
हरी भिंडी की खेती तो हमारे देश में सालों से होती आ रही है. लेकिन अब मार्केट का माहौल बदल रहा है और लाल भिंडी किसानों के लिए मुनाफे का नया जरिया बनकर उभरी है. इस खास वैरायटी का अनोखा लाल रंग और बेहतरीन न्यूट्रिशनल वैल्यू इसे हरी भिंडी से अलग बनाता है. जिसकी वजह से बाजारों में इसे आम भिंडी के मुकाबले कई गुना ज्यादा प्रीमियम प्राइस मिलता है.
बड़े शहरों के सुपरमार्केट्स और मॉल्स में इसकी डिमांड हमेशा हाई रहती है. किसानों के लिए सबसे फायदे की बात यह है कि लाल भिंडी की फसल बीज बोने के महज 45 दिनों के भीतर ही पूरी तरह तैयार हो जाती है. यानी डेढ़ महीने के अंदर ही खेतों से तुड़ाई शुरू हो जाती है और किसानों के पास एक रेगुलर इनकम आने लगती है. जो कम समय में बंपर मुनाफा देती है.इस मिट्टी में होगी अच्छी फसल - लाल भिंडी की खेती करने का तरीका बहुत हद तक हरी भिंडी जैसा ही है. इसलिए किसानों को इसके लिए कोई अलग से ट्रेनिंग लेने की जरूरत नहीं पड़ती. इसकी बेहतर ग्रोथ और शानदार पैदावार के लिए बलुई दोमट मिट्टी को सबसे बढ़िया माना जाता है. जिसका पीएच लेवल नॉर्मल हो. खेती शुरू करने से पहले खेत की अच्छी तरह जुताई करके मिट्टी को भुरभुरा बना लेना चाहिए और उसमें गोबर की जैविक खाद मिला देनी चाहिए.
सही जल निकासी से होगी बंपर पैदावार - इस फसल के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि खेत में पानी रुकना नहीं चाहिए. क्योंकि जलभराव से इसकी जड़ें गल सकती हैं. इसलिए खेत में ड्रेनेज यानी जल निकासी का तगड़ा सिस्टम होना चाहिए जिससे बारिश या सिंचाई का एक्स्ट्रा पानी तुरंत बाहर निकल सके.
सेहत के लिए वरदान - इस लाल भिंडी की मार्केट में इतनी ज्यादा पूछ इसलिए है क्योंकि यह सेहत के लिहाज से किसी सुपरफूड से कम नहीं है. इसमें भरपूर मात्रा में एंटी-ऑक्सीडेंट्स, आयरन, कैल्शियम और विटामिंस पाए जाते हैं, जो इसे हेल्थ कॉन्शियस लोगों की पहली पसंद बनाते हैं. कम दिनों की फसल होने के चलते इसमें कीड़े-मकोड़ों और बीमारियों का खतरा भी हरी भिंडी के मुकाबले काफी कम होता है.
लागत आधी होने से डबल होगा मुनाफा - कम समय में तैयार होने की वजह से इसमें लेबर कॉस्ट और सिंचाई की लागत भी आधी रह जाती है. कुल मिलाकर कहें तो कम लागत में कम दिनों के अंदर तगड़ा मुनाफा कमाने के लिए लाल भिंडी की आज के समय में किसानों के लिए सबसे बढ़िया फसल है.

हरी भिंडी की खेती तो हमारे देश में सालों से होती आ रही है. लेकिन अब मार्केट का माहौल बदल रहा है और लाल भिंडी किसानों के लिए मुनाफे का नया जरिया बनकर उभरी है. इस खास वैरायटी का अनोखा लाल रंग और बेहतरीन न्यूट्रिशनल वैल्यू इसे हरी भिंडी से अलग बनाता है. जिसकी वजह से बाजारों में इसे आम भिंडी के मुकाबले कई गुना ज्यादा प्रीमियम प्राइस मिलता है.
बड़े शहरों के सुपरमार्केट्स और मॉल्स में इसकी डिमांड हमेशा हाई रहती है. किसानों के लिए सबसे फायदे की बात यह है कि लाल भिंडी की फसल बीज बोने के महज 45 दिनों के भीतर ही पूरी तरह तैयार हो जाती है. यानी डेढ़ महीने के अंदर ही खेतों से तुड़ाई शुरू हो जाती है और किसानों के पास एक रेगुलर इनकम आने लगती है. जो कम समय में बंपर मुनाफा देती है.इस मिट्टी में होगी अच्छी फसल - लाल भिंडी की खेती करने का तरीका बहुत हद तक हरी भिंडी जैसा ही है. इसलिए किसानों को इसके लिए कोई अलग से ट्रेनिंग लेने की जरूरत नहीं पड़ती. इसकी बेहतर ग्रोथ और शानदार पैदावार के लिए बलुई दोमट मिट्टी को सबसे बढ़िया माना जाता है. जिसका पीएच लेवल नॉर्मल हो. खेती शुरू करने से पहले खेत की अच्छी तरह जुताई करके मिट्टी को भुरभुरा बना लेना चाहिए और उसमें गोबर की जैविक खाद मिला देनी चाहिए.
सही जल निकासी से होगी बंपर पैदावार - इस फसल के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि खेत में पानी रुकना नहीं चाहिए. क्योंकि जलभराव से इसकी जड़ें गल सकती हैं. इसलिए खेत में ड्रेनेज यानी जल निकासी का तगड़ा सिस्टम होना चाहिए जिससे बारिश या सिंचाई का एक्स्ट्रा पानी तुरंत बाहर निकल सके.
सेहत के लिए वरदान - इस लाल भिंडी की मार्केट में इतनी ज्यादा पूछ इसलिए है क्योंकि यह सेहत के लिहाज से किसी सुपरफूड से कम नहीं है. इसमें भरपूर मात्रा में एंटी-ऑक्सीडेंट्स, आयरन, कैल्शियम और विटामिंस पाए जाते हैं, जो इसे हेल्थ कॉन्शियस लोगों की पहली पसंद बनाते हैं. कम दिनों की फसल होने के चलते इसमें कीड़े-मकोड़ों और बीमारियों का खतरा भी हरी भिंडी के मुकाबले काफी कम होता है.
लागत आधी होने से डबल होगा मुनाफा - कम समय में तैयार होने की वजह से इसमें लेबर कॉस्ट और सिंचाई की लागत भी आधी रह जाती है. कुल मिलाकर कहें तो कम लागत में कम दिनों के अंदर तगड़ा मुनाफा कमाने के लिए लाल भिंडी की आज के समय में किसानों के लिए सबसे बढ़िया फसल है.


Journalist खबरीलाल















