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सुशासन तिहार छग (खबरीलाल न्यूज़) :: आजीविका डबरी से सशक्त हुईं श्रीमती राजिम बाई वर्मा, डबरी निर्माण से निर्मित हुए आजीविका के नए साधन :

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रायपुर 16 मई 2026/ रायपुर जिले के अभनपुर विकासखंड के ग्राम तरी की श्रीमती राजिम बाई वर्मा ने सरकारी योजना का लाभ लेकर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश की है। राजिम बाई आज मनरेगा के तहत निर्मित “आजीविका डबरी” के माध्यम से अपनी आय बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। पहले श्रीमती राजिम बाई वर्मा अपने खेत में बोर खनन करवाया था जिससे सिंचाई कर वे रबी फसल अपने खेत में लगाती थीं| लेकिन समय के साथ भू-जल स्तर नीचे चला गया इस कारण वे केवल एक ही फसल लेने तक सीमित हो गईं, जिससे उनकी आय पर असर पड़ा।

इसी बीच ग्राम पंचायत के सरपंच ने उन्हें महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के अंतर्गत “आजीविका डबरी” निर्माण के बारे में जानकारी दी। उन्हें बताया गया कि इस योजना के तहत बिना किसी आर्थिक खर्च के खेत में डबरी बनवाई जा सकती है, जिससे सिंचाई और अतिरिक्त आय के नए साधन विकसित किए जा सकते हैं।

जानकारी से प्रेरित होकर श्रीमती राजिम बाई वर्मा ने पंचायत में आवेदन किया। तकनीकी सहायक द्वारा स्थल निरीक्षण कर अनुमान तैयार किया गया और उच्च कार्यालय को भेजा गया। तत्पश्चात् उनके नाम से आजीविका डबरी निर्माण की प्रशासनिक स्वीकृति मिल गई। जिसकी लंबाई 20 मीटर, चौड़ाई 20 मीटर और गहराई 2 मीटर निर्धारित की गई। आज यह डबरी न केवल जल संरक्षण का माध्यम बनी है, बल्कि श्रीमती वर्मा के लिए आजीविका का मजबूत आधार भी बन चुकी है। वे डबरी में सिंघाड़े की खेती और मछली पालन शुरू करने की योजना बना रही हैं।


रायपुर 16 मई 2026/ रायपुर जिले के अभनपुर विकासखंड के ग्राम तरी की श्रीमती राजिम बाई वर्मा ने सरकारी योजना का लाभ लेकर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश की है। राजिम बाई आज मनरेगा के तहत निर्मित “आजीविका डबरी” के माध्यम से अपनी आय बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। पहले श्रीमती राजिम बाई वर्मा अपने खेत में बोर खनन करवाया था जिससे सिंचाई कर वे रबी फसल अपने खेत में लगाती थीं| लेकिन समय के साथ भू-जल स्तर नीचे चला गया इस कारण वे केवल एक ही फसल लेने तक सीमित हो गईं, जिससे उनकी आय पर असर पड़ा।

इसी बीच ग्राम पंचायत के सरपंच ने उन्हें महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के अंतर्गत “आजीविका डबरी” निर्माण के बारे में जानकारी दी। उन्हें बताया गया कि इस योजना के तहत बिना किसी आर्थिक खर्च के खेत में डबरी बनवाई जा सकती है, जिससे सिंचाई और अतिरिक्त आय के नए साधन विकसित किए जा सकते हैं।

जानकारी से प्रेरित होकर श्रीमती राजिम बाई वर्मा ने पंचायत में आवेदन किया। तकनीकी सहायक द्वारा स्थल निरीक्षण कर अनुमान तैयार किया गया और उच्च कार्यालय को भेजा गया। तत्पश्चात् उनके नाम से आजीविका डबरी निर्माण की प्रशासनिक स्वीकृति मिल गई। जिसकी लंबाई 20 मीटर, चौड़ाई 20 मीटर और गहराई 2 मीटर निर्धारित की गई। आज यह डबरी न केवल जल संरक्षण का माध्यम बनी है, बल्कि श्रीमती वर्मा के लिए आजीविका का मजबूत आधार भी बन चुकी है। वे डबरी में सिंघाड़े की खेती और मछली पालन शुरू करने की योजना बना रही हैं।


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