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Chhattisgarh (खबरीलाल न्यूज़) :: धमतरी : अब दलहन में आत्मनिर्भर बनेगा धमतरी, लोहरसी से हुई मजबूत शुरुआत:

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 धमतरी  दलहन आत्मनिर्भरता मिशन अंतर्गत दलहन आत्मनिर्भरता मिशन अंतर्गत  धमतरी  जिले के ग्राम लोहरसी  में किसानों को उड़द बीज का वितरण एवं तकनीकी मार्गदर्शन दिया गया | धमतरी में किसान धान के बदले रवि में फ़सलचक्र  परिवर्तन अंतर्गत दलहन -तिलहन की फसल  अपना रहे है । इसके अलावा मखाना और औषधि की खेती की और  झुकाव होने लगा है । वे मखाना और औषधि की खेती भी कर  रहे  है । इसके लिए कृषि विभाग के साथ जिला प्रशासन ने किसानों को  प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है । 

  दालें सिर्फ एक कृषि उत्पाद नहीं हैं; वे भारत की पोषण सुरक्षा, मृदा स्वास्थ्य और ग्रामीण आजीविका का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। दुनिया में दालों के सबसे बड़े उत्पादक, उपभोक्ता और आयातक के रूप में, भारत की नीतियां लगातार इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में उत्पादकता और स्थिरता बढ़ाने पर केंद्रित रही हैं। बढ़ती आय और संतुलित पोषण के प्रति बढ़ती जागरूकता के साथ, दालों की मांग लगातार बढ़ रही है, जिससे घरेलू उत्पादन बढ़ाने के अवसर पैदा हो रहे हैं।

दालों का आर्थिक और व्यापारिक महत्व तो है ही, साथ ही ये पोषक तत्वों का भी भंडार हैं। राष्ट्रीय पोषण संस्थान के अनुसार, भारतीय आहार में कुल प्रोटीन की मात्रा में इनका योगदान लगभग 20-25 प्रतिशत है। हालांकि, प्रति व्यक्ति दालों की खपत अनुशंसित 85 ग्राम प्रतिदिन से कम है, जिसके कारण देश भर में प्रोटीन-ऊर्जा कुपोषण की समस्या बढ़ रही है। इसलिए, घरेलू उत्पादन बढ़ाना न केवल आर्थिक आवश्यकता है, बल्कि जन स्वास्थ्य में सुधार की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है।

    मालूम हो कि इस दोहरे महत्व को पहचानते हुए, भारत सरकार ने दलहन क्षेत्र को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया है। 11 अक्टूबर 2025 को नई दिल्ली स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई) में एक विशेष कृषि कार्यक्रम आयोजित किया गया , जहां प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 11,440 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय के साथ दलहन आत्मनिर्भरता मिशन (दलहन आत्मनिर्भरता मिशन) का शुभारंभ किया था । इस कार्यक्रम के दौरान, प्रधानमंत्री ने दलहन की खेती में लगे किसानों से बातचीत भी थी और कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में मूल्य श्रृंखला आधारित विकास को बढ़ावा देने के महत्व पर प्रकाश डाला था । उन्होंने इस बात पर बल दिया गया कि इस मिशन का उद्देश्य न केवल दलहन उत्पादन बढ़ाना है, बल्कि एक सतत और सशक्त भविष्य का निर्माण करना भी है।यह मिशन पोषण सुरक्षा और आत्मनिर्भरता प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।


 धमतरी  दलहन आत्मनिर्भरता मिशन अंतर्गत दलहन आत्मनिर्भरता मिशन अंतर्गत  धमतरी  जिले के ग्राम लोहरसी  में किसानों को उड़द बीज का वितरण एवं तकनीकी मार्गदर्शन दिया गया | धमतरी में किसान धान के बदले रवि में फ़सलचक्र  परिवर्तन अंतर्गत दलहन -तिलहन की फसल  अपना रहे है । इसके अलावा मखाना और औषधि की खेती की और  झुकाव होने लगा है । वे मखाना और औषधि की खेती भी कर  रहे  है । इसके लिए कृषि विभाग के साथ जिला प्रशासन ने किसानों को  प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है । 

  दालें सिर्फ एक कृषि उत्पाद नहीं हैं; वे भारत की पोषण सुरक्षा, मृदा स्वास्थ्य और ग्रामीण आजीविका का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। दुनिया में दालों के सबसे बड़े उत्पादक, उपभोक्ता और आयातक के रूप में, भारत की नीतियां लगातार इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में उत्पादकता और स्थिरता बढ़ाने पर केंद्रित रही हैं। बढ़ती आय और संतुलित पोषण के प्रति बढ़ती जागरूकता के साथ, दालों की मांग लगातार बढ़ रही है, जिससे घरेलू उत्पादन बढ़ाने के अवसर पैदा हो रहे हैं।

दालों का आर्थिक और व्यापारिक महत्व तो है ही, साथ ही ये पोषक तत्वों का भी भंडार हैं। राष्ट्रीय पोषण संस्थान के अनुसार, भारतीय आहार में कुल प्रोटीन की मात्रा में इनका योगदान लगभग 20-25 प्रतिशत है। हालांकि, प्रति व्यक्ति दालों की खपत अनुशंसित 85 ग्राम प्रतिदिन से कम है, जिसके कारण देश भर में प्रोटीन-ऊर्जा कुपोषण की समस्या बढ़ रही है। इसलिए, घरेलू उत्पादन बढ़ाना न केवल आर्थिक आवश्यकता है, बल्कि जन स्वास्थ्य में सुधार की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है।

    मालूम हो कि इस दोहरे महत्व को पहचानते हुए, भारत सरकार ने दलहन क्षेत्र को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया है। 11 अक्टूबर 2025 को नई दिल्ली स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई) में एक विशेष कृषि कार्यक्रम आयोजित किया गया , जहां प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 11,440 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय के साथ दलहन आत्मनिर्भरता मिशन (दलहन आत्मनिर्भरता मिशन) का शुभारंभ किया था । इस कार्यक्रम के दौरान, प्रधानमंत्री ने दलहन की खेती में लगे किसानों से बातचीत भी थी और कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में मूल्य श्रृंखला आधारित विकास को बढ़ावा देने के महत्व पर प्रकाश डाला था । उन्होंने इस बात पर बल दिया गया कि इस मिशन का उद्देश्य न केवल दलहन उत्पादन बढ़ाना है, बल्कि एक सतत और सशक्त भविष्य का निर्माण करना भी है।यह मिशन पोषण सुरक्षा और आत्मनिर्भरता प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।


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