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Raipur (खबरीलाल न्यूज़) :: सोने की परंपरा, निवेश और भारतीय संस्कृति में ज्वैलरी की भूमिका पर निकेश बरड़िया ने रखे विचार :

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अनोपचंद तिलोकचंद ज्वैलर्स प्रा. लि. के निदेशक निकेश बरड़िया ने 29 मई 2026 को आयोजित “Times Conversation on Role of Jewellery in Indian Culture” कार्यक्रम में सहभागिता करते हुए भारतीय संस्कृति में स्वर्ण एवं आभूषणों के महत्व, निवेश के बदलते स्वरूप तथा वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों में सोने की भूमिका पर अपने विचार साझा किए।

कार्यक्रम के दौरान निकेश बरड़िया ने कहा कि भारत में सोना केवल एक धातु नहीं, बल्कि भावनाओं, परंपराओं और पारिवारिक सुरक्षा का प्रतीक है। सदियों से भारतीय परिवारों में सोना सामाजिक प्रतिष्ठा, धार्मिक आस्था तथा भविष्य की आर्थिक सुरक्षा के रूप में देखा जाता रहा है। उन्होंने बताया कि भारतीय संस्कृति में जन्म से लेकर विवाह और विभिन्न धार्मिक अवसरों तक स्वर्ण का विशेष महत्व बना हुआ है।

चर्चा के दौरान निकेश बरड़िया ने अपने बचपन की एक प्रेरणादायक स्मृति भी साझा की। उन्होंने बताया कि कंपनी के चेयरमैन तिलोकचंद बरड़िया अक्सर कहा करते है कि “सोने को अपने तीसरे बेटे की तरह समझना चाहिए। जिस प्रकार लोग अपने बच्चों के भविष्य के लिए बचत और निवेश करते हैं, उसी प्रकार नियमित रूप से सोने में भी निवेश करना चाहिए। जीवन में कौन साथ दे या न दे, लेकिन सोना भविष्य में हमेशा आपका साथ देता है।”

निकेश बरड़िया ने कहा कि यह सोच केवल निवेश नहीं, बल्कि भारतीय परिवारों की आर्थिक सुरक्षा और दूरदर्शिता का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि पुराने समय से ही भारतीय परिवार कठिन परिस्थितियों में सोने को सबसे भरोसेमंद संपत्ति मानते आए हैं।

कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के द्वारा हाल ही में दिए गए उस बयान पर भी चर्चा हुई, जिसमें उन्होंने देशवासियों से एक वर्ष तक सोना खरीदने से बचने की अपील की थी। इस संदर्भ में निकेश बरड़िया ने कहा कि प्रधानमंत्री की अपील का उद्देश्य देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ते दबाव को कम करना तथा वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों में संतुलन बनाए रखना है।

निकेश बरड़िया ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था में ज्वैलरी उद्योग लाखों लोगों को रोजगार प्रदान करता है। इसमें छोटे व्यापारी, कारीगर, डिजाइनर और हस्तशिल्प से जुड़े परिवार शामिल हैं। ऐसे में सोने की खरीद में अचानक कमी आने से इस पूरे उद्योग पर प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि आज के समय में सोना केवल आभूषण नहीं, बल्कि एक मजबूत निवेश विकल्प के रूप में भी देखा जा रहा है, विशेषकर आर्थिक अनिश्चितताओं के दौर में।

उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि वर्तमान परिस्थितियों में गोल्ड रीसाइक्लिंग और पुराने स्वर्ण के पुनः उपयोग जैसे विकल्पों पर ध्यान देना अधिक व्यावहारिक हो सकता है। कार्यक्रम में इतिहास, संस्कृति, निवेश और अर्थव्यवस्था के विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत चर्चा हुई, जिसमें यह बात सामने आई कि भारतीय समाज में सोने का महत्व भविष्य में भी बना रहेगा।

निकेश बरड़िया ने कहा कि बदलते समय के साथ ज्वैलरी उद्योग आधुनिकता और परंपरा दोनों को साथ लेकर आगे बढ़ रहा है तथा ग्राहकों की पसंद में निवेश आधारित ज्वैलरी और हल्के डिजाइनों की मांग तेजी से बढ़ रही है। यह कार्यक्रम देशभर के ज्वैलरी उद्योग, व्यापार जगत और निवेश क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए विचार-विमर्श का महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ।

इस चर्चा का उद्देश्य भारतीय संस्कृति में सोने और आभूषणों के महत्व को नई पीढ़ी तक पहुंचाना तथा लोगों को निवेश और आर्थिक सुरक्षा के प्रति जागरूक करना था। उन्होंने कहा कि भारत में ज्वैलरी केवल फैशन का हिस्सा नहीं, बल्कि पारिवारिक विरासत, परंपरा और विश्वास का प्रतीक है। इस कार्यक्रम में कई पत्रकार, आभूषण उद्योग के विशेषज्ञ और दर्शक उपस्थित थे।


अनोपचंद तिलोकचंद ज्वैलर्स प्रा. लि. के निदेशक निकेश बरड़िया ने 29 मई 2026 को आयोजित “Times Conversation on Role of Jewellery in Indian Culture” कार्यक्रम में सहभागिता करते हुए भारतीय संस्कृति में स्वर्ण एवं आभूषणों के महत्व, निवेश के बदलते स्वरूप तथा वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों में सोने की भूमिका पर अपने विचार साझा किए।

कार्यक्रम के दौरान निकेश बरड़िया ने कहा कि भारत में सोना केवल एक धातु नहीं, बल्कि भावनाओं, परंपराओं और पारिवारिक सुरक्षा का प्रतीक है। सदियों से भारतीय परिवारों में सोना सामाजिक प्रतिष्ठा, धार्मिक आस्था तथा भविष्य की आर्थिक सुरक्षा के रूप में देखा जाता रहा है। उन्होंने बताया कि भारतीय संस्कृति में जन्म से लेकर विवाह और विभिन्न धार्मिक अवसरों तक स्वर्ण का विशेष महत्व बना हुआ है।

चर्चा के दौरान निकेश बरड़िया ने अपने बचपन की एक प्रेरणादायक स्मृति भी साझा की। उन्होंने बताया कि कंपनी के चेयरमैन तिलोकचंद बरड़िया अक्सर कहा करते है कि “सोने को अपने तीसरे बेटे की तरह समझना चाहिए। जिस प्रकार लोग अपने बच्चों के भविष्य के लिए बचत और निवेश करते हैं, उसी प्रकार नियमित रूप से सोने में भी निवेश करना चाहिए। जीवन में कौन साथ दे या न दे, लेकिन सोना भविष्य में हमेशा आपका साथ देता है।”

निकेश बरड़िया ने कहा कि यह सोच केवल निवेश नहीं, बल्कि भारतीय परिवारों की आर्थिक सुरक्षा और दूरदर्शिता का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि पुराने समय से ही भारतीय परिवार कठिन परिस्थितियों में सोने को सबसे भरोसेमंद संपत्ति मानते आए हैं।

कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के द्वारा हाल ही में दिए गए उस बयान पर भी चर्चा हुई, जिसमें उन्होंने देशवासियों से एक वर्ष तक सोना खरीदने से बचने की अपील की थी। इस संदर्भ में निकेश बरड़िया ने कहा कि प्रधानमंत्री की अपील का उद्देश्य देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ते दबाव को कम करना तथा वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों में संतुलन बनाए रखना है।

निकेश बरड़िया ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था में ज्वैलरी उद्योग लाखों लोगों को रोजगार प्रदान करता है। इसमें छोटे व्यापारी, कारीगर, डिजाइनर और हस्तशिल्प से जुड़े परिवार शामिल हैं। ऐसे में सोने की खरीद में अचानक कमी आने से इस पूरे उद्योग पर प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि आज के समय में सोना केवल आभूषण नहीं, बल्कि एक मजबूत निवेश विकल्प के रूप में भी देखा जा रहा है, विशेषकर आर्थिक अनिश्चितताओं के दौर में।

उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि वर्तमान परिस्थितियों में गोल्ड रीसाइक्लिंग और पुराने स्वर्ण के पुनः उपयोग जैसे विकल्पों पर ध्यान देना अधिक व्यावहारिक हो सकता है। कार्यक्रम में इतिहास, संस्कृति, निवेश और अर्थव्यवस्था के विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत चर्चा हुई, जिसमें यह बात सामने आई कि भारतीय समाज में सोने का महत्व भविष्य में भी बना रहेगा।

निकेश बरड़िया ने कहा कि बदलते समय के साथ ज्वैलरी उद्योग आधुनिकता और परंपरा दोनों को साथ लेकर आगे बढ़ रहा है तथा ग्राहकों की पसंद में निवेश आधारित ज्वैलरी और हल्के डिजाइनों की मांग तेजी से बढ़ रही है। यह कार्यक्रम देशभर के ज्वैलरी उद्योग, व्यापार जगत और निवेश क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए विचार-विमर्श का महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ।

इस चर्चा का उद्देश्य भारतीय संस्कृति में सोने और आभूषणों के महत्व को नई पीढ़ी तक पहुंचाना तथा लोगों को निवेश और आर्थिक सुरक्षा के प्रति जागरूक करना था। उन्होंने कहा कि भारत में ज्वैलरी केवल फैशन का हिस्सा नहीं, बल्कि पारिवारिक विरासत, परंपरा और विश्वास का प्रतीक है। इस कार्यक्रम में कई पत्रकार, आभूषण उद्योग के विशेषज्ञ और दर्शक उपस्थित थे।


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