संवाददाता - सौरभ साहू
सूरजपुर (भैयाथान)। छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले के अंतर्गत आने वाले भैयाथान ब्लॉक से भ्रष्टाचार का एक गंभीर मामला प्रकाश में आया है। यहाँ के ग्राम पंचायत सत्यनगर में प्रभावशाली व्यक्तियों द्वारा विकास कार्यों में फर्जी तरीके से हाजिरी भरकर सरकारी खजाने को चूना लगाने का आरोप लगा है। ग्रामीणों ने इस संबंध में साक्ष्यों के साथ सूरजपुर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष जांच की मांग की है।
बिना काम किए मस्टरोल में दर्ज हो रहे नाम - ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत में संचालित होने वाले विभिन्न निर्माण और मनरेगा कार्यों के दौरान उन लोगों के नाम भी मस्टरोल में भरे जा रहे हैं, जो वास्तव में कार्यस्थल पर कभी नजर नहीं आते। शिकायत के अनुसार, इनमें से कई व्यक्ति स्थानीय रसूखदार और रसूखदारों के नजदीकी हैं, जो अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर घर बैठे ही सरकारी मजदूरी का भुगतान प्राप्त कर रहे हैं।
मिलीभगत का संदेह - शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि पंचायत सचिव और रोजगार सहायक की मिलीभगत के बिना इतना बड़ा खेल मुमकिन नहीं है। यह भी बताया जा रहा है कि जहाँ एक ओर असली गरीब मजदूर रोजगार के लिए भटक रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कागजों पर फर्जी मजदूर दिखाकर लाखों रुपयों का आहरण किया जा रहा है।
कलेक्टर से निष्पक्ष जांच की मांग - मामले की गंभीरता को देखते हुए ग्रामीणों ने वर्तमान कलेक्टर सुश्री रेना जमील (जिन्होंने हाल ही में पदभार ग्रहण किया है) से मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की अपील की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि मस्टरोल में दर्ज नामों की मौके पर जाकर भौतिक जांच की जाए और उनके मोबाइल लोकेशन या अन्य तकनीकी साक्ष्यों का मिलान किया जाए, तो फर्जीवाड़े की परतें खुल सकती हैं।
संवाददाता - सौरभ साहू
सूरजपुर (भैयाथान)। छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले के अंतर्गत आने वाले भैयाथान ब्लॉक से भ्रष्टाचार का एक गंभीर मामला प्रकाश में आया है। यहाँ के ग्राम पंचायत सत्यनगर में प्रभावशाली व्यक्तियों द्वारा विकास कार्यों में फर्जी तरीके से हाजिरी भरकर सरकारी खजाने को चूना लगाने का आरोप लगा है। ग्रामीणों ने इस संबंध में साक्ष्यों के साथ सूरजपुर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष जांच की मांग की है।
बिना काम किए मस्टरोल में दर्ज हो रहे नाम - ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत में संचालित होने वाले विभिन्न निर्माण और मनरेगा कार्यों के दौरान उन लोगों के नाम भी मस्टरोल में भरे जा रहे हैं, जो वास्तव में कार्यस्थल पर कभी नजर नहीं आते। शिकायत के अनुसार, इनमें से कई व्यक्ति स्थानीय रसूखदार और रसूखदारों के नजदीकी हैं, जो अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर घर बैठे ही सरकारी मजदूरी का भुगतान प्राप्त कर रहे हैं।
मिलीभगत का संदेह - शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि पंचायत सचिव और रोजगार सहायक की मिलीभगत के बिना इतना बड़ा खेल मुमकिन नहीं है। यह भी बताया जा रहा है कि जहाँ एक ओर असली गरीब मजदूर रोजगार के लिए भटक रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कागजों पर फर्जी मजदूर दिखाकर लाखों रुपयों का आहरण किया जा रहा है।
कलेक्टर से निष्पक्ष जांच की मांग - मामले की गंभीरता को देखते हुए ग्रामीणों ने वर्तमान कलेक्टर सुश्री रेना जमील (जिन्होंने हाल ही में पदभार ग्रहण किया है) से मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की अपील की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि मस्टरोल में दर्ज नामों की मौके पर जाकर भौतिक जांच की जाए और उनके मोबाइल लोकेशन या अन्य तकनीकी साक्ष्यों का मिलान किया जाए, तो फर्जीवाड़े की परतें खुल सकती हैं।



Journalist खबरीलाल














