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National (खबरीलाल न्यूज़) :: भारत ने अपना पहला AI सटेलाइट भेजा अंतरिक्ष मे भेजा, अमेरिका, यूरोपीय यूनियन और चीन के बाद भारत दुनिया का चौथा देश बना :

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khabrilalनई दिल्ली। भारत ने अंतरिक्ष में एक ऐसी नई तकनीक की शुरुआत की है, जो सैटेलाइट से मिलने वाले डेटा के इस्तेमाल का तरीका बदल सकती है। अब सैटेलाइट सिर्फ धरती की तस्वीरें खींचकर नीचे भेजने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अंतरिक्ष में ही तस्वीरों और डेटा का शुरुआती विश्लेषण भी करेगा। इससे बॉर्डर की निगरानी, बाढ़ जैसी आपदाओं और खेती से जुड़े कामों में तेजी आ सकती है। सबसे खास बात यह है कि जरूरी डेटा ही धरती तक भेजा जा सकेगा, जिससे समय और डेटा ट्रांसफर की लागत कम होने की उम्मीद है। 

रात 11:48 बजे स्पेसएक्स के मिशन से हुआ लॉन्च - हैदराबाद की कंपनी टेकमीटूस्पेस का एमओआई-1ए सैटेलाइट स्पेसएक्स के ट्रांसपोर्टर-18 मिशन के जरिए रात 11:48 बजे अंतरिक्ष में भेजा गया। कंपनी के अनुसार, यह भारत का पहला ऑर्बिटल कंप्यूटिंग सैटेलाइट है। इस क्षमता के साथ अमेरिका, यूरोपीय यूनियन और चीन के बाद भारत दुनिया का चौथा देश बन गया है। इस सैटेलाइट की खासियत यह है कि इसमें डेटा को धरती तक भेजने से पहले अंतरिक्ष में ही प्रोसेस करने की क्षमता है।

300 जीबी डेटा में से जरूरी 5 जीबी ही भेजेगा आमतौर पर सैटेलाइट से मिलने वाला डेटा पहले धरती पर भेजा जाता है। इसके बाद जमीन पर मौजूद सिस्टम उस डेटा की जांच और उसका विश्लेषण करते हैं। एमओआई-1ए में यह प्रक्रिया अंतरिक्ष में ही शुरू की जा सकती है। टेकमीटूस्पेस के सीईओ रौनक कुमार सामंत राय के मुताबिक, मान लीजिए किसी सैटेलाइट ने 300 जीबी डेटा इकट्ठा किया और उसमें सिर्फ 5 जीबी जानकारी उपयोगी है। ऐसी स्थिति में AI उस जरूरी डेटा को पहचान सकता है और केवल वही जानकारी धरती पर भेजी जा सकती है। 

इससे पूरा डेटा नीचे भेजने की जरूरत कम होगी। इसके साथ ही डेटा ट्रांसफर में लगने वाला समय और खर्च भी कम हो सकता है। बाढ़, खेती और बॉर्डर निगरानी में मदद इस तकनीक का इस्तेमाल कई क्षेत्रों में किया जा सकता है। इनमें बाढ़ की निगरानी, जंगलों की स्थिति, फसलों की निगरानी, खनन क्षेत्रों की जानकारी और सीमा या जमीन की निगरानी शामिल है। उदाहरण के तौर पर किसी इलाके में बाढ़ आने पर सैटेलाइट वहां की तस्वीरों का विश्लेषण कर सकता है। इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि पानी कितने क्षेत्र में फैला है। 

इसके बाद AI के जरिए जरूरी जानकारी अलग की जा सकती है और उसे ही धरती पर भेजा जा सकता है। इससे आपदा के समय जरूरी जानकारी जल्दी मिलने में मदद मिल सकती है। 2028 तक अंतरिक्ष में डेटा सेंटर बनाने की योजना टेकमीटूस्पेस ने भविष्य के लिए अंतरिक्ष में एक बड़ा डेटा सेंटर तैयार करने की योजना भी बनाई है। कंपनी के मुताबिक, 2028 में इस दिशा में काम आगे बढ़ाने की तैयारी है। इसके लिए करीब 100-100 किलो वजन वाले ज्यादा क्षमता वाले सैटेलाइट अंतरिक्ष में भेजने की योजना है। इन सैटेलाइट में बड़ी संख्या में ग्राफिक्स प्रोसेसर लगाने और करीब 100 टेराबाइट स्टोरेज रखने की योजना बताई गई है। कंपनी का लक्ष्य कई सैटेलाइट को आपस में जोड़कर अंतरिक्ष में ही बड़े स्तर पर डेटा प्रोसेस और एनालिसिस करने की सुविधा तैयार करना है।



khabrilalनई दिल्ली। भारत ने अंतरिक्ष में एक ऐसी नई तकनीक की शुरुआत की है, जो सैटेलाइट से मिलने वाले डेटा के इस्तेमाल का तरीका बदल सकती है। अब सैटेलाइट सिर्फ धरती की तस्वीरें खींचकर नीचे भेजने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अंतरिक्ष में ही तस्वीरों और डेटा का शुरुआती विश्लेषण भी करेगा। इससे बॉर्डर की निगरानी, बाढ़ जैसी आपदाओं और खेती से जुड़े कामों में तेजी आ सकती है। सबसे खास बात यह है कि जरूरी डेटा ही धरती तक भेजा जा सकेगा, जिससे समय और डेटा ट्रांसफर की लागत कम होने की उम्मीद है। 

रात 11:48 बजे स्पेसएक्स के मिशन से हुआ लॉन्च - हैदराबाद की कंपनी टेकमीटूस्पेस का एमओआई-1ए सैटेलाइट स्पेसएक्स के ट्रांसपोर्टर-18 मिशन के जरिए रात 11:48 बजे अंतरिक्ष में भेजा गया। कंपनी के अनुसार, यह भारत का पहला ऑर्बिटल कंप्यूटिंग सैटेलाइट है। इस क्षमता के साथ अमेरिका, यूरोपीय यूनियन और चीन के बाद भारत दुनिया का चौथा देश बन गया है। इस सैटेलाइट की खासियत यह है कि इसमें डेटा को धरती तक भेजने से पहले अंतरिक्ष में ही प्रोसेस करने की क्षमता है।

300 जीबी डेटा में से जरूरी 5 जीबी ही भेजेगा आमतौर पर सैटेलाइट से मिलने वाला डेटा पहले धरती पर भेजा जाता है। इसके बाद जमीन पर मौजूद सिस्टम उस डेटा की जांच और उसका विश्लेषण करते हैं। एमओआई-1ए में यह प्रक्रिया अंतरिक्ष में ही शुरू की जा सकती है। टेकमीटूस्पेस के सीईओ रौनक कुमार सामंत राय के मुताबिक, मान लीजिए किसी सैटेलाइट ने 300 जीबी डेटा इकट्ठा किया और उसमें सिर्फ 5 जीबी जानकारी उपयोगी है। ऐसी स्थिति में AI उस जरूरी डेटा को पहचान सकता है और केवल वही जानकारी धरती पर भेजी जा सकती है। 

इससे पूरा डेटा नीचे भेजने की जरूरत कम होगी। इसके साथ ही डेटा ट्रांसफर में लगने वाला समय और खर्च भी कम हो सकता है। बाढ़, खेती और बॉर्डर निगरानी में मदद इस तकनीक का इस्तेमाल कई क्षेत्रों में किया जा सकता है। इनमें बाढ़ की निगरानी, जंगलों की स्थिति, फसलों की निगरानी, खनन क्षेत्रों की जानकारी और सीमा या जमीन की निगरानी शामिल है। उदाहरण के तौर पर किसी इलाके में बाढ़ आने पर सैटेलाइट वहां की तस्वीरों का विश्लेषण कर सकता है। इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि पानी कितने क्षेत्र में फैला है। 

इसके बाद AI के जरिए जरूरी जानकारी अलग की जा सकती है और उसे ही धरती पर भेजा जा सकता है। इससे आपदा के समय जरूरी जानकारी जल्दी मिलने में मदद मिल सकती है। 2028 तक अंतरिक्ष में डेटा सेंटर बनाने की योजना टेकमीटूस्पेस ने भविष्य के लिए अंतरिक्ष में एक बड़ा डेटा सेंटर तैयार करने की योजना भी बनाई है। कंपनी के मुताबिक, 2028 में इस दिशा में काम आगे बढ़ाने की तैयारी है। इसके लिए करीब 100-100 किलो वजन वाले ज्यादा क्षमता वाले सैटेलाइट अंतरिक्ष में भेजने की योजना है। इन सैटेलाइट में बड़ी संख्या में ग्राफिक्स प्रोसेसर लगाने और करीब 100 टेराबाइट स्टोरेज रखने की योजना बताई गई है। कंपनी का लक्ष्य कई सैटेलाइट को आपस में जोड़कर अंतरिक्ष में ही बड़े स्तर पर डेटा प्रोसेस और एनालिसिस करने की सुविधा तैयार करना है।


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