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news bilaspur:: बिलासपुर के मोपका में शिविर, विद्युत वितरण कंपनी ने वसूले 2.08 लाख रुपये:

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बिलासपुर। बिजली वितरण कंपनी द्वारा बकाया वसूली के
लिए शिविर लगाया गया है। इसके दूसरे दिन 48 उपभोक्ताओं से 2.08 लाख रुपये
वसूल किए गए। वहीं बकाया जमा नहीं करने वाले 14 उपभोक्ताओं के घरों की लाइन
काट दी गई। हालांकि यह शिविर दो दिन का था। आगे भी इसी तरह वसूली के लिए
शिविर लगाने का निर्णय लिया गया है।


मोपका स्थिति आंबेडकर भवन में
तोरवा मंडल द्वारा शिविर लगाया गया। बिल सुधार व बकाया वसूली के लिए लगाए
गए इस शिविर के पहले दिन तो कोई नहीं पहुंचा। पर दूसरे दिन बकाया जमा करने
के लिए उपभोक्ताओं रूचि दिखाई। सुबह से लेकर शाम तक 46 उपभोक्ता पहुंचे और
2.08 लाख रुपये जमा किए। वहीं 14 लोगों के घरों का कनेक्शन काट दिया। इनसे
कंपनी को 2.6 लाख रुपये वसूल करना है।


इन उपभोक्ताओं को हिदायत भी दी
गई है कि जल्द भुगतान कर दें। बिना भुगतान यदि अवैध ढंग से कनेक्शन जोड़कर
बिजली लेते पकड़ में आते हैं तो उनके खिलाफ बिजली अधिनियम के तहत कार्रवाई
की जाएगी। इस शिविर में करीब 68 उपभोक्ता पहुंचे। कंपनी के लिए बकायादार
बड़ी मुसीबत बने हुए हैं। कोरोना संक्रमण के दौरान वसूली बिल्कुल भी शून्य
थी। इसके चलते कंपनी का राजस्व घट गया था।



बिलासपुर। बिजली वितरण कंपनी द्वारा बकाया वसूली के
लिए शिविर लगाया गया है। इसके दूसरे दिन 48 उपभोक्ताओं से 2.08 लाख रुपये
वसूल किए गए। वहीं बकाया जमा नहीं करने वाले 14 उपभोक्ताओं के घरों की लाइन
काट दी गई। हालांकि यह शिविर दो दिन का था। आगे भी इसी तरह वसूली के लिए
शिविर लगाने का निर्णय लिया गया है।


मोपका स्थिति आंबेडकर भवन में
तोरवा मंडल द्वारा शिविर लगाया गया। बिल सुधार व बकाया वसूली के लिए लगाए
गए इस शिविर के पहले दिन तो कोई नहीं पहुंचा। पर दूसरे दिन बकाया जमा करने
के लिए उपभोक्ताओं रूचि दिखाई। सुबह से लेकर शाम तक 46 उपभोक्ता पहुंचे और
2.08 लाख रुपये जमा किए। वहीं 14 लोगों के घरों का कनेक्शन काट दिया। इनसे
कंपनी को 2.6 लाख रुपये वसूल करना है।


इन उपभोक्ताओं को हिदायत भी दी
गई है कि जल्द भुगतान कर दें। बिना भुगतान यदि अवैध ढंग से कनेक्शन जोड़कर
बिजली लेते पकड़ में आते हैं तो उनके खिलाफ बिजली अधिनियम के तहत कार्रवाई
की जाएगी। इस शिविर में करीब 68 उपभोक्ता पहुंचे। कंपनी के लिए बकायादार
बड़ी मुसीबत बने हुए हैं। कोरोना संक्रमण के दौरान वसूली बिल्कुल भी शून्य
थी। इसके चलते कंपनी का राजस्व घट गया था।



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