नए साल की देर रात जब पूरा देश जश्न में डूबा हुआ था तब दिल्ली के कंझावला
इलाके में कार सवार पांच दरिंदे एक 20 वर्षीय युवती को टक्कर मारने के बाद
उसकी लाश को सड़कों पर बेखौफ होकर घसीट रहे थे। इस घटना के बाद दिल्ली
पुलिस के सुरक्षा इंतजामों के दावों पर भी सवाल उठ रहे हैं। कंझावला हादसे
को लेकर उठ रहे सवालों के बीच सोमवार को ‘हिन्दुस्तान’ ने 12 किलोमीटर लंबे
हादसे वाले मार्ग पर सुरक्षा इंतजाम का हाल देखा। इन रास्तों पर न कोई
बैरिकेडिंग मिला और पुलिस बूथ पर भी ताला लटका था। उधर, इस सड़क पर 180 से
ज्यादा छोटे-बड़े गड्ढे रफ्तार कम करने को बहुत थे। ऐसे में अगर पुलिस
सक्रिय होती तो अपराधी पहले ही दबोचे जा सकते थे। पेश है रिपोर्ट...
पी वन ब्लॉक से जब कंझावला के लिए आरोपियों की बलेनो कार मुड़ी तो सड़क ठीक
होने के कारण रफ्तार अच्छी थी। यह इलाका घनी आबादी और व्यवसायिक क्षेत्र
है, जहां सीसीटीवी कैमरे मौजूद थे। यहां से कार जौंती गांव की तरफ मुड़ गई।
करीब पांच सौ मीटर की दूरी पर बाहरी जिले की सीमा समाप्त होती है और
रोहिणी जिले के अमन विहार थाने की सीमा शुरू होती है। इस पूरे मार्ग पर
दाईं तरफ दहिया बादशाह मार्ग अमन विहार थाने का का पुलिस बूथ था, जिस पर
ताला लटका हुआ था। घटना के बाद भी बूथ बंद मिला। स्थानीय लोगों का कहना है
कि यह बूथ लंबे समय से बंद है।
सड़क टूटी हुईं : पूरे मार्ग पर मजरी, शिव विहार, कराला, राजीव
नगर एक्सटेंशन और बेगमपुर और लाडपुर गांव बसे हैं। इनसे सटे और इसके आसपास
छोटे-बड़े बाजार भी हैं। इस पूरे मार्ग पर अलग अलग बाजारों में 210
सीसीटीवी कैमरे लगे थे। वहीं सड़क की हालत कहीं-कहीं बदतर दिखी। बेगमपुर,
राजीव नगर एक्सटेंशन, मजरी और कराला के पास सड़क की हालत बेहद खराब थी। ऐसे
गड्ढे में कार के अंदरूनी हिस्से में मानव शरीर को फंसा कर ले जाने की बात
असंभव सी प्रतीत हो रही है। इसे लेकर ही सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इतनी
टूटी सड़क पर करीब 12 किलोमीटर तक युवती को कैसे घसीटा गया। हालांकि, कराला
से जौंती गांव के बीच में सड़क की हालत ठीक है।
रास्ते पर कोई पुलिस बैरिकेडिंग नहीं : पूरे
मार्ग पर 15 रेड लाइट हैं, लेकिन कहीं भी पुलिस बैरिकेड नहीं है। रात के
समय इलाका सुनसान हो जाता है। सोमवार को मजरी के पास ट्रैफिक पुलिस वाहनों
की जांच करते दिखी, लेकिन पीसीआर की गाड़ी कहीं भी गश्त करती नहीं दिखी।
पूरे रास्ते पर हिन्दुस्तान टीम को कहीं भी पीसीआर नहीं मिली।
रात में सन्नाटा : लोगों का कहना है कि दिन ढलते ही
सन्नाटा पसर जाता है। कंझावला निवासी प्रदीप ने बताया कि पुलिस बूथ नहीं
होने से अपराधियों के हौंसले बुलंद हो जाते हैं।
हादसे से उठते सवाल
● रास्ते में क्या कोई जांच चौकी और पीसीआर वैन नहीं थी?
● उन विशेष सुरक्षा इंतजामों का क्या हुआ, जो नव वर्ष के अवसर पर राष्ट्रीय राजधानी में किए गए थे?
● पहले हल्की धाराओं में मामला क्यों दर्ज किया गया, बाद में धाराएं बदली गईं?
● क्या जानबूझकर युवती को कार से घसीटा गया। क्या यौन उत्पीड़न की भी आशंका है?
● क्या आरोपियों के खिलाफ पहले भी आपराधिक मामले दर्ज हुए हैं?
नए साल की देर रात जब पूरा देश जश्न में डूबा हुआ था तब दिल्ली के कंझावला
इलाके में कार सवार पांच दरिंदे एक 20 वर्षीय युवती को टक्कर मारने के बाद
उसकी लाश को सड़कों पर बेखौफ होकर घसीट रहे थे। इस घटना के बाद दिल्ली
पुलिस के सुरक्षा इंतजामों के दावों पर भी सवाल उठ रहे हैं। कंझावला हादसे
को लेकर उठ रहे सवालों के बीच सोमवार को ‘हिन्दुस्तान’ ने 12 किलोमीटर लंबे
हादसे वाले मार्ग पर सुरक्षा इंतजाम का हाल देखा। इन रास्तों पर न कोई
बैरिकेडिंग मिला और पुलिस बूथ पर भी ताला लटका था। उधर, इस सड़क पर 180 से
ज्यादा छोटे-बड़े गड्ढे रफ्तार कम करने को बहुत थे। ऐसे में अगर पुलिस
सक्रिय होती तो अपराधी पहले ही दबोचे जा सकते थे। पेश है रिपोर्ट...
पी वन ब्लॉक से जब कंझावला के लिए आरोपियों की बलेनो कार मुड़ी तो सड़क ठीक
होने के कारण रफ्तार अच्छी थी। यह इलाका घनी आबादी और व्यवसायिक क्षेत्र
है, जहां सीसीटीवी कैमरे मौजूद थे। यहां से कार जौंती गांव की तरफ मुड़ गई।
करीब पांच सौ मीटर की दूरी पर बाहरी जिले की सीमा समाप्त होती है और
रोहिणी जिले के अमन विहार थाने की सीमा शुरू होती है। इस पूरे मार्ग पर
दाईं तरफ दहिया बादशाह मार्ग अमन विहार थाने का का पुलिस बूथ था, जिस पर
ताला लटका हुआ था। घटना के बाद भी बूथ बंद मिला। स्थानीय लोगों का कहना है
कि यह बूथ लंबे समय से बंद है।
सड़क टूटी हुईं : पूरे मार्ग पर मजरी, शिव विहार, कराला, राजीव
नगर एक्सटेंशन और बेगमपुर और लाडपुर गांव बसे हैं। इनसे सटे और इसके आसपास
छोटे-बड़े बाजार भी हैं। इस पूरे मार्ग पर अलग अलग बाजारों में 210
सीसीटीवी कैमरे लगे थे। वहीं सड़क की हालत कहीं-कहीं बदतर दिखी। बेगमपुर,
राजीव नगर एक्सटेंशन, मजरी और कराला के पास सड़क की हालत बेहद खराब थी। ऐसे
गड्ढे में कार के अंदरूनी हिस्से में मानव शरीर को फंसा कर ले जाने की बात
असंभव सी प्रतीत हो रही है। इसे लेकर ही सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इतनी
टूटी सड़क पर करीब 12 किलोमीटर तक युवती को कैसे घसीटा गया। हालांकि, कराला
से जौंती गांव के बीच में सड़क की हालत ठीक है।
रास्ते पर कोई पुलिस बैरिकेडिंग नहीं : पूरे
मार्ग पर 15 रेड लाइट हैं, लेकिन कहीं भी पुलिस बैरिकेड नहीं है। रात के
समय इलाका सुनसान हो जाता है। सोमवार को मजरी के पास ट्रैफिक पुलिस वाहनों
की जांच करते दिखी, लेकिन पीसीआर की गाड़ी कहीं भी गश्त करती नहीं दिखी।
पूरे रास्ते पर हिन्दुस्तान टीम को कहीं भी पीसीआर नहीं मिली।
रात में सन्नाटा : लोगों का कहना है कि दिन ढलते ही
सन्नाटा पसर जाता है। कंझावला निवासी प्रदीप ने बताया कि पुलिस बूथ नहीं
होने से अपराधियों के हौंसले बुलंद हो जाते हैं।
हादसे से उठते सवाल
● रास्ते में क्या कोई जांच चौकी और पीसीआर वैन नहीं थी?
● उन विशेष सुरक्षा इंतजामों का क्या हुआ, जो नव वर्ष के अवसर पर राष्ट्रीय राजधानी में किए गए थे?
● पहले हल्की धाराओं में मामला क्यों दर्ज किया गया, बाद में धाराएं बदली गईं?
● क्या जानबूझकर युवती को कार से घसीटा गया। क्या यौन उत्पीड़न की भी आशंका है?
● क्या आरोपियों के खिलाफ पहले भी आपराधिक मामले दर्ज हुए हैं?



Journalist खबरीलाल














