्टर श्रीमति कात्यायानी शर्मा ने बताया कि इन सुविधाओं के कारण मरीजों को इलाज के दौरान किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता और उन्हें विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सेवाएँ स्थानीय स्तर पर ही उपलब्ध हो रही हैं।


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