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news raipur:: सरकार को सौंपी गई 12 वर्ष पहले हुए मदनवाड़ा नक्सली हमले की जांच रिपोर्ट:

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 रायपुर । छत्‍तीसगढ़ में राजनांदगांव जिले
के मदनवाड़ा में करीब 12 वर्ष पहले हुए नक्सली हमले की जांच के लिए गठित
न्यायिक जांच आयोग ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है। रिपोर्ट मंगलवार
को मुख्य सचिव अमिताभ जैन को दी गई है। अब यह रिपोर्ट पहले कैबिनेट में रखी
जाएगी। इसके बाद विधानसभा में पेश किया जाएगा। सरकार ने जांच के लिए करीब
दो वर्ष पहले इलहाबाद हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति शंभूनाथ
श्रीवास्तव की अध्यक्षता में एक सदस्यीय आयोग का गठन किया था।


यह है मामला
12 जुलाई 2009
को मदनवाड़ा कैंप से बाहर निकले जवानों पर नक्सलियों ने हमला कर दिया। इसमें
दो पुलिस कर्मी वीरगति को प्राप्त हो गए थे। घटना की सूचना मिलते ही
तत्कालीन एसपी वीके चौबे फोर्स के साथ घटना स्थल के लिए रवाना हुए। रास्ते
में ग्राम कोरकोट्टी के पास नक्सलियों ने घेर कर गोलीबारी शुरू कर दी।
इसमें एसपी समेत 25 जवान बलिदान हो गए थे।

इस वजह की गई न्यायिक जांच
जांच
आयोग के गठन के पीछे सरकार का तर्क था कि करीब 10 वर्ष बाद भी घटना के
संबंध में सार्वजनिक महत्व के कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर भ्रम की स्थिति बनी
हुई है। अफसरों के अनुसार इस जांच इन भ्रमों को दूर करने का प्रयास किया
जाएगा। बता दें कि यह घटना जब हुई तक मुकेश गुप्ता दुर्ग रेंज आइजी थे।

 

 


 रायपुर । छत्‍तीसगढ़ में राजनांदगांव जिले
के मदनवाड़ा में करीब 12 वर्ष पहले हुए नक्सली हमले की जांच के लिए गठित
न्यायिक जांच आयोग ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है। रिपोर्ट मंगलवार
को मुख्य सचिव अमिताभ जैन को दी गई है। अब यह रिपोर्ट पहले कैबिनेट में रखी
जाएगी। इसके बाद विधानसभा में पेश किया जाएगा। सरकार ने जांच के लिए करीब
दो वर्ष पहले इलहाबाद हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति शंभूनाथ
श्रीवास्तव की अध्यक्षता में एक सदस्यीय आयोग का गठन किया था।


यह है मामला
12 जुलाई 2009
को मदनवाड़ा कैंप से बाहर निकले जवानों पर नक्सलियों ने हमला कर दिया। इसमें
दो पुलिस कर्मी वीरगति को प्राप्त हो गए थे। घटना की सूचना मिलते ही
तत्कालीन एसपी वीके चौबे फोर्स के साथ घटना स्थल के लिए रवाना हुए। रास्ते
में ग्राम कोरकोट्टी के पास नक्सलियों ने घेर कर गोलीबारी शुरू कर दी।
इसमें एसपी समेत 25 जवान बलिदान हो गए थे।

इस वजह की गई न्यायिक जांच
जांच
आयोग के गठन के पीछे सरकार का तर्क था कि करीब 10 वर्ष बाद भी घटना के
संबंध में सार्वजनिक महत्व के कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर भ्रम की स्थिति बनी
हुई है। अफसरों के अनुसार इस जांच इन भ्रमों को दूर करने का प्रयास किया
जाएगा। बता दें कि यह घटना जब हुई तक मुकेश गुप्ता दुर्ग रेंज आइजी थे।

 

 


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