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Raipur (खबरीलाल न्यूज़) :: डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण से धरसीवा पंचायत को हो रही नियमित आय :

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रायपुर, 18 मई 2026/ जिले के ग्राम पंचायत धरसींवा ने स्वच्छता एवं अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्र में एक प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया है। ग्राम पंचायत ने सामुदायिक सहभागिता, महिला सशक्तिकरण और बेहतर प्रबंधन के माध्यम से न केवल गांव को स्वच्छ बनाया है, बल्कि कचरे से आय अर्जित कर आर्थिक सशक्तिकरण की नई मिसाल भी कायम की है।

ब्लॉक धरसींवा स्थित ग्राम ने वर्ष 2016 में स्वयं को खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) घोषित कर सम्मान प्राप्त किया था। वर्तमान में ग्राम पंचायत धरसींवा ओडीएफ स्थायित्व एवं ओडीएफ प्लस गतिविधियों के तहत निरंतर कार्य कर रही है। गांव में “ॐ नमः शिवाय” स्वच्छाग्रही दीदियों का समूह नियमित रूप से साफ-सफाई एवं ठोस-तरल अपशिष्ट प्रबंधन का कार्य कर रहा है। बीते 2 वर्षों से ग्राम में नियमित डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण एवं गीले-सूखे कचरे के पृथक्करण का कार्य सतत रूप से संचालित किया जा रहा है।

ग्राम पंचायत द्वारा ठोस एवं प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन के माध्यम से प्रतिमाह लगभग 45 हजार से 50 हजार रुपए तक की आय अर्जित की जा रही है। इस पहल ने न केवल गांव को स्वच्छ एवं सुंदर बनाया है बल्कि स्वच्छाग्रही दीदियों को आर्थिक एवं सामाजिक रूप से सशक्त भी किया है।


रायपुर, 18 मई 2026/ जिले के ग्राम पंचायत धरसींवा ने स्वच्छता एवं अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्र में एक प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया है। ग्राम पंचायत ने सामुदायिक सहभागिता, महिला सशक्तिकरण और बेहतर प्रबंधन के माध्यम से न केवल गांव को स्वच्छ बनाया है, बल्कि कचरे से आय अर्जित कर आर्थिक सशक्तिकरण की नई मिसाल भी कायम की है।

ब्लॉक धरसींवा स्थित ग्राम ने वर्ष 2016 में स्वयं को खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) घोषित कर सम्मान प्राप्त किया था। वर्तमान में ग्राम पंचायत धरसींवा ओडीएफ स्थायित्व एवं ओडीएफ प्लस गतिविधियों के तहत निरंतर कार्य कर रही है। गांव में “ॐ नमः शिवाय” स्वच्छाग्रही दीदियों का समूह नियमित रूप से साफ-सफाई एवं ठोस-तरल अपशिष्ट प्रबंधन का कार्य कर रहा है। बीते 2 वर्षों से ग्राम में नियमित डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण एवं गीले-सूखे कचरे के पृथक्करण का कार्य सतत रूप से संचालित किया जा रहा है।

ग्राम पंचायत द्वारा ठोस एवं प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन के माध्यम से प्रतिमाह लगभग 45 हजार से 50 हजार रुपए तक की आय अर्जित की जा रही है। इस पहल ने न केवल गांव को स्वच्छ एवं सुंदर बनाया है बल्कि स्वच्छाग्रही दीदियों को आर्थिक एवं सामाजिक रूप से सशक्त भी किया है।


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