रायपुर। छत्तीसगढ़ मिनी स्टील प्लांट एसोसिएशन द्वारा विमतारा में वास्तु एवं न्यूमेरोलॉजी पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वास्तु एवं न्यूमेरोलॉजी कंसलटेंट नरेश सिंघल ने उपस्थित उद्योगपतियों एवं गणमान्य नागरिकों को वास्तु शास्त्र, न्यूमेरोलॉजी, कर्म और भाग्य के संबंध में विस्तृत एवं महत्वपूर्ण जानकारी दी।
कार्यक्रम के दौरान नरेश सिंघल ने न्यूमेरोलॉजी के माध्यम से जन्मतिथि के आधार पर व्यक्ति के जीवन से जुड़ी विभिन्न बातों को समझाने का प्रयास किया। उन्होंने उपस्थित दो व्यक्तियों की जन्मतिथि के आधार पर उनके व्यक्ति के पिता, पत्नी एवं बच्चों के नाम के शुरुआती अक्षरों सहित कई अन्य महत्त्वपूर्ण जानकारियां बताईं, जिससे उपस्थित लोगों में विशेष रुचि देखने को मिली। इसके बाद उन्होंने वास्तु शास्त्र के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि सफलता में कर्म का योगदान 50 प्रतिशत, भाग्य का 30 प्रतिशत और वास्तु का 20 प्रतिशत माना जा सकता है। उनके अनुसार कर्म में दान, स्नान, तप, हवन, तंत्र, माला और यंत्र जैसी परंपराएं शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि दान, सहयोग और जरूरतमंदों की मदद जैसे कार्य सकारात्मक परिणाम देने वाले कर्म हैं। कर्म के साथ भाग्य और वास्तु का संतुलन व्यक्ति की प्रगति में सहायक हो सकता है।
उद्योग स्थापित करने से पहले भूमि का परीक्षण जरूरी - नरेश सिंघल ने कहा कि किसी भी उद्योग, व्यवसाय, घर या संस्थान की स्थापना से पहले भूमि और दिशाओं का वास्तु के अनुसार परीक्षण किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि दिशा के विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखते हुए यह देखा जाता है कि चुनी गई भूमि का पूर्व में किस प्रकार उपयोग हुआ था। उदाहरण के तौर पर उन्होंने कहा कि यह भी जांचा जाता है कि कहीं भूमि पूर्व में श्मशान स्थल तो नहीं रही अथवा वहां किसी पशु या मृत व्यक्ति को दफनाया तो नहीं गया था।
उन्होंने कहा कि व्यवसायिक प्रतिष्ठान स्थापित करने से पहले जमीन के ऊपर और नीचे की स्थिति का व्यवहारिक परीक्षण तथा वास्तु के अनुसार गहन परीक्षण महत्वपूर्ण है।


Journalist खबरीलाल