कैनबरा. अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ंिब्लकन ने
शुक्रवार को कहा कि चीन के साथ टकराव अपरिहार्य नहीं है, लेकिन अमेरिका को
अपने सहयोगियों के साथ नियम-आधारित प्रणाली के लिए खड़ा रहना होगा, जिस
प्रणाली को चीनी आक्रमण से खतरा है।
ंिब्लकन आॅस्ट्रेलिया, भारत और जापान के विदेश मंत्रियों के साथ बैठक से
कुछ समय पहले बोल रहे थे। हिन्द-प्रशांत क्षेत्र के इन चार लोकतांत्रिक
देशों के समूह को “क्वाड” का नाम दिया गया है, जिसका गठन चीन के क्षेत्रीय
प्रभाव का मुकाबला करने के लिए किया गया है।
एक पत्रकार द्वारा यह पूछे जाने पर कि क्या हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में
चीन के साथ टकराव अपरिहार्य है, ंिब्लकन ने जवाब दिया, ‘‘कुछ भी अपरिहार्य
नहीं है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मेरा मानना है कि हम हाल के वर्षों में चीन के
आक्रामक रुख को लेकर अपनी ंिचताएं साझा करते हैं। चीन का घरेलू स्तर पर
काफी आक्रामक रुख तो है ही, इस क्षेत्र में भी उससे कहीं ज्यादा आक्रामक
रुख है।’’
ंिब्लकन की यात्रा एशिया में अमेरिका के हितों को मजबूत करने और इस क्षेत्र
में चीन की बढ़ती आक्रामता से निपटने के इरादे से तैयार की गई है। वह फिजी
भी जाएंगे और हवाई में अपने जापानी और दक्षिण कोरियाई समकक्षों के साथ
उत्तर कोरिया से संबंधित गंभीर ंिचताओं पर चर्चा करेंगे।
चीनी विदेश मंत्रालय ने इस सप्ताह अमेरिका पर आरोप लगाया था कि वह अन्य
देशों को अपने लोकतंत्र के मानकों को स्वीकार करने के लिए मजबूर करने के
वास्ते क्वाड का इस्तेमाल कर रहा है।
कैनबरा. अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ंिब्लकन ने
शुक्रवार को कहा कि चीन के साथ टकराव अपरिहार्य नहीं है, लेकिन अमेरिका को
अपने सहयोगियों के साथ नियम-आधारित प्रणाली के लिए खड़ा रहना होगा, जिस
प्रणाली को चीनी आक्रमण से खतरा है।
ंिब्लकन आॅस्ट्रेलिया, भारत और जापान के विदेश मंत्रियों के साथ बैठक से
कुछ समय पहले बोल रहे थे। हिन्द-प्रशांत क्षेत्र के इन चार लोकतांत्रिक
देशों के समूह को “क्वाड” का नाम दिया गया है, जिसका गठन चीन के क्षेत्रीय
प्रभाव का मुकाबला करने के लिए किया गया है।
एक पत्रकार द्वारा यह पूछे जाने पर कि क्या हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में
चीन के साथ टकराव अपरिहार्य है, ंिब्लकन ने जवाब दिया, ‘‘कुछ भी अपरिहार्य
नहीं है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मेरा मानना है कि हम हाल के वर्षों में चीन के
आक्रामक रुख को लेकर अपनी ंिचताएं साझा करते हैं। चीन का घरेलू स्तर पर
काफी आक्रामक रुख तो है ही, इस क्षेत्र में भी उससे कहीं ज्यादा आक्रामक
रुख है।’’
ंिब्लकन की यात्रा एशिया में अमेरिका के हितों को मजबूत करने और इस क्षेत्र
में चीन की बढ़ती आक्रामता से निपटने के इरादे से तैयार की गई है। वह फिजी
भी जाएंगे और हवाई में अपने जापानी और दक्षिण कोरियाई समकक्षों के साथ
उत्तर कोरिया से संबंधित गंभीर ंिचताओं पर चर्चा करेंगे।
चीनी विदेश मंत्रालय ने इस सप्ताह अमेरिका पर आरोप लगाया था कि वह अन्य
देशों को अपने लोकतंत्र के मानकों को स्वीकार करने के लिए मजबूर करने के
वास्ते क्वाड का इस्तेमाल कर रहा है।



Journalist खबरीलाल














