छुट्टियों में हर किसी की ख्वाहिश रहती है कि कहीं दूर जाकर सैर सपाटा किया जाए. ज्यादातर लोग गोवा, शिमला, मनाली या समुद्र किनारे जाना पसंद करते हैं. चूंकि इन दिनों सर्दियों का मौसम शुरू हो गया है और स्कूल कॉलेज इसमें छुट्टियां हो चुकी है. इसके साथ ही क्रिसमस और नए साल के जश्न का माहौल बना हुआ है.
ऐसे में हर कोई अपने परिवार और दोस्तों संग एक अच्छा समय व्यतीत करने के लिए पिकनिक स्पॉट और पर्यटन स्थलों में घूमने फिरने के लिए पहुंचते हैं. लेकिन इससे पहले वे समझ नहीं पाते हैं कि जाएं तो जाएं कहां? इंटरनेट पर किसी अच्छी जगह को सर्च करने लग जाते हैं. ऐसे में हम आपको एक ऐसी जगह के बारे में बताएंगे जहां कभी कोयले की भरमार रहती थी. जहां कोई कभी जाना ही नहीं चाहता था, लेकिन वर्तमान में उस जगह पर हर दिन हजारों लोग घूमने के लिए पहुंच रहे हैं. जहां कभी एक कोयले की खदान हुआ करती थी उस जगह को प्रशासन ने कायाकल्प कर एक मिनी गोवा के रूप में विकसित कर दिया है. जहां अब साल भर लोगों का सैर सपाटा लगा रहता है और इस ठंड के मौसम में इस जगह को खूब पसंद किया जा रहा है.
दरअसल, छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में कोयला निकालने के बाद खुला छोड़ दिए गए जगह को जिला प्रशासन ने कायाकल्प कर पर्यटन स्थल बना दिया है. इस पर्यटन स्थल की चर्चा अब राज्यस्तर पर होती है. बता दें कि, जिले के बिश्रामपुर एसईसीएल इलाके में केनापारा नाम का एक गांव है. जहां आज से लगभग 10 साल पहले कोयले की खदान हुआ करती थी, लेकिन कोयला निकालने के बाद एसईसीएल प्रबंधन ने उस जगह को खुला छोड़ दिया था. जिसके गड्ढों में पानी भरा रहता था.
इसके बाद इस जगह पर जिला प्रशासन की नजर पड़ी और जिला प्रशासन ने बंद खदान की पोखरी को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किए जाने के लिए रोड मैप तैयार किया और एसईसीएल बिश्रामपुर से सहयोग मांगा. तब एसईसीएल ने सीएसआर मद से 2 करोड़ 85 लाख रुपए का सहयोग जिला प्रशासन को दिया।
जिसके बाद तत्कालीन सूरजपुर कलेक्टर केसी देवसेनापति ने खदान की गहरी खाई को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने का प्लान बनाया और 2017 में इसकी नींव रखी गई. इसके बाद पर्यटन केंद्र के कार्य में तेजी आई और सालभर में पर्यटन केंद्र को विकसित कर 2018 में इसका शुभारंभ किया गया.
इस जगह को केनापारा पर्यटन केंद्र का नाम दिया गया है. वर्तमान में इस जगह की पहचान मिनी गोवा के रूप में होने लगी है. पर्यटन स्थल पर ऐसी ऐसी सुविधाएं विकसित कर दी गई है कि वहां घूमने पर गोवा की तरह ही एहसास होता है. जिसका लुफ्त उठाने हर दिन सैकड़ों लोग परिवार, दोस्तों संग समय बिताने पहुंचते हैं. पर्यटन केंद्र केनापारा के पोखरी में साल भर हजारों फिट पानी भरा रहता है. जिसमें सैर करने के लिए वोटिंग की सुविधा है, यहां एक फ्लोटिंग रेस्टोरेंट है जो पानी के ऊपर और बिल्कुल बीचो-बीच स्थित है और तैरता हुआ है.
छुट्टियों में हर किसी की ख्वाहिश रहती है कि कहीं दूर जाकर सैर सपाटा किया जाए. ज्यादातर लोग गोवा, शिमला, मनाली या समुद्र किनारे जाना पसंद करते हैं. चूंकि इन दिनों सर्दियों का मौसम शुरू हो गया है और स्कूल कॉलेज इसमें छुट्टियां हो चुकी है. इसके साथ ही क्रिसमस और नए साल के जश्न का माहौल बना हुआ है.
ऐसे में हर कोई अपने परिवार और दोस्तों संग एक अच्छा समय व्यतीत करने के लिए पिकनिक स्पॉट और पर्यटन स्थलों में घूमने फिरने के लिए पहुंचते हैं. लेकिन इससे पहले वे समझ नहीं पाते हैं कि जाएं तो जाएं कहां? इंटरनेट पर किसी अच्छी जगह को सर्च करने लग जाते हैं. ऐसे में हम आपको एक ऐसी जगह के बारे में बताएंगे जहां कभी कोयले की भरमार रहती थी. जहां कोई कभी जाना ही नहीं चाहता था, लेकिन वर्तमान में उस जगह पर हर दिन हजारों लोग घूमने के लिए पहुंच रहे हैं. जहां कभी एक कोयले की खदान हुआ करती थी उस जगह को प्रशासन ने कायाकल्प कर एक मिनी गोवा के रूप में विकसित कर दिया है. जहां अब साल भर लोगों का सैर सपाटा लगा रहता है और इस ठंड के मौसम में इस जगह को खूब पसंद किया जा रहा है.
दरअसल, छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में कोयला निकालने के बाद खुला छोड़ दिए गए जगह को जिला प्रशासन ने कायाकल्प कर पर्यटन स्थल बना दिया है. इस पर्यटन स्थल की चर्चा अब राज्यस्तर पर होती है. बता दें कि, जिले के बिश्रामपुर एसईसीएल इलाके में केनापारा नाम का एक गांव है. जहां आज से लगभग 10 साल पहले कोयले की खदान हुआ करती थी, लेकिन कोयला निकालने के बाद एसईसीएल प्रबंधन ने उस जगह को खुला छोड़ दिया था. जिसके गड्ढों में पानी भरा रहता था.
इसके बाद इस जगह पर जिला प्रशासन की नजर पड़ी और जिला प्रशासन ने बंद खदान की पोखरी को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किए जाने के लिए रोड मैप तैयार किया और एसईसीएल बिश्रामपुर से सहयोग मांगा. तब एसईसीएल ने सीएसआर मद से 2 करोड़ 85 लाख रुपए का सहयोग जिला प्रशासन को दिया।
जिसके बाद तत्कालीन सूरजपुर कलेक्टर केसी देवसेनापति ने खदान की गहरी खाई को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने का प्लान बनाया और 2017 में इसकी नींव रखी गई. इसके बाद पर्यटन केंद्र के कार्य में तेजी आई और सालभर में पर्यटन केंद्र को विकसित कर 2018 में इसका शुभारंभ किया गया.
इस जगह को केनापारा पर्यटन केंद्र का नाम दिया गया है. वर्तमान में इस जगह की पहचान मिनी गोवा के रूप में होने लगी है. पर्यटन स्थल पर ऐसी ऐसी सुविधाएं विकसित कर दी गई है कि वहां घूमने पर गोवा की तरह ही एहसास होता है. जिसका लुफ्त उठाने हर दिन सैकड़ों लोग परिवार, दोस्तों संग समय बिताने पहुंचते हैं. पर्यटन केंद्र केनापारा के पोखरी में साल भर हजारों फिट पानी भरा रहता है. जिसमें सैर करने के लिए वोटिंग की सुविधा है, यहां एक फ्लोटिंग रेस्टोरेंट है जो पानी के ऊपर और बिल्कुल बीचो-बीच स्थित है और तैरता हुआ है.



Journalist खबरीलाल














