इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के 15वें सीजन से पहले खिलाड़ियों की
नीलामी 12 और 13 फरवरी को बेंगलुरु में होगी। नीलामी के शॉर्टलिस्ट हुए 600
खिलाड़ियों में से लीग के लिए अधिकतम 217 ही खरीदे जा सकेंगे।
फ्रेंचाइजियों ने 27 खिलाड़ियों को रिटेन किया है। इनमें आठ विदेशी और चार
अनकैप्ड भारतीय खिलाड़ी शामिल हैं। छह खिलाड़ी ड्राफ्ट के जरिए चुने गए
हैं। नीलामी के दौरान कई ऐसे नियम या शब्द इस्तेमाल में लाए जाते हैं जिसे
ज्यादातर लोग नहीं जानते हैं। हम आपको यहां आसान सवाल-जवाबों से नीलामी से
जुड़े छोटे-बड़े नियमों को समझा रहे हैं।
1. क्या है आईपीएल नीलामी की प्रक्रिया?
सबसे पहले खिलाड़ी नीलामी में शामिल होने के लिए रजिस्ट्रेशन कराते हैं। इस
बार 19 देशों के 1214 खिलाड़ियों ने नीलामी के लिए अपना नाम दिया गया था।
उनमें से फ्रेंचाइजियों ने 590 खिलाड़ियों को नीलामी के शॉर्टलिस्ट किया।
इसके बाद नीलामी से ठीक एक दिन पहले उनके अनुरोध पर अंडर-19 वर्ल्ड कप में
खेलने वाले नौ खिलाड़ियों के नाम जोड़े गए। इसके साथ ही मध्यप्रदेश के लिए
रणजी खेलने वाले मिहिर हिरवानी को भी मेगा ऑक्शन में शामिल किया गया है। इस
तरह 600 खिलाड़ियों की किस्मत दांव पर होगी। सबसे पहले 10 मार्की
खिलाड़ियों की बोली लगेगी। बल्लेबाजों, गेंदबाजों, विकेटकीपर, ऑलराउंडर्स
को अलग-अलग ग्रुप में रखा गया है। मार्की खिलाड़ियों के बाद बारी-बारी से
इनकी बोली लगेगी।
2. सोल्ड या अनसोल्ड खिलाड़ी कौन होते हैं?
नीलामीकर्ता खिलाड़ियों का नाम और उनका बेस प्राइस पुकारते हैं। इस पर
फ्रेंचाइजी अपना पैडल उठाकर बोली लगाती हैं। जिन खिलाड़ियों के लिए कम से
कम एक भी फ्रेंचाइजी ने पैडल उठाया होता है उन्हें ‘सोल्ड’ यानि बिका हुआ
माना जाता है। एक खिलाड़ी के एक से अधिक फ्रेंचाइजी बोली लगा सकती है।
जिसने सबसे अधिक रुपये की बोली लगाई होती है वह खिलाड़ी उस टीम का हो जाता
है। अगर किसी खिलाड़ी के लिए कोई फ्रेंचाइजी पैडल नहीं उठाती है तो
उन्होंने ‘अनसोल्ड’ यानि नहीं बिका हुआ माना जाता है।
3. क्या अनसोल्ड हुए खिलाड़ी बिक पाएंगे?
सबके मन में इस बात को लेकर एक धारणा रहती है कि अनसोल्ड रहने वाले खिलाड़ी
दोबारा नहीं बिक सकते हैं। यह गलत है। दिन की नीलामी जब समाप्त होने वाली
होती है तो ठीक पहले फ्रेंचाइजी अनसोल्ड रहने वाले कुछ खिलाड़ियों की सूची
नीलामीकर्ता को सौंपती है। उन खिलाड़ियों का नाम फिर से पुकारा जाता है।
टीमें अगर चाहे तो उन्हें खरीद सकती हैं।
4. कैप्ड और अनकैप्ड खिलाड़ी कौन होते हैं?
कैप्ड की श्रेणी में वे खिलाड़ी आते हैं जो अपने देश के लिए टेस्ट, वनडे या
टी-20 मैच खेल चुके होते हैं। वहीं, अपने देश के लिए एक भी अंतरराष्ट्रीय
मैच नहीं खेलने वाले खिलाड़ी को अनकैप्ड कहते हैं।
5. एक टीम में अधिकतम और न्यूनतम कितने खिलाड़ी हो सकते हैं?
एक टीम में अधिकतम 25 खिलाड़ी हो सकते हैं। जहां तक न्यूनतम खिलाड़ियों की बात है तो कम से कम 18 खिलाड़ी एक टीम में होने चाहिए।
6. एक टीम में कितने विदेशी खिलाड़ी होंगे?
एक फ्रेंचाइजी अपने दल में कुल 25 खिलाड़ियों में ज्यादा से ज्यादा आठ
विदेशियों को रख सकते हैं। प्लेइंग-11 में चार से ज्यादा विदेशी खिलाड़ी
शामिल नहीं हो सकते हैं। कई टीमें तीन विदेशियों के साथ मैच में उतर चुकी
हैं। इसका मतलब यह हुआ कि प्लेइंग-11 में चार से ज्यादा खिलाड़ी नहीं रख
सकते हैं लेकिन चार से कम जरूर रख पाएंगे।
7. फ्रेंचाइजियों का पर्स क्या होता है?
आईपीएल में हर सीजन में फ्रेंचाइजी के पास खिलाड़ियों को खरीदने के लिए एक
निश्चित सैलरी पर्स (बजट) होता है। आईपीएल 2022 के लिए फ्रेंचाइजियों का
सैलरी पर्स 90 करोड़ रुपये है।
8. बेस प्राइस कितनी होती है और कैसे तय की जाती है?
कैप्ड और अनकैप्ड खिलाड़ियों के लिए बेस प्राइस अलग-अलग होती है। अनकैप्ड
खिलाड़ी के लिए तीन बेस प्राइस हैं। वे अपना रजिस्ट्रेशन 20, 30 और 40
करोड़ की श्रेणी में कर सकते हैं। कैप्ड खिलाड़ियों के लिए पांच अलग-अलग
श्रेणियां बनी हुई हैं। वे अपना नाम 50 लाख, 70 लाख, एक करोड़, 1.5 करोड़
और दो करोड़ रुपये में रख सकते हैं। खिलाड़ी ही तय करते हैं कि उन्हें किस
श्रेणी में अपना नाम देना है।
9. राइट टू मैच कार्ड क्या होता है? क्या इस बार उसका इस्तेमाल हो सकता है?
फ्रेंचाइजियों को राइट टू मैच कार्ड (आरटीएम) मिलता है। वे इसके जरिए अपने
पुराने खिलाड़ियों को नीलामी के दौरान अपनी टीम में लाने में सफल होते हैं।
उन्हें उस खिलाड़ी के लिए लगी उच्चतम बोली के बराबर कीमत देनी होती है।
उदाहरण के लिए चेन्नई सुपरकिंग्स की टीम ने इस बार अंबाती रायुडू को रिटेन
नहीं किया है। अगर किसी दूसरी फ्रेंचाइजी ने नीलामी में उनके लिए बोली लगाई
तो चेन्नई रायुडू को लाने के लिए आरटीएम का इस्तेमाल कर सकती है। इसके लिए
उच्चतम बोली के बराबर कीमत देनी होगी। दुर्भाग्य से इस बार कोई भी टीमें
राइट टू मैच कार्ड (आरटीएम) का इस्तेमाल नहीं कर सकती है।
10. क्या नीलामी होने के बाद कोई खिलाड़ी दूसरी टीम में जा सकता है?
नहीं, नीलामी के बाद सीजन के सभी मैच होने तक एक खिलाड़ी दूसरी टीम में
नहीं जा सकता है। सीजन समाप्त होने के बाद अगले सीजन से ठीक पहले आईपीएल
फ्रेंचाइजियों को ट्रेड करने का अवसर देती है। इस दौरान वे दूसरी टीमों के
आपसी सहमति से खिलाड़ियों की ट्रेडिंग कर सकते हैं।
इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के 15वें सीजन से पहले खिलाड़ियों की
नीलामी 12 और 13 फरवरी को बेंगलुरु में होगी। नीलामी के शॉर्टलिस्ट हुए 600
खिलाड़ियों में से लीग के लिए अधिकतम 217 ही खरीदे जा सकेंगे।
फ्रेंचाइजियों ने 27 खिलाड़ियों को रिटेन किया है। इनमें आठ विदेशी और चार
अनकैप्ड भारतीय खिलाड़ी शामिल हैं। छह खिलाड़ी ड्राफ्ट के जरिए चुने गए
हैं। नीलामी के दौरान कई ऐसे नियम या शब्द इस्तेमाल में लाए जाते हैं जिसे
ज्यादातर लोग नहीं जानते हैं। हम आपको यहां आसान सवाल-जवाबों से नीलामी से
जुड़े छोटे-बड़े नियमों को समझा रहे हैं।
1. क्या है आईपीएल नीलामी की प्रक्रिया?
सबसे पहले खिलाड़ी नीलामी में शामिल होने के लिए रजिस्ट्रेशन कराते हैं। इस
बार 19 देशों के 1214 खिलाड़ियों ने नीलामी के लिए अपना नाम दिया गया था।
उनमें से फ्रेंचाइजियों ने 590 खिलाड़ियों को नीलामी के शॉर्टलिस्ट किया।
इसके बाद नीलामी से ठीक एक दिन पहले उनके अनुरोध पर अंडर-19 वर्ल्ड कप में
खेलने वाले नौ खिलाड़ियों के नाम जोड़े गए। इसके साथ ही मध्यप्रदेश के लिए
रणजी खेलने वाले मिहिर हिरवानी को भी मेगा ऑक्शन में शामिल किया गया है। इस
तरह 600 खिलाड़ियों की किस्मत दांव पर होगी। सबसे पहले 10 मार्की
खिलाड़ियों की बोली लगेगी। बल्लेबाजों, गेंदबाजों, विकेटकीपर, ऑलराउंडर्स
को अलग-अलग ग्रुप में रखा गया है। मार्की खिलाड़ियों के बाद बारी-बारी से
इनकी बोली लगेगी।
2. सोल्ड या अनसोल्ड खिलाड़ी कौन होते हैं?
नीलामीकर्ता खिलाड़ियों का नाम और उनका बेस प्राइस पुकारते हैं। इस पर
फ्रेंचाइजी अपना पैडल उठाकर बोली लगाती हैं। जिन खिलाड़ियों के लिए कम से
कम एक भी फ्रेंचाइजी ने पैडल उठाया होता है उन्हें ‘सोल्ड’ यानि बिका हुआ
माना जाता है। एक खिलाड़ी के एक से अधिक फ्रेंचाइजी बोली लगा सकती है।
जिसने सबसे अधिक रुपये की बोली लगाई होती है वह खिलाड़ी उस टीम का हो जाता
है। अगर किसी खिलाड़ी के लिए कोई फ्रेंचाइजी पैडल नहीं उठाती है तो
उन्होंने ‘अनसोल्ड’ यानि नहीं बिका हुआ माना जाता है।
3. क्या अनसोल्ड हुए खिलाड़ी बिक पाएंगे?
सबके मन में इस बात को लेकर एक धारणा रहती है कि अनसोल्ड रहने वाले खिलाड़ी
दोबारा नहीं बिक सकते हैं। यह गलत है। दिन की नीलामी जब समाप्त होने वाली
होती है तो ठीक पहले फ्रेंचाइजी अनसोल्ड रहने वाले कुछ खिलाड़ियों की सूची
नीलामीकर्ता को सौंपती है। उन खिलाड़ियों का नाम फिर से पुकारा जाता है।
टीमें अगर चाहे तो उन्हें खरीद सकती हैं।
4. कैप्ड और अनकैप्ड खिलाड़ी कौन होते हैं?
कैप्ड की श्रेणी में वे खिलाड़ी आते हैं जो अपने देश के लिए टेस्ट, वनडे या
टी-20 मैच खेल चुके होते हैं। वहीं, अपने देश के लिए एक भी अंतरराष्ट्रीय
मैच नहीं खेलने वाले खिलाड़ी को अनकैप्ड कहते हैं।
5. एक टीम में अधिकतम और न्यूनतम कितने खिलाड़ी हो सकते हैं?
एक टीम में अधिकतम 25 खिलाड़ी हो सकते हैं। जहां तक न्यूनतम खिलाड़ियों की बात है तो कम से कम 18 खिलाड़ी एक टीम में होने चाहिए।
6. एक टीम में कितने विदेशी खिलाड़ी होंगे?
एक फ्रेंचाइजी अपने दल में कुल 25 खिलाड़ियों में ज्यादा से ज्यादा आठ
विदेशियों को रख सकते हैं। प्लेइंग-11 में चार से ज्यादा विदेशी खिलाड़ी
शामिल नहीं हो सकते हैं। कई टीमें तीन विदेशियों के साथ मैच में उतर चुकी
हैं। इसका मतलब यह हुआ कि प्लेइंग-11 में चार से ज्यादा खिलाड़ी नहीं रख
सकते हैं लेकिन चार से कम जरूर रख पाएंगे।
7. फ्रेंचाइजियों का पर्स क्या होता है?
आईपीएल में हर सीजन में फ्रेंचाइजी के पास खिलाड़ियों को खरीदने के लिए एक
निश्चित सैलरी पर्स (बजट) होता है। आईपीएल 2022 के लिए फ्रेंचाइजियों का
सैलरी पर्स 90 करोड़ रुपये है।
8. बेस प्राइस कितनी होती है और कैसे तय की जाती है?
कैप्ड और अनकैप्ड खिलाड़ियों के लिए बेस प्राइस अलग-अलग होती है। अनकैप्ड
खिलाड़ी के लिए तीन बेस प्राइस हैं। वे अपना रजिस्ट्रेशन 20, 30 और 40
करोड़ की श्रेणी में कर सकते हैं। कैप्ड खिलाड़ियों के लिए पांच अलग-अलग
श्रेणियां बनी हुई हैं। वे अपना नाम 50 लाख, 70 लाख, एक करोड़, 1.5 करोड़
और दो करोड़ रुपये में रख सकते हैं। खिलाड़ी ही तय करते हैं कि उन्हें किस
श्रेणी में अपना नाम देना है।
9. राइट टू मैच कार्ड क्या होता है? क्या इस बार उसका इस्तेमाल हो सकता है?
फ्रेंचाइजियों को राइट टू मैच कार्ड (आरटीएम) मिलता है। वे इसके जरिए अपने
पुराने खिलाड़ियों को नीलामी के दौरान अपनी टीम में लाने में सफल होते हैं।
उन्हें उस खिलाड़ी के लिए लगी उच्चतम बोली के बराबर कीमत देनी होती है।
उदाहरण के लिए चेन्नई सुपरकिंग्स की टीम ने इस बार अंबाती रायुडू को रिटेन
नहीं किया है। अगर किसी दूसरी फ्रेंचाइजी ने नीलामी में उनके लिए बोली लगाई
तो चेन्नई रायुडू को लाने के लिए आरटीएम का इस्तेमाल कर सकती है। इसके लिए
उच्चतम बोली के बराबर कीमत देनी होगी। दुर्भाग्य से इस बार कोई भी टीमें
राइट टू मैच कार्ड (आरटीएम) का इस्तेमाल नहीं कर सकती है।
10. क्या नीलामी होने के बाद कोई खिलाड़ी दूसरी टीम में जा सकता है?
नहीं, नीलामी के बाद सीजन के सभी मैच होने तक एक खिलाड़ी दूसरी टीम में
नहीं जा सकता है। सीजन समाप्त होने के बाद अगले सीजन से ठीक पहले आईपीएल
फ्रेंचाइजियों को ट्रेड करने का अवसर देती है। इस दौरान वे दूसरी टीमों के
आपसी सहमति से खिलाड़ियों की ट्रेडिंग कर सकते हैं।



Journalist खबरीलाल














