1984 का लोकसभा चुनाव भारतीय राजनीतिक इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण अध्यायों में से एक माना जाता है।
इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए इस चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने लगभग 49.10% राष्ट्रीय वोट शेयर हासिल करते हुए 543 में से 414 लोकसभा सीटें जीतीं। यह जनादेश भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में सबसे बड़े जनसमर्थनों में से एक था।
राजीव गांधी ने अमेठी से चुनाव लड़ा और 3,65,041 वोट प्राप्त करते हुए 83.7% वोट शेयर हासिल किया। दिलचस्प बात यह थी कि उनके सामने उनकी भाभी और संजय गांधी की पत्नी मेनका गांधी चुनाव मैदान में थीं।
राजीव गांधी 1984 और 1989 में अमेठी से सांसद चुने गए। उनकी हत्या के बाद भी अमेठी ने गांधी परिवार पर अपना विश्वास बनाए रखा और लगातार उनका समर्थन किया।
1984 का जनादेश केवल एक चुनावी जीत नहीं था, बल्कि वह क्षण था जब देश ने कांग्रेस पार्टी और राजीव गांधी के नेतृत्व में असाधारण विश्वास व्यक्त किया। यह राजनीतिक विरासत आज भी भारतीय राजनीति में अपनी गूंज बनाए हुए है।
सोर्स :: Dinesh Purohit, X post - Imdineshpurohit, सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर
1984 का लोकसभा चुनाव भारतीय राजनीतिक इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण अध्यायों में से एक माना जाता है।
इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए इस चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने लगभग 49.10% राष्ट्रीय वोट शेयर हासिल करते हुए 543 में से 414 लोकसभा सीटें जीतीं। यह जनादेश भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में सबसे बड़े जनसमर्थनों में से एक था।
राजीव गांधी ने अमेठी से चुनाव लड़ा और 3,65,041 वोट प्राप्त करते हुए 83.7% वोट शेयर हासिल किया। दिलचस्प बात यह थी कि उनके सामने उनकी भाभी और संजय गांधी की पत्नी मेनका गांधी चुनाव मैदान में थीं।
राजीव गांधी 1984 और 1989 में अमेठी से सांसद चुने गए। उनकी हत्या के बाद भी अमेठी ने गांधी परिवार पर अपना विश्वास बनाए रखा और लगातार उनका समर्थन किया।
1984 का जनादेश केवल एक चुनावी जीत नहीं था, बल्कि वह क्षण था जब देश ने कांग्रेस पार्टी और राजीव गांधी के नेतृत्व में असाधारण विश्वास व्यक्त किया। यह राजनीतिक विरासत आज भी भारतीय राजनीति में अपनी गूंज बनाए हुए है।
सोर्स :: Dinesh Purohit, X post - Imdineshpurohit, सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर



Journalist खबरीलाल














