रायपुर। कभी मलेरिया संक्रमण के लिहाज से संवेदनशील माने जाने वाले रायपुर जिले ने अब उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार वर्ष 2023 से जून 2026 तक जिले में स्थानीय मलेरिया का एक भी पॉजिटिव मामला दर्ज नहीं हुआ है। यदि यह स्थिति अगले वर्ष भी बनी रहती है, तो रायपुर को मलेरिया मुक्त जिला घोषित किए जाने की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता मिल सकती है।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2016 में जिले में 105 मलेरिया पॉजिटिव मरीज मिले थे। इसके बाद लगातार निगरानी, व्यापक जांच, मच्छर नियंत्रण अभियान और जनजागरूकता कार्यक्रमों के कारण मामलों में लगातार कमी आती गई। वर्ष 2021 में केवल 4, वर्ष 2022 में 2 मरीज मिले, जबकि वर्ष 2023, 2024, 2025 और जून 2026 तक एक भी स्थानीय मलेरिया मरीज सामने नहीं आया।
अधिकारियों का कहना है कि रायपुर जिले में घने वन क्षेत्र नहीं होने तथा नियमित सर्विलांस और नियंत्रण गतिविधियों के प्रभावी संचालन से मलेरिया संक्रमण पर नियंत्रण संभव हुआ है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप जिले में जांच, रिपोर्टिंग और निगरानी की प्रक्रिया लगातार जारी है।
जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. विमल किशोर राय ने बताया कि किसी जिले को मलेरिया मुक्त घोषित करने के लिए लगातार पांच वर्षों तक कोई स्थानीय मलेरिया केस नहीं मिलना आवश्यक होता है। रायपुर इस लक्ष्य के बेहद करीब पहुंच चुका है। यदि आगामी अवधि में भी कोई स्थानीय मामला सामने नहीं आता है, तो जिले को मलेरिया मुक्त जिले का दर्जा मिल सकता है।
स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि मलेरिया नियंत्रण के लिए घरों के आसपास पानी जमा न होने दें, मच्छरदानी का उपयोग करें तथा बुखार आने पर तुरंत जांच कराएं, ताकि जिले की यह उपलब्धि बरकरार रह सके।
रायपुर। कभी मलेरिया संक्रमण के लिहाज से संवेदनशील माने जाने वाले रायपुर जिले ने अब उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार वर्ष 2023 से जून 2026 तक जिले में स्थानीय मलेरिया का एक भी पॉजिटिव मामला दर्ज नहीं हुआ है। यदि यह स्थिति अगले वर्ष भी बनी रहती है, तो रायपुर को मलेरिया मुक्त जिला घोषित किए जाने की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता मिल सकती है।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2016 में जिले में 105 मलेरिया पॉजिटिव मरीज मिले थे। इसके बाद लगातार निगरानी, व्यापक जांच, मच्छर नियंत्रण अभियान और जनजागरूकता कार्यक्रमों के कारण मामलों में लगातार कमी आती गई। वर्ष 2021 में केवल 4, वर्ष 2022 में 2 मरीज मिले, जबकि वर्ष 2023, 2024, 2025 और जून 2026 तक एक भी स्थानीय मलेरिया मरीज सामने नहीं आया।
अधिकारियों का कहना है कि रायपुर जिले में घने वन क्षेत्र नहीं होने तथा नियमित सर्विलांस और नियंत्रण गतिविधियों के प्रभावी संचालन से मलेरिया संक्रमण पर नियंत्रण संभव हुआ है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप जिले में जांच, रिपोर्टिंग और निगरानी की प्रक्रिया लगातार जारी है।
जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. विमल किशोर राय ने बताया कि किसी जिले को मलेरिया मुक्त घोषित करने के लिए लगातार पांच वर्षों तक कोई स्थानीय मलेरिया केस नहीं मिलना आवश्यक होता है। रायपुर इस लक्ष्य के बेहद करीब पहुंच चुका है। यदि आगामी अवधि में भी कोई स्थानीय मामला सामने नहीं आता है, तो जिले को मलेरिया मुक्त जिले का दर्जा मिल सकता है।
स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि मलेरिया नियंत्रण के लिए घरों के आसपास पानी जमा न होने दें, मच्छरदानी का उपयोग करें तथा बुखार आने पर तुरंत जांच कराएं, ताकि जिले की यह उपलब्धि बरकरार रह सके।


Journalist खबरीलाल















