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ब्रेस्ट कैंसर होने का सबसे बड़ा कारण क्या है और किन महिलाओं को होता है ज्यादा खतरा:

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स्तन की कोशिकाओं का असामान्य रूप से बढ़ना ही स्तन कैंसर (ब्रेस्ट
कैंसर) का कारण है। भारत में ब्रेस्ट कैंसर महिलाओं में पाया जाने वाला
सबसे आम कैंसर बन गया है और हर 28 महिलाओं में से 1 महिला में स्तन कैंसर
पाया जाता है। दुर्भाग्य से, भारत में स्तन कैंसर के ज्यादातर मामले विलंब
से सामने आते हैं। ब्रेस्ट कैंसर की पहचान में देरी होने से इलाज हो पाने
की संभावना घट जाती है और ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित हर 2 में से 1 महिला
इलाज के पहले पांच सालों में ही मौत का शिकार हो जाती है। 

ब्रेस्ट कैंसर होने का सबसे बड़ा कारण 

इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि भारत में महिलाएं नियमित तौर से जांच नहीं
कराती हैं और इसके लक्षण तभी दिखना शुरू होते हैं, जब बीमारी काफी फैल चुकी
होती है। मरीज बीमारी फैलने के बाद ही डॉक्टर से परामर्श लेने आते हैं।

सबसे पहले क्या करें

महिलाएं 40 साल की उम्र से ही नियमित स्क्रीनिंग मैमोग्राम शुरू कर दें और
हर 1 से 2 साल में कम से कम एक स्क्रीनिंग जरूर  कराएं। जिन लोगों के
परिवार में स्तन कैंसर का इतिहास रहा है, उन्हें ऑन्कोलॉजिस्ट से मिलकर एक
व्यक्तिगत स्क्रीनिंग प्रोग्राम तैयार करवा लेना चाहिए। स्क्रीनिंग के तहत,
स्वपरीक्षण भी बहुत जरूरी है। इस जांच में सामान्य लक्षणों, जैसे स्तन में
गांठ (जिसमें दर्द नहीं होता), निप्पल से खून या तरल का निकलना, निप्पल का
अंदर की ओर दब जाना, स्तन की स्किन पर गड्ढे स्तन पर घाव या खरोंच, जो
सामान्य इलाज के बाद भी ठीक न हो, ऐसी स्थितियों पर विशेष ध्यान दिया जाना
चाहिए। यदि इनमें से कोई भी लक्षण नजर आए, तो डॉक्टर से परामर्श लें।


किन महिलाओं को होता है ज्यादा खतरा 

जो महिलाएं अनहेल्दी लाइफस्टाइल जैसे, शराब और तम्बाकू का ज्यादा सेवन करती
हैं या शारीरिक गतिविधि कम या बिल्कुन नहीं करती हैं, उनमें ब्रेस्ट कैंसर
का खतरा ज्यादा रहता है। वहीं, जिनके परिवार में स्तन कैंसर का इतिहास रहा
है, उन्हें भी ब्रेस्ट कैंसर का खतरा ज्यादा होता है। 


40 साल में ही बढ़ रहे हैं ब्रेस्ट कैंसर के मामले 

भारत में पश्चिमी देशों के मुकाबले ब्रेस्ट कैंसर तेजी से फैल रहा है। भारत
में यह चालीस से पचास साल की उम्र में ज्यादा आम है. भारतीय महिलाओं में
पश्चिमी देशों की तुलना में 40 साल की उम्र के अंदर ही कैंसर के मामले
ज्यादा हैं। यह युवा महिलाओं में ज्यादा तेजी से फैल रहा है इसका कारण यह
है कि उन्हें स्क्रीनिंग का परामर्श नहीं दिया जाता, जिसके कारण इसकी पहचान
करने में देरी हो जाती है। स्तन कैंसर की जाँच भारत में नियमित तौर से
नहीं होती है, जिसके अनेक कारण हैं। स्क्रीनिंग क्यों कराई जाए और कैंसर की
समय पर पहचान करने में स्क्रीनिंग से क्या मदद मिलती है, इस बारे में
जागरुकता की कमी है। वहीं, स्क्रीनिंग कराए जाने के प्रति महिलाओं में
संकोच भी होता है। ऐसे में इसकी रोकथाम के उपायों, समय-समय पर जांच कराते
रहने और अवेयरनेस से ही ब्रेस्ट कैंसर को फैलने से रोका जा सकता है।




स्तन की कोशिकाओं का असामान्य रूप से बढ़ना ही स्तन कैंसर (ब्रेस्ट
कैंसर) का कारण है। भारत में ब्रेस्ट कैंसर महिलाओं में पाया जाने वाला
सबसे आम कैंसर बन गया है और हर 28 महिलाओं में से 1 महिला में स्तन कैंसर
पाया जाता है। दुर्भाग्य से, भारत में स्तन कैंसर के ज्यादातर मामले विलंब
से सामने आते हैं। ब्रेस्ट कैंसर की पहचान में देरी होने से इलाज हो पाने
की संभावना घट जाती है और ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित हर 2 में से 1 महिला
इलाज के पहले पांच सालों में ही मौत का शिकार हो जाती है। 

ब्रेस्ट कैंसर होने का सबसे बड़ा कारण 

इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि भारत में महिलाएं नियमित तौर से जांच नहीं
कराती हैं और इसके लक्षण तभी दिखना शुरू होते हैं, जब बीमारी काफी फैल चुकी
होती है। मरीज बीमारी फैलने के बाद ही डॉक्टर से परामर्श लेने आते हैं।

सबसे पहले क्या करें

महिलाएं 40 साल की उम्र से ही नियमित स्क्रीनिंग मैमोग्राम शुरू कर दें और
हर 1 से 2 साल में कम से कम एक स्क्रीनिंग जरूर  कराएं। जिन लोगों के
परिवार में स्तन कैंसर का इतिहास रहा है, उन्हें ऑन्कोलॉजिस्ट से मिलकर एक
व्यक्तिगत स्क्रीनिंग प्रोग्राम तैयार करवा लेना चाहिए। स्क्रीनिंग के तहत,
स्वपरीक्षण भी बहुत जरूरी है। इस जांच में सामान्य लक्षणों, जैसे स्तन में
गांठ (जिसमें दर्द नहीं होता), निप्पल से खून या तरल का निकलना, निप्पल का
अंदर की ओर दब जाना, स्तन की स्किन पर गड्ढे स्तन पर घाव या खरोंच, जो
सामान्य इलाज के बाद भी ठीक न हो, ऐसी स्थितियों पर विशेष ध्यान दिया जाना
चाहिए। यदि इनमें से कोई भी लक्षण नजर आए, तो डॉक्टर से परामर्श लें।


किन महिलाओं को होता है ज्यादा खतरा 

जो महिलाएं अनहेल्दी लाइफस्टाइल जैसे, शराब और तम्बाकू का ज्यादा सेवन करती
हैं या शारीरिक गतिविधि कम या बिल्कुन नहीं करती हैं, उनमें ब्रेस्ट कैंसर
का खतरा ज्यादा रहता है। वहीं, जिनके परिवार में स्तन कैंसर का इतिहास रहा
है, उन्हें भी ब्रेस्ट कैंसर का खतरा ज्यादा होता है। 


40 साल में ही बढ़ रहे हैं ब्रेस्ट कैंसर के मामले 

भारत में पश्चिमी देशों के मुकाबले ब्रेस्ट कैंसर तेजी से फैल रहा है। भारत
में यह चालीस से पचास साल की उम्र में ज्यादा आम है. भारतीय महिलाओं में
पश्चिमी देशों की तुलना में 40 साल की उम्र के अंदर ही कैंसर के मामले
ज्यादा हैं। यह युवा महिलाओं में ज्यादा तेजी से फैल रहा है इसका कारण यह
है कि उन्हें स्क्रीनिंग का परामर्श नहीं दिया जाता, जिसके कारण इसकी पहचान
करने में देरी हो जाती है। स्तन कैंसर की जाँच भारत में नियमित तौर से
नहीं होती है, जिसके अनेक कारण हैं। स्क्रीनिंग क्यों कराई जाए और कैंसर की
समय पर पहचान करने में स्क्रीनिंग से क्या मदद मिलती है, इस बारे में
जागरुकता की कमी है। वहीं, स्क्रीनिंग कराए जाने के प्रति महिलाओं में
संकोच भी होता है। ऐसे में इसकी रोकथाम के उपायों, समय-समय पर जांच कराते
रहने और अवेयरनेस से ही ब्रेस्ट कैंसर को फैलने से रोका जा सकता है।



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