
वन मंत्री केदार कश्यप की पहल से कांगेर घाटी में NH-30 के चौड़ीकरण का मार्ग प्रशस्त। 6.01 किमी सड़क के चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण का प्रस्ताव महत्वपूर्ण चरण में, 8.386 हेक्टेयर वन भूमि के डायवर्जन को मिल चुकी है प्रथम चरण की सैद्धांतिक स्वीकृति। द्वितीय चरण की स्वीकृति के लिए केंद्र सरकार को भेजा गया प्रस्ताव, बस्तर में सुरक्षित और सुगम कनेक्टिविटी की दिशा में बड़ा कदम।रायपुर/बस्तर। बस्तर में सड़क अधोसंरचना को मजबूत करने और आम नागरिकों को बेहतर, सुरक्षित एवं सुगम आवागमन उपलब्ध कराने की दिशा में राज्य सरकार लगातार कार्य कर रही है। इसी क्रम में वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप की पहल और विभागीय स्तर पर लगातार की जा रही कार्रवाई से कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र से होकर गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग-30 के 6.010 किलोमीटर हिस्से के चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण की प्रक्रिया महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गई है।
जगदलपुर–सुकमा–कोंटा मार्ग के अंतर्गत NH-30 (पुराना NH-221) के किलोमीटर 25.530 से 31.540 तक के हिस्से के उन्नयन के लिए 8.386 हेक्टेयर वन भूमि के गैर-वानिकी उपयोग का प्रस्ताव है। भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से परियोजना को प्रथम चरण की सशर्त सैद्धांतिक स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है। अब प्रथम चरण में निर्धारित शर्तों के अनुपालन के पश्चात द्वितीय चरण की अंतिम स्वीकृति के लिए राज्य शासन द्वारा केंद्र सरकार से अनुरोध किया गया है। यह मार्ग बस्तर के दक्षिणी हिस्से की कनेक्टिविटी की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके चौड़ीकरण और मजबूतीकरण से जगदलपुर से सुकमा एवं कोंटा की ओर आवागमन को अधिक सुगम और सुरक्षित बनाने में मदद मिलेगी।
वन मंत्री केदार कश्यप की पहल से विभागीय प्रक्रिया में आई तेजी - वन मंत्री केदार कश्यप द्वारा बस्तर में विकास से जुड़ी महत्वपूर्ण परियोजनाओं को वन एवं पर्यावरणीय नियमों के अनुरूप समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने पर लगातार जोर दिया जा रहा है। इसी के अनुरूप वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा NH-30 से संबंधित प्रकरण में केंद्र सरकार से आवश्यक समन्वय करते हुए स्वीकृति प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया है।।भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के क्षेत्रीय कार्यालय, नागपुर द्वारा 13 अक्टूबर 2025 को परियोजना के लिए प्रथम चरण की सशर्त सैद्धांतिक स्वीकृति दी गई थी। इसके बाद स्वीकृति में निर्धारित वन एवं पर्यावरण संबंधी शर्तों की पूर्ति की कार्रवाई की गई।
प्रभारी अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (भू-प्रबंध) द्वारा 23 जून 2026 को शर्तों के अनुपालन से संबंधित प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया। इसके आधार पर छत्तीसगढ़ शासन के वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने 8 जुलाई 2026 को भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के नवा रायपुर स्थित उप कार्यालय को पत्र भेजकर द्वितीय चरण की स्वीकृति जारी करने का अनुरोध किया। इसके बाद 10 जुलाई 2026 को प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख, छत्तीसगढ़ के कार्यालय से भी प्रकरण में आवश्यक कार्रवाई को आगे बढ़ाया गया। विभागीय स्तर पर हुई इस प्रगति से परियोजना की अंतिम वन स्वीकृति का मार्ग आगे बढ़ा है।
क्षतिपूरक वनीकरण की राशि जमा, परियोजना की तैयारियों को भी मिलेगी गति - परियोजना के अंतर्गत वन भूमि के उपयोग के बदले निर्धारित क्षतिपूरक वनीकरण एवं अतिरिक्त क्षतिपूरक वनीकरण की राशि वित्तीय वर्ष 2025-26 की निर्धारित दर के अनुसार जमा की जा चुकी है। अंतिम स्वीकृति तक निर्धारित राशि में किसी प्रकार का अंतर आने की स्थिति में उसे प्रचलित दरों के अनुसार जमा किए जाने का प्रावधान भी किया गया है। भारत सरकार की निर्धारित गाइडलाइन के अनुसार अंतिम स्वीकृति से पहले परियोजना एजेंसी आवश्यक संसाधन जुटाने तथा अनुमत प्रारंभिक कार्यों को आगे बढ़ा सकेगी। हालांकि ब्लैक टॉपिंग सहित परियोजना को स्थायी अथवा पूर्ण स्वरूप देने वाले कार्य अंतिम स्वीकृति प्राप्त होने के बाद ही किए जा सकेंगे। इससे द्वितीय चरण की स्वीकृति मिलने तक आवश्यक तैयारियां पूरी करने और अंतिम मंजूरी के बाद निर्माण कार्य को तेजी से आगे बढ़ाने में सहायता मिलेगी।
बस्तर में विकास भी, पर्यावरण का संरक्षण भी - कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान छत्तीसगढ़ की समृद्ध प्राकृतिक विरासत और जैव-विविधता का महत्वपूर्ण केंद्र है। इसे ध्यान में रखते हुए सड़क परियोजना में वन, वन्यजीव और पर्यावरण संरक्षण से संबंधित सभी वैधानिक प्रावधानों के अनुपालन को प्राथमिकता दी जा रही है। राज्य सरकार का प्रयास है कि बस्तर में आवश्यक आधारभूत सुविधाओं का विस्तार हो, लेकिन विकास की इस प्रक्रिया में क्षेत्र की प्राकृतिक संपदा और जैव-विविधता के संरक्षण से किसी प्रकार का समझौता न हो। NH-30 की यह परियोजना विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच इसी संतुलित दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ाई जा रही है।
बेहतर सड़क से पर्यटन, व्यापार और क्षेत्रीय संपर्क को भी मिलेगा लाभ - NH-30 जगदलपुर को सुकमा और कोंटा की दिशा से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण राष्ट्रीय राजमार्ग है। संबंधित 6.010 किलोमीटर हिस्से के चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण से स्थानीय नागरिकों और यात्रियों को बेहतर आवागमन की सुविधा मिलने की उम्मीद है। सड़क संपर्क बेहतर होने से प्रशासनिक पहुंच को मजबूती मिलने के साथ ही पर्यटन एवं स्थानीय आर्थिक गतिविधियों के लिए भी बेहतर परिस्थितियां निर्मित होंगी। विशेष रूप से बस्तर के दूरस्थ क्षेत्रों को प्रमुख शहरी केंद्रों से जोड़ने की दिशा में यह परियोजना महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

वन मंत्री केदार कश्यप की पहल से कांगेर घाटी में NH-30 के चौड़ीकरण का मार्ग प्रशस्त। 6.01 किमी सड़क के चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण का प्रस्ताव महत्वपूर्ण चरण में, 8.386 हेक्टेयर वन भूमि के डायवर्जन को मिल चुकी है प्रथम चरण की सैद्धांतिक स्वीकृति। द्वितीय चरण की स्वीकृति के लिए केंद्र सरकार को भेजा गया प्रस्ताव, बस्तर में सुरक्षित और सुगम कनेक्टिविटी की दिशा में बड़ा कदम।रायपुर/बस्तर। बस्तर में सड़क अधोसंरचना को मजबूत करने और आम नागरिकों को बेहतर, सुरक्षित एवं सुगम आवागमन उपलब्ध कराने की दिशा में राज्य सरकार लगातार कार्य कर रही है। इसी क्रम में वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप की पहल और विभागीय स्तर पर लगातार की जा रही कार्रवाई से कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र से होकर गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग-30 के 6.010 किलोमीटर हिस्से के चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण की प्रक्रिया महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गई है।
जगदलपुर–सुकमा–कोंटा मार्ग के अंतर्गत NH-30 (पुराना NH-221) के किलोमीटर 25.530 से 31.540 तक के हिस्से के उन्नयन के लिए 8.386 हेक्टेयर वन भूमि के गैर-वानिकी उपयोग का प्रस्ताव है। भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से परियोजना को प्रथम चरण की सशर्त सैद्धांतिक स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है। अब प्रथम चरण में निर्धारित शर्तों के अनुपालन के पश्चात द्वितीय चरण की अंतिम स्वीकृति के लिए राज्य शासन द्वारा केंद्र सरकार से अनुरोध किया गया है। यह मार्ग बस्तर के दक्षिणी हिस्से की कनेक्टिविटी की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके चौड़ीकरण और मजबूतीकरण से जगदलपुर से सुकमा एवं कोंटा की ओर आवागमन को अधिक सुगम और सुरक्षित बनाने में मदद मिलेगी।
वन मंत्री केदार कश्यप की पहल से विभागीय प्रक्रिया में आई तेजी - वन मंत्री केदार कश्यप द्वारा बस्तर में विकास से जुड़ी महत्वपूर्ण परियोजनाओं को वन एवं पर्यावरणीय नियमों के अनुरूप समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने पर लगातार जोर दिया जा रहा है। इसी के अनुरूप वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा NH-30 से संबंधित प्रकरण में केंद्र सरकार से आवश्यक समन्वय करते हुए स्वीकृति प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया है।।भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के क्षेत्रीय कार्यालय, नागपुर द्वारा 13 अक्टूबर 2025 को परियोजना के लिए प्रथम चरण की सशर्त सैद्धांतिक स्वीकृति दी गई थी। इसके बाद स्वीकृति में निर्धारित वन एवं पर्यावरण संबंधी शर्तों की पूर्ति की कार्रवाई की गई।
प्रभारी अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (भू-प्रबंध) द्वारा 23 जून 2026 को शर्तों के अनुपालन से संबंधित प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया। इसके आधार पर छत्तीसगढ़ शासन के वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने 8 जुलाई 2026 को भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के नवा रायपुर स्थित उप कार्यालय को पत्र भेजकर द्वितीय चरण की स्वीकृति जारी करने का अनुरोध किया। इसके बाद 10 जुलाई 2026 को प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख, छत्तीसगढ़ के कार्यालय से भी प्रकरण में आवश्यक कार्रवाई को आगे बढ़ाया गया। विभागीय स्तर पर हुई इस प्रगति से परियोजना की अंतिम वन स्वीकृति का मार्ग आगे बढ़ा है।
क्षतिपूरक वनीकरण की राशि जमा, परियोजना की तैयारियों को भी मिलेगी गति - परियोजना के अंतर्गत वन भूमि के उपयोग के बदले निर्धारित क्षतिपूरक वनीकरण एवं अतिरिक्त क्षतिपूरक वनीकरण की राशि वित्तीय वर्ष 2025-26 की निर्धारित दर के अनुसार जमा की जा चुकी है। अंतिम स्वीकृति तक निर्धारित राशि में किसी प्रकार का अंतर आने की स्थिति में उसे प्रचलित दरों के अनुसार जमा किए जाने का प्रावधान भी किया गया है। भारत सरकार की निर्धारित गाइडलाइन के अनुसार अंतिम स्वीकृति से पहले परियोजना एजेंसी आवश्यक संसाधन जुटाने तथा अनुमत प्रारंभिक कार्यों को आगे बढ़ा सकेगी। हालांकि ब्लैक टॉपिंग सहित परियोजना को स्थायी अथवा पूर्ण स्वरूप देने वाले कार्य अंतिम स्वीकृति प्राप्त होने के बाद ही किए जा सकेंगे। इससे द्वितीय चरण की स्वीकृति मिलने तक आवश्यक तैयारियां पूरी करने और अंतिम मंजूरी के बाद निर्माण कार्य को तेजी से आगे बढ़ाने में सहायता मिलेगी।
बस्तर में विकास भी, पर्यावरण का संरक्षण भी - कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान छत्तीसगढ़ की समृद्ध प्राकृतिक विरासत और जैव-विविधता का महत्वपूर्ण केंद्र है। इसे ध्यान में रखते हुए सड़क परियोजना में वन, वन्यजीव और पर्यावरण संरक्षण से संबंधित सभी वैधानिक प्रावधानों के अनुपालन को प्राथमिकता दी जा रही है। राज्य सरकार का प्रयास है कि बस्तर में आवश्यक आधारभूत सुविधाओं का विस्तार हो, लेकिन विकास की इस प्रक्रिया में क्षेत्र की प्राकृतिक संपदा और जैव-विविधता के संरक्षण से किसी प्रकार का समझौता न हो। NH-30 की यह परियोजना विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच इसी संतुलित दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ाई जा रही है।
बेहतर सड़क से पर्यटन, व्यापार और क्षेत्रीय संपर्क को भी मिलेगा लाभ - NH-30 जगदलपुर को सुकमा और कोंटा की दिशा से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण राष्ट्रीय राजमार्ग है। संबंधित 6.010 किलोमीटर हिस्से के चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण से स्थानीय नागरिकों और यात्रियों को बेहतर आवागमन की सुविधा मिलने की उम्मीद है। सड़क संपर्क बेहतर होने से प्रशासनिक पहुंच को मजबूती मिलने के साथ ही पर्यटन एवं स्थानीय आर्थिक गतिविधियों के लिए भी बेहतर परिस्थितियां निर्मित होंगी। विशेष रूप से बस्तर के दूरस्थ क्षेत्रों को प्रमुख शहरी केंद्रों से जोड़ने की दिशा में यह परियोजना महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।


Journalist खबरीलाल














