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गणतंत्र दिवस से पहले पाक ने रची खौफनाक साजिश, इस्लामिक स्टेट के नाम पर कश्मीर में हमले का प्लान:

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नई दिल्ली। पाकिस्तान
की खुफिया एजेंसी ISI ने जम्मू-कश्मीर में अशांति फैलाने के लिए एक नई और
खतरनाक साजिश रची है। खुफिया एजेंसियों ने गणतंत्र दिवस से पहले एक रिपोर्ट
के जरिए इसकी बात कही है। ISI ने आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) को
निर्देश दिया है कि वह अपने फिदायीन दस्ते को इस्लामिक स्टेट खुरासान
प्रॉविंस (ISKP) के नाम के साथ जोड़कर घाटी में हमले करे। इस हाइब्रिड
मॉड्यूल का मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खुद को बेकसूर साबित करना
और भारत के खिलाफ 'प्लॉसिबल डिनाइबिलिटी' बनाए रखना है।

रिपोर्ट
के अनुसार, इस पूरे ऑपरेशन की निगरानी पाकिस्तान के शीर्ष सैन्य और खुफिया
अधिकारी कर रहे हैं। लेफ्टिनेंट जनरल अहमद अहसान नवाज भी इसमें शामिल हैं
जो पाकिस्तान सेना के एक्स कोर के प्रमुख हैं। ब्रिगेडियर फाईक अयूब ISI का
पाक अधिकृत कश्मीर सेक्टर कमांडर है।

द ट्रिब्यून की एक रिपोर्ट के
मुताबिक, इन अधिकारियों ने लश्कर और जैश-ए-मोहम्मद को अपनी रणनीति बदलने और
यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि किसी भी हमले में पाकिस्तान की
सीधी भागीदारी के सबूत न मिलें।

खुफिया सूत्रों के अनुसार, 12
सदस्यीय यह फिदायीन दस्ता कश्मीर के तीन प्रमुख जिलों में सक्रिय हो चुका
है। उनमें बडगाम, किश्तवाड़ और श्रीनगर शामिल है, जो कि भौगोलिक और रणनीति
रूप से अहम हैं।

लश्कर का वरिष्ठ कमांडर अबू हुरैरा फिदायीन दस्ते का
नेतृत्व कर रहा है। यह 2021 से सक्रिय है। मोहम्मद उमर 'खरगोश' डिप्टी
कमांडर है और हुरैरा का मुख्य सहयोगी भी है, जो कि 2022 से सक्रिय है। अबू
दुजाना का भी इसमें नाम है, जिसने हाल ही में घुसपैठ की है। वह आत्मघाती
हमलों के लिए प्रशिक्षित है।

सुरक्षा
एजेंसियों का मानना है कि पाकिस्तान जानबूझकर अपने समर्थित आतंकवाद को
'इस्लामिक स्टेट' (ISKP) के नाम से प्रमोट कर रहा है। इसके पीछे दो मुख्य
कारण हैं। पहल है पहचान छुपाना। यदि हमला ISKP के नाम पर होता है, तो
वैश्विक समुदाय को यह लगेगा कि यह एक अंतरराष्ट्रीय जिहादी नेटवर्क का काम
है न कि पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद का। पाकिस्तान की मंशा जांच को उलझाने
की रही है। हाइब्रिड मॉड्यूल के कारण जांच एजेंसियों के लिए मुख्य
साजिशकर्ताओं तक पहुंचना कठिन हो जाता है।

इस
इनपुट के बाद मध्य और दक्षिण कश्मीर में निगरानी बढ़ा दी गई है। सुरक्षा बल
अब छोटे-छोटे सेल्स में बंटे इन आतंकियों को ट्रैक करने के लिए बड़े
पैमाने पर तलाशी अभियान चला रहे हैं।


नई दिल्ली। पाकिस्तान
की खुफिया एजेंसी ISI ने जम्मू-कश्मीर में अशांति फैलाने के लिए एक नई और
खतरनाक साजिश रची है। खुफिया एजेंसियों ने गणतंत्र दिवस से पहले एक रिपोर्ट
के जरिए इसकी बात कही है। ISI ने आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) को
निर्देश दिया है कि वह अपने फिदायीन दस्ते को इस्लामिक स्टेट खुरासान
प्रॉविंस (ISKP) के नाम के साथ जोड़कर घाटी में हमले करे। इस हाइब्रिड
मॉड्यूल का मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खुद को बेकसूर साबित करना
और भारत के खिलाफ 'प्लॉसिबल डिनाइबिलिटी' बनाए रखना है।

रिपोर्ट
के अनुसार, इस पूरे ऑपरेशन की निगरानी पाकिस्तान के शीर्ष सैन्य और खुफिया
अधिकारी कर रहे हैं। लेफ्टिनेंट जनरल अहमद अहसान नवाज भी इसमें शामिल हैं
जो पाकिस्तान सेना के एक्स कोर के प्रमुख हैं। ब्रिगेडियर फाईक अयूब ISI का
पाक अधिकृत कश्मीर सेक्टर कमांडर है।

द ट्रिब्यून की एक रिपोर्ट के
मुताबिक, इन अधिकारियों ने लश्कर और जैश-ए-मोहम्मद को अपनी रणनीति बदलने और
यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि किसी भी हमले में पाकिस्तान की
सीधी भागीदारी के सबूत न मिलें।

खुफिया सूत्रों के अनुसार, 12
सदस्यीय यह फिदायीन दस्ता कश्मीर के तीन प्रमुख जिलों में सक्रिय हो चुका
है। उनमें बडगाम, किश्तवाड़ और श्रीनगर शामिल है, जो कि भौगोलिक और रणनीति
रूप से अहम हैं।

लश्कर का वरिष्ठ कमांडर अबू हुरैरा फिदायीन दस्ते का
नेतृत्व कर रहा है। यह 2021 से सक्रिय है। मोहम्मद उमर 'खरगोश' डिप्टी
कमांडर है और हुरैरा का मुख्य सहयोगी भी है, जो कि 2022 से सक्रिय है। अबू
दुजाना का भी इसमें नाम है, जिसने हाल ही में घुसपैठ की है। वह आत्मघाती
हमलों के लिए प्रशिक्षित है।

सुरक्षा
एजेंसियों का मानना है कि पाकिस्तान जानबूझकर अपने समर्थित आतंकवाद को
'इस्लामिक स्टेट' (ISKP) के नाम से प्रमोट कर रहा है। इसके पीछे दो मुख्य
कारण हैं। पहल है पहचान छुपाना। यदि हमला ISKP के नाम पर होता है, तो
वैश्विक समुदाय को यह लगेगा कि यह एक अंतरराष्ट्रीय जिहादी नेटवर्क का काम
है न कि पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद का। पाकिस्तान की मंशा जांच को उलझाने
की रही है। हाइब्रिड मॉड्यूल के कारण जांच एजेंसियों के लिए मुख्य
साजिशकर्ताओं तक पहुंचना कठिन हो जाता है।

इस
इनपुट के बाद मध्य और दक्षिण कश्मीर में निगरानी बढ़ा दी गई है। सुरक्षा बल
अब छोटे-छोटे सेल्स में बंटे इन आतंकियों को ट्रैक करने के लिए बड़े
पैमाने पर तलाशी अभियान चला रहे हैं।


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