छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और प्राचीन ज्ञान परंपरा हमारी पांडुलिपियों में सुरक्षित है। पांडुलिपियां हमारी सभ्यता, संस्कृति और ज्ञान-वैभव का जीवंत प्रमाण हैं। इन्हें सहेजकर भावी पीढ़ियों तक पहुँचाना हम सबकी साझा जिम्मेदारी है।
केंद्र सरकार द्वारा प्रारंभ किया गया ‘ज्ञान भारतम राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान’ इस दिशा में एक दूरदर्शी पहल है, जो हमारी इस अमूल्य धरोहर को सुरक्षित और संरक्षित रखते हुए डिजिटल माध्यम से सुलभ बनाने का मार्ग प्रशस्त कर रहा है।
मैं प्रदेश के सभी नागरिकों से आग्रह करता हूँ कि यदि आपके पास कोई प्राचीन पांडुलिपि, हस्तलिखित ग्रंथ या ताड़पत्र सुरक्षित हैं, तो ‘ज्ञान भारतम’ मोबाइल एप पर उनका विवरण दर्ज कर इस राष्ट्रीय प्रयास का हिस्सा बनें। आपका छोटा सा योगदान हमारी सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित रखने में बड़ा कदम साबित होगा।
आइए, अपनी जड़ों को सहेजें, अपनी विरासत को संरक्षित करें - और ज्ञान की इस अनमोल धरोहर को आने वाली पीढ़ियों तक गर्व के साथ पहुँचाएं।
छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और प्राचीन ज्ञान परंपरा हमारी पांडुलिपियों में सुरक्षित है। पांडुलिपियां हमारी सभ्यता, संस्कृति और ज्ञान-वैभव का जीवंत प्रमाण हैं। इन्हें सहेजकर भावी पीढ़ियों तक पहुँचाना हम सबकी साझा जिम्मेदारी है।
केंद्र सरकार द्वारा प्रारंभ किया गया ‘ज्ञान भारतम राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान’ इस दिशा में एक दूरदर्शी पहल है, जो हमारी इस अमूल्य धरोहर को सुरक्षित और संरक्षित रखते हुए डिजिटल माध्यम से सुलभ बनाने का मार्ग प्रशस्त कर रहा है।
मैं प्रदेश के सभी नागरिकों से आग्रह करता हूँ कि यदि आपके पास कोई प्राचीन पांडुलिपि, हस्तलिखित ग्रंथ या ताड़पत्र सुरक्षित हैं, तो ‘ज्ञान भारतम’ मोबाइल एप पर उनका विवरण दर्ज कर इस राष्ट्रीय प्रयास का हिस्सा बनें। आपका छोटा सा योगदान हमारी सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित रखने में बड़ा कदम साबित होगा।
आइए, अपनी जड़ों को सहेजें, अपनी विरासत को संरक्षित करें - और ज्ञान की इस अनमोल धरोहर को आने वाली पीढ़ियों तक गर्व के साथ पहुँचाएं।



Journalist खबरीलाल














