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Surajpur (खबरीलाल न्यूज़) :: चलती एम्बुलेंस में गूंजी किलकिारी: EMT विद्याविती की सूझबूझ से जच्चा-बच्चा सुरक्षित :

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संवाददाता/सौरभ साहू, शंकरगढ़, जिला बलरामपुर / रामानुजगंज, छत्तीसगढ़।

शंकरगढ़ (बलरामपुर)-  शंकरगढ़ क्षेत्र में आज स्वास्थ्य विभाग की टीम की तत्परता और त्वरित निर्णय क्षमता का एक उत्कृष्ट उदाहरण सामने आया है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) शंकरगढ़ से अंबिकापुर अस्पताल के लिए रेफर की गई एक गर्भवती महिला को रास्ते में ही गंभीर प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए एम्बुलेंस में तैनात ई.एम.टी (EMT) विद्यावती उर्रे ने अत्यंत सूझबूझ का परिचय देते हुए चलती गाड़ी में ही शाम 5:40 बजे सुरक्षित प्रसव कराया।

मरीज की स्थिति अत्यंत गंभीर थी क्योंकि महिला के शरीर में खून की भारी कमी (Anemia) थी और ब्लड प्रेशर (BP) भी काफी हाई था। सामान्यतः ऐसी जटिलताओं में विशेषज्ञ डॉक्टरों और अस्पताल की कमान आवश्यक होती है, परंतु रास्ते की मजबूरी को देखते हुए ई.एम.टी विद्यावती उर्रे ने खुद मोर्चा संभाला। उन्होंने बिना पैनिक हुए स्थिति को नियंत्रित किया, हाई बीपी व खून की कमी की चुनौतियों को कुशलतापूर्वक मैनेज किया और सुरक्षित प्रसव संपन्न कराया।सफल प्रसव के बाद नवजात की किलकारी गूंज उठी। वर्तमान में जच्चा और बच्चा दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं। इस साहसिक कार्य के लिए परिजनों व स्थानीय लोगों ने 108 एम्बुलेंस सेवा और जांबाज EMT विद्यावती उर्रे का आभार जताते हुए उनकी जमकर सराहना की है।


संवाददाता/सौरभ साहू, शंकरगढ़, जिला बलरामपुर / रामानुजगंज, छत्तीसगढ़।

शंकरगढ़ (बलरामपुर)-  शंकरगढ़ क्षेत्र में आज स्वास्थ्य विभाग की टीम की तत्परता और त्वरित निर्णय क्षमता का एक उत्कृष्ट उदाहरण सामने आया है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) शंकरगढ़ से अंबिकापुर अस्पताल के लिए रेफर की गई एक गर्भवती महिला को रास्ते में ही गंभीर प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए एम्बुलेंस में तैनात ई.एम.टी (EMT) विद्यावती उर्रे ने अत्यंत सूझबूझ का परिचय देते हुए चलती गाड़ी में ही शाम 5:40 बजे सुरक्षित प्रसव कराया।

मरीज की स्थिति अत्यंत गंभीर थी क्योंकि महिला के शरीर में खून की भारी कमी (Anemia) थी और ब्लड प्रेशर (BP) भी काफी हाई था। सामान्यतः ऐसी जटिलताओं में विशेषज्ञ डॉक्टरों और अस्पताल की कमान आवश्यक होती है, परंतु रास्ते की मजबूरी को देखते हुए ई.एम.टी विद्यावती उर्रे ने खुद मोर्चा संभाला। उन्होंने बिना पैनिक हुए स्थिति को नियंत्रित किया, हाई बीपी व खून की कमी की चुनौतियों को कुशलतापूर्वक मैनेज किया और सुरक्षित प्रसव संपन्न कराया।सफल प्रसव के बाद नवजात की किलकारी गूंज उठी। वर्तमान में जच्चा और बच्चा दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं। इस साहसिक कार्य के लिए परिजनों व स्थानीय लोगों ने 108 एम्बुलेंस सेवा और जांबाज EMT विद्यावती उर्रे का आभार जताते हुए उनकी जमकर सराहना की है।


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