नयी दिल्ली. दक्षिण अफ्रीका में नस्ली न्याय और
‘एलजीबीटी’ अधिकारों के संघर्ष के लिए नोबेल शांति पुरस्कार जीतने वाले
सक्रिय कार्यकर्ता आर्कबिशप डेसमंड टूटू तथा इतालवी पत्रकार एवं यूरोपीय
संघ की संसद के अध्यक्ष डेविड सासोली को राज्यसभा में बुधवार को
श्रद्धांजलि दी गई। डेसमंड टूटू का 26 दिसंबर 2021 को 90 साल की उम्र में निधन हो गया था।
सासोली ने 11 जनवरी 2022 को इटली के एक अस्पताल में 65 साल की उम्र में
अंतिम श्वांस ली। उच्च सदन की बैठक शुरू होने पर सभापति एम वेंकैया नायडू
ने टूटू का जिक्र करते हुए दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद के खिलाफ उनके अंिहसक
संघर्ष को याद किया। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी के अंिहसा के सिद्धांत
का पालन करने वाले टूटू को सामाजिक एवं राजनीतिक बदलाव के लिए और विश्व
शांति में उल्लेखनीय योगदान के लिए 2005 में गांधी शांति पुरस्कार से भी
सम्मानित किया गया था।
उन्होंने कहा, ‘‘शांति के दूत और मानवाधिकारों के हिमायती, आर्कबिशप
टूटू को दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद के खिलाफ उनके अंिहसक संघर्ष के लिए
हमेशा याद किया जाएगा।’’ सासोली को उत्कृष्ट मानवतावादी बताते हुए नायडू
ने कहा कि उन्होंने हमेशा समानता के सिद्धांत का पालन किया, भारत के
दृष्टिकोण को समझा तथा उसे महत्व दिया। सभापति ने मलेशिया में 17 से 19 दिसंबर 2021 के बीच भीषण बारिश होने और
इसकी वजह से बाढ़ आने का जिक्र करते हुए कहा कि 100 साल में हुई इस सर्वाधिक
विनाशकारी तबाही में वहां 70 हजार से अधिक लोग विस्थापित हो गए और 50 से
अधिक लोगों की जान चली गई। इस प्राकृतिक आपदा में मलेशिया में संपत्ति का
भी नुकसान हुआ। उन्होंने कहा कि संकट की इस घड़ी में भारत मलेशिया के साथ
है।
नायडू ने टोंगा गणराज्य में 15 जनवरी को पानी के अंदर हुए ज्वालामुखी
विस्फोट की वजह से सुनामी आने और इससे हुए नुकसान का भी जिक्र किया।
उन्होंने बताया कि इस प्राकृतिक आपदा की वजह से देश की 80 फीसदी से अधिक
आबादी प्रभावित हुई है। सभापति ने कहा कि भारत ने टोंगा गणराज्य के लिए
तत्काल दो लाख डॉलर की आर्थिक मदद भेजी। इसके बाद सदन में सदस्यों ने
दिवंगत लोगों के सम्मान में कुछ पलों का मौन रखा।
नयी दिल्ली. दक्षिण अफ्रीका में नस्ली न्याय और
‘एलजीबीटी’ अधिकारों के संघर्ष के लिए नोबेल शांति पुरस्कार जीतने वाले
सक्रिय कार्यकर्ता आर्कबिशप डेसमंड टूटू तथा इतालवी पत्रकार एवं यूरोपीय
संघ की संसद के अध्यक्ष डेविड सासोली को राज्यसभा में बुधवार को
श्रद्धांजलि दी गई। डेसमंड टूटू का 26 दिसंबर 2021 को 90 साल की उम्र में निधन हो गया था।
सासोली ने 11 जनवरी 2022 को इटली के एक अस्पताल में 65 साल की उम्र में
अंतिम श्वांस ली। उच्च सदन की बैठक शुरू होने पर सभापति एम वेंकैया नायडू
ने टूटू का जिक्र करते हुए दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद के खिलाफ उनके अंिहसक
संघर्ष को याद किया। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी के अंिहसा के सिद्धांत
का पालन करने वाले टूटू को सामाजिक एवं राजनीतिक बदलाव के लिए और विश्व
शांति में उल्लेखनीय योगदान के लिए 2005 में गांधी शांति पुरस्कार से भी
सम्मानित किया गया था।
उन्होंने कहा, ‘‘शांति के दूत और मानवाधिकारों के हिमायती, आर्कबिशप
टूटू को दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद के खिलाफ उनके अंिहसक संघर्ष के लिए
हमेशा याद किया जाएगा।’’ सासोली को उत्कृष्ट मानवतावादी बताते हुए नायडू
ने कहा कि उन्होंने हमेशा समानता के सिद्धांत का पालन किया, भारत के
दृष्टिकोण को समझा तथा उसे महत्व दिया। सभापति ने मलेशिया में 17 से 19 दिसंबर 2021 के बीच भीषण बारिश होने और
इसकी वजह से बाढ़ आने का जिक्र करते हुए कहा कि 100 साल में हुई इस सर्वाधिक
विनाशकारी तबाही में वहां 70 हजार से अधिक लोग विस्थापित हो गए और 50 से
अधिक लोगों की जान चली गई। इस प्राकृतिक आपदा में मलेशिया में संपत्ति का
भी नुकसान हुआ। उन्होंने कहा कि संकट की इस घड़ी में भारत मलेशिया के साथ
है।
नायडू ने टोंगा गणराज्य में 15 जनवरी को पानी के अंदर हुए ज्वालामुखी
विस्फोट की वजह से सुनामी आने और इससे हुए नुकसान का भी जिक्र किया।
उन्होंने बताया कि इस प्राकृतिक आपदा की वजह से देश की 80 फीसदी से अधिक
आबादी प्रभावित हुई है। सभापति ने कहा कि भारत ने टोंगा गणराज्य के लिए
तत्काल दो लाख डॉलर की आर्थिक मदद भेजी। इसके बाद सदन में सदस्यों ने
दिवंगत लोगों के सम्मान में कुछ पलों का मौन रखा।



Journalist खबरीलाल














