रायपुर. कोरोना की दूसरी लहर के बाद आये म्यूकरमाइकोसिस
(ब्लैक फंगस) का सबसे अधिक प्रभाव मरीजों के जबड़ों पर पड़ा था. फंगस के कारण
सौ से ज्यादा मरीजों के जबड़े की पूरी हड्डियां गल गईं थीं. इस बीमारी से
ठीक होने के बावजूद मरीजों को जीवित रहने के लिए जरूरी खाना-पीना दूभर हो
गया है. इस स्थिति से निबटने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के
दंत रोग विभाग ने डायरेक्टर डॉ. नितिन एम. नागरकर के नेतृत्व में पेशंट
स्पेसिफिक इम्प्लांट (पीएसआई) तैयार कर इसका परीक्षण भी कर लिया. टाईटेनियम
धातु के प्लेट से बने इस इम्प्लांट के लगने के बाद मरीज सर्जरी के दूसरे
दिन से ही सामान्य खाना शुरू कर सकता है. एम्स रायपुर का दावा है कि ब्लैक
फंगस के मरीजों को राहत देने के लिए यह देश में अपनी तरह की पहली कोशिश है.
रायपुर. कोरोना की दूसरी लहर के बाद आये म्यूकरमाइकोसिस
(ब्लैक फंगस) का सबसे अधिक प्रभाव मरीजों के जबड़ों पर पड़ा था. फंगस के कारण
सौ से ज्यादा मरीजों के जबड़े की पूरी हड्डियां गल गईं थीं. इस बीमारी से
ठीक होने के बावजूद मरीजों को जीवित रहने के लिए जरूरी खाना-पीना दूभर हो
गया है. इस स्थिति से निबटने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के
दंत रोग विभाग ने डायरेक्टर डॉ. नितिन एम. नागरकर के नेतृत्व में पेशंट
स्पेसिफिक इम्प्लांट (पीएसआई) तैयार कर इसका परीक्षण भी कर लिया. टाईटेनियम
धातु के प्लेट से बने इस इम्प्लांट के लगने के बाद मरीज सर्जरी के दूसरे
दिन से ही सामान्य खाना शुरू कर सकता है. एम्स रायपुर का दावा है कि ब्लैक
फंगस के मरीजों को राहत देने के लिए यह देश में अपनी तरह की पहली कोशिश है.



Journalist खबरीलाल














