मंडला। कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघों की लगातार हो रही मौतों ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरही रेंज की अमाही बाघिन टी-141 के तीन शावकों की मौत के बाद अब स्वयं बाघिन ने भी दम तोड़ दिया है। महज नौ दिनों के भीतर चार मौतों की इस श्रृंखला ने पूरे मामले को रहस्यमय बना दिया है।जानकारी के मुताबिक, बाघिन को बीमार और कमजोर हालत में रेस्क्यू कर मुक्की रेंज के क्वारंटाइन सेंटर में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान बुधवार को उसकी मौत हो गई। इससे पहले उसके चार में से तीन शावकों की अलग-अलग स्थानों पर मौत हो चुकी थी। अब केवल एक शावक ही जीवित बचा है।सरही जोन में बाघिन अपने चार शावकों के साथ देखी गई थी, जिसका वीडियो भी सामने आया था। 21 अप्रैल को पहला शावक मृत मिला, जिसकी वजह प्राकृतिक बताई गई। 23 अप्रैल को दूसरे शावक का सड़ा-गला शव मिला, जबकि 25 अप्रैल को तीसरे शावक की मौत फेफड़ों में संक्रमण के कारण बताई गई। इसके बाद 29 अप्रैल को क्वारंटाइन सेंटर में बाघिन ने भी दम तोड़ दिया। हालांकि इन मौतों के पीछे की असल वजह अब तक स्पष्ट नहीं हो सकी है।वन विभाग पर सवाल उठ रहे हैं कि जब शावकों की मौत का सिलसिला शुरू हो गया था, तब समय रहते बाघिन को रेस्क्यू क्यों नहीं किया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय पर हस्तक्षेप होता, तो शायद बाघिन को बचाया जा सकता था।प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि बाघिन बेहद कमजोर हो चुकी थी और शिकार करने में असमर्थ थी।
ऐसे में शावकों को पर्याप्त भोजन नहीं मिल पाया। एक शावक के पोस्टमार्टम में उसका पेट खाली पाया गया था, जिससे भूख की आशंका भी जताई जा रही है।तीन शावकों की मौत के बाद 26 अप्रैल को प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) डॉ. समिता अरोरा और अन्य अधिकारियों की मौजूदगी में बाघिन और एक शावक को रेस्क्यू कर क्वारंटाइन सेंटर भेजा गया था। लेकिन इलाज के बावजूद बाघिन को बचाया नहीं जा सका।अब इन मौतों की असली वजह जानने के लिए विस्तृत जांच की जा रही है, वहीं वन्यजीव संरक्षण को लेकर एक बार फिर गंभीर बहस छिड़ गई है।
मंडला। कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघों की लगातार हो रही मौतों ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरही रेंज की अमाही बाघिन टी-141 के तीन शावकों की मौत के बाद अब स्वयं बाघिन ने भी दम तोड़ दिया है। महज नौ दिनों के भीतर चार मौतों की इस श्रृंखला ने पूरे मामले को रहस्यमय बना दिया है।जानकारी के मुताबिक, बाघिन को बीमार और कमजोर हालत में रेस्क्यू कर मुक्की रेंज के क्वारंटाइन सेंटर में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान बुधवार को उसकी मौत हो गई। इससे पहले उसके चार में से तीन शावकों की अलग-अलग स्थानों पर मौत हो चुकी थी। अब केवल एक शावक ही जीवित बचा है।सरही जोन में बाघिन अपने चार शावकों के साथ देखी गई थी, जिसका वीडियो भी सामने आया था। 21 अप्रैल को पहला शावक मृत मिला, जिसकी वजह प्राकृतिक बताई गई। 23 अप्रैल को दूसरे शावक का सड़ा-गला शव मिला, जबकि 25 अप्रैल को तीसरे शावक की मौत फेफड़ों में संक्रमण के कारण बताई गई। इसके बाद 29 अप्रैल को क्वारंटाइन सेंटर में बाघिन ने भी दम तोड़ दिया। हालांकि इन मौतों के पीछे की असल वजह अब तक स्पष्ट नहीं हो सकी है।वन विभाग पर सवाल उठ रहे हैं कि जब शावकों की मौत का सिलसिला शुरू हो गया था, तब समय रहते बाघिन को रेस्क्यू क्यों नहीं किया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय पर हस्तक्षेप होता, तो शायद बाघिन को बचाया जा सकता था।प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि बाघिन बेहद कमजोर हो चुकी थी और शिकार करने में असमर्थ थी।
ऐसे में शावकों को पर्याप्त भोजन नहीं मिल पाया। एक शावक के पोस्टमार्टम में उसका पेट खाली पाया गया था, जिससे भूख की आशंका भी जताई जा रही है।तीन शावकों की मौत के बाद 26 अप्रैल को प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) डॉ. समिता अरोरा और अन्य अधिकारियों की मौजूदगी में बाघिन और एक शावक को रेस्क्यू कर क्वारंटाइन सेंटर भेजा गया था। लेकिन इलाज के बावजूद बाघिन को बचाया नहीं जा सका।अब इन मौतों की असली वजह जानने के लिए विस्तृत जांच की जा रही है, वहीं वन्यजीव संरक्षण को लेकर एक बार फिर गंभीर बहस छिड़ गई है।



Journalist खबरीलाल













