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महाशिवरात्रि व्रत में ज्योतिषाचार्य से जानें क्या खाना चाहिए?:

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फाल्गुन मास की चतुर्दशी तिथि पर मनाया जाने वाला महाशिवरात्रि
पर्व इस वर्ष शनिवार को पड़ने से इसका महत्व अधिक हो गया है। महाशिवरात्रि
पर बन रहा शिवयोग इसे और विशेष बना रहा है। महाशिवरात्रि में जागरण करना
शास्त्रत्तें में अनिवार्य बताया गया है। ज्योतिषाचार्य पं. रामकृष्ण पाठक
के अनुसार काशी से ही प्रकाशित कुछ अन्य पंचांगों में महानिशिथ काल की गणना
में दो से तीन मिनट का अंतर है। उन्होंने बताया कि महाशिवरात्रि पर उपवास
रखने और पूजन करने वाले को सूर्यास्त से पूर्व सिर्फ एक बार सात्विक आहार
लेना चाहिए। महादेव का दूध और जल से अभिषेक कर यज्ञोपवीत, वस्त्रत्त्,
चंदन, आभूषण, सुगंधि, बेलपत्र, कनेर, धतूरा, मदार के अतिरिक्त ऋतुपुष्प और
नैवेद्य अर्पित करना चाहिए।

फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी तिथि 17 फरवरी को रात 1137 बजे से 18
फरवरी, शनिवार की रात 8 03 बजे तक रहेगी। प्रदोष बेला में त्रयोदशी तिथि का
मान 18 फरवरी, शनिवार को होने से प्रदोष व्रत किया जाएगा। चतुर्दशी तिथि
18 फरवरी की रात 8 03 बजे से 19 फरवरी, रविवार की शाम 419 बजे तक रहेगी।
शिवयोग का आरंभ 18 की शाम 732 बजे से 19 फरवरी को दिन में 231 बजे तक
रहेगा। महाशिवरात्रि पर चंद्रोदय व्यापिनी चतुर्दशी की मध्यरात्रि में शिव
पूजन का विशेष महत्व है। इस काल को शास्त्रत्तें में महानिशीथ काल (रात 11
43 बजे से 12 33 बजे तक) की संज्ञा दी गई है।


फाल्गुन मास की चतुर्दशी तिथि पर मनाया जाने वाला महाशिवरात्रि
पर्व इस वर्ष शनिवार को पड़ने से इसका महत्व अधिक हो गया है। महाशिवरात्रि
पर बन रहा शिवयोग इसे और विशेष बना रहा है। महाशिवरात्रि में जागरण करना
शास्त्रत्तें में अनिवार्य बताया गया है। ज्योतिषाचार्य पं. रामकृष्ण पाठक
के अनुसार काशी से ही प्रकाशित कुछ अन्य पंचांगों में महानिशिथ काल की गणना
में दो से तीन मिनट का अंतर है। उन्होंने बताया कि महाशिवरात्रि पर उपवास
रखने और पूजन करने वाले को सूर्यास्त से पूर्व सिर्फ एक बार सात्विक आहार
लेना चाहिए। महादेव का दूध और जल से अभिषेक कर यज्ञोपवीत, वस्त्रत्त्,
चंदन, आभूषण, सुगंधि, बेलपत्र, कनेर, धतूरा, मदार के अतिरिक्त ऋतुपुष्प और
नैवेद्य अर्पित करना चाहिए।

फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी तिथि 17 फरवरी को रात 1137 बजे से 18
फरवरी, शनिवार की रात 8 03 बजे तक रहेगी। प्रदोष बेला में त्रयोदशी तिथि का
मान 18 फरवरी, शनिवार को होने से प्रदोष व्रत किया जाएगा। चतुर्दशी तिथि
18 फरवरी की रात 8 03 बजे से 19 फरवरी, रविवार की शाम 419 बजे तक रहेगी।
शिवयोग का आरंभ 18 की शाम 732 बजे से 19 फरवरी को दिन में 231 बजे तक
रहेगा। महाशिवरात्रि पर चंद्रोदय व्यापिनी चतुर्दशी की मध्यरात्रि में शिव
पूजन का विशेष महत्व है। इस काल को शास्त्रत्तें में महानिशीथ काल (रात 11
43 बजे से 12 33 बजे तक) की संज्ञा दी गई है।


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