पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ तिवारी के निर्देशन एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक लखन पटले तथा नगर पुलिस अधीक्षक कोरबा प्रतीक चतुर्वेदी के मार्गदर्शन में गणेश उत्सव के मद्देनजर कोरबा पुलिस द्वारा जिले के विभिन्न गणेश पंडालों, गणेश उत्सव समितियों, बाजारों एवं भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में पहुंचकर साइबर जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है।
अभियान के दौरान पुलिस टीम द्वारा आम नागरिकों एवं गणेश उत्सव समितियों के सदस्यों को साइबर अपराध के विभिन्न तरीकों एवं उनसे बचाव के उपायों की जानकारी प्रश्नोत्तर शैली में दी गई।
1) प्रश्न: साइबर फ्रॉड से बचने के लिए सबसे जरूरी सावधानी क्या है ?
उत्तर: किसी भी अनजान व्यक्ति पर ऑनलाइन भरोसा न करें और अपनी बैंकिंग एवं व्यक्तिगत जानकारी जैसे ओटीपी, यूपीआई पिन, एटीएम/डेबिट कार्ड की जानकारी, पासवर्ड एवं अन्य गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा न करें।
2) प्रश्न: क्या अनजान लिंक पर क्लिक करना खतरनाक हो सकता है ?
उत्तर: हां। साइबर ठग फर्जी लिंक भेजकर लोगों को नकली वेबसाइट पर ले जा सकते हैं या उनके मोबाइल/खाते से संबंधित जानकारी हासिल करने का प्रयास कर सकते हैं। इसलिए अनजान एवं संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें।
3) प्रश्न: अनजान APK फाइल क्या नुकसान कर सकती है ?
उत्तर: साइबर ठग बैंक, सरकारी योजना, बिजली बिल, केवाईसी, नौकरी या अन्य प्रलोभन के नाम पर अनजान APK फाइल डाउनलोड करवाने का प्रयास कर सकते हैं। ऐसी फाइल मोबाइल में सुरक्षा संबंधी जोखिम पैदा कर सकती है। अनजान स्रोत से प्राप्त APK फाइल डाउनलोड या इंस्टॉल न करें।
प्रश्न: डिजिटल अरेस्ट क्या है ?
उत्तर: साइबर ठग पुलिस, सीबीआई, नारकोटिक्स, आरबीआई या अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बनकर वीडियो कॉल या फोन करते हैं और व्यक्ति को किसी अपराध में फंसाने का डर दिखाकर घर में रहने, किसी से बात न करने या पैसे ट्रांसफर करने का दबाव बनाते हैं। ऐसी स्थिति में घबराएं नहीं। किसी भी सरकारी एजेंसी द्वारा इस तरह वीडियो कॉल पर डिजिटल अरेस्ट कर पैसे जमा कराने की वैध प्रक्रिया नहीं है।
पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ तिवारी के निर्देशन एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक लखन पटले तथा नगर पुलिस अधीक्षक कोरबा प्रतीक चतुर्वेदी के मार्गदर्शन में गणेश उत्सव के मद्देनजर कोरबा पुलिस द्वारा जिले के विभिन्न गणेश पंडालों, गणेश उत्सव समितियों, बाजारों एवं भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में पहुंचकर साइबर जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है।
अभियान के दौरान पुलिस टीम द्वारा आम नागरिकों एवं गणेश उत्सव समितियों के सदस्यों को साइबर अपराध के विभिन्न तरीकों एवं उनसे बचाव के उपायों की जानकारी प्रश्नोत्तर शैली में दी गई।
1) प्रश्न: साइबर फ्रॉड से बचने के लिए सबसे जरूरी सावधानी क्या है ?
उत्तर: किसी भी अनजान व्यक्ति पर ऑनलाइन भरोसा न करें और अपनी बैंकिंग एवं व्यक्तिगत जानकारी जैसे ओटीपी, यूपीआई पिन, एटीएम/डेबिट कार्ड की जानकारी, पासवर्ड एवं अन्य गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा न करें।
2) प्रश्न: क्या अनजान लिंक पर क्लिक करना खतरनाक हो सकता है ?
उत्तर: हां। साइबर ठग फर्जी लिंक भेजकर लोगों को नकली वेबसाइट पर ले जा सकते हैं या उनके मोबाइल/खाते से संबंधित जानकारी हासिल करने का प्रयास कर सकते हैं। इसलिए अनजान एवं संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें।
3) प्रश्न: अनजान APK फाइल क्या नुकसान कर सकती है ?
उत्तर: साइबर ठग बैंक, सरकारी योजना, बिजली बिल, केवाईसी, नौकरी या अन्य प्रलोभन के नाम पर अनजान APK फाइल डाउनलोड करवाने का प्रयास कर सकते हैं। ऐसी फाइल मोबाइल में सुरक्षा संबंधी जोखिम पैदा कर सकती है। अनजान स्रोत से प्राप्त APK फाइल डाउनलोड या इंस्टॉल न करें।
प्रश्न: डिजिटल अरेस्ट क्या है ?
उत्तर: साइबर ठग पुलिस, सीबीआई, नारकोटिक्स, आरबीआई या अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बनकर वीडियो कॉल या फोन करते हैं और व्यक्ति को किसी अपराध में फंसाने का डर दिखाकर घर में रहने, किसी से बात न करने या पैसे ट्रांसफर करने का दबाव बनाते हैं। ऐसी स्थिति में घबराएं नहीं। किसी भी सरकारी एजेंसी द्वारा इस तरह वीडियो कॉल पर डिजिटल अरेस्ट कर पैसे जमा कराने की वैध प्रक्रिया नहीं है।


Journalist खबरीलाल














