रायपुर। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार प्रदेश के दलित,
शोषित, अल्पसंख्यक युवतियों को प्रदेश के बाहर के हास्पिटल एवं होम केयरों
में नौकरी के नाम से भेजा जा रहा है तथा इन लड़कियों को सात हजार महीने के
वेतनमान में नियुक्ति दी जाती है तथा मिली जानकारी के अनुसार रुपए बारह से
सोलह हजार रुपए हास्पिटलों से वसूलते हैं. छत्तीसगढ़ के बस्तर एवं अंबिकापुर
के कई आदिवासी युवतियों को एवं प्रदेश के कई लड़कियों को काम कराके तनख्वाह
नहीं देते। तथा गलतियां निकालकर काम से निकाल देते हैं। ये पीड़ित युवतियां
होम केयर आफिसों के चक्कर काट-काट कर निराश हो जाते हैं और अपने घर चले
जाते हैं। इन युवतियों को होम केयर द्वारा तनख्वाह नहीं देने पर नौकरी से
निकाल देने पर उन्हें मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ता है। इस पर
प्रदेश के स्वास्थ्य एवं श्रम विभाग संज्ञान में लेते हुए जांचकर यथोचित
व्यवस्था करनी चाहिए।
रायपुर। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार प्रदेश के दलित,
शोषित, अल्पसंख्यक युवतियों को प्रदेश के बाहर के हास्पिटल एवं होम केयरों
में नौकरी के नाम से भेजा जा रहा है तथा इन लड़कियों को सात हजार महीने के
वेतनमान में नियुक्ति दी जाती है तथा मिली जानकारी के अनुसार रुपए बारह से
सोलह हजार रुपए हास्पिटलों से वसूलते हैं. छत्तीसगढ़ के बस्तर एवं अंबिकापुर
के कई आदिवासी युवतियों को एवं प्रदेश के कई लड़कियों को काम कराके तनख्वाह
नहीं देते। तथा गलतियां निकालकर काम से निकाल देते हैं। ये पीड़ित युवतियां
होम केयर आफिसों के चक्कर काट-काट कर निराश हो जाते हैं और अपने घर चले
जाते हैं। इन युवतियों को होम केयर द्वारा तनख्वाह नहीं देने पर नौकरी से
निकाल देने पर उन्हें मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ता है। इस पर
प्रदेश के स्वास्थ्य एवं श्रम विभाग संज्ञान में लेते हुए जांचकर यथोचित
व्यवस्था करनी चाहिए।



Journalist खबरीलाल














