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संपादकीय :: तन को ढाकिये, मन और मस्तिष्क को खुला रखिये:

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तन को ढकना जितना महत्त्वपूर्ण और जरूरी है ठीक उसी तरह मन और मस्तिष्क का खुला रहना जरूरी है। मन की बात मस्तिष्क और मस्तिष्क की बात मन समझते हैं, लेकिन हम प्रोपोगंडा में फंस जाते है और दिमाग एवं दिल से कोई निर्णय नहीं लेते हैं अपितु लहर में बहते जाते हैं। आज के समय मे सोशल मीडिया इतना ज्यादा सशक्त है कि वो दूध का दूध और पानी का पानी निकाल देते हैं। इस बाबत लोग एक हवा सोशल मीडिया में वायरल कर देते हैं लेकिन अन्य इसी के विरोध में डेटा जनता तक पहुंचा देते हैं। 

भारत एक लोकतांत्रिक देश के साथ धर्मनिरपेक्ष देश है। यहां सभी धर्म के लोग एक दूसरे के साथ भाई चारे के साथ रहते हैं। लेकिन कुछ राजनीतिक प्रोपोगंडा इसमें सेंध लगाने की कोशिश कर भारत देश के मुस्लिम और हिन्दू कौमों में विभाजन करने की कोशिश करने लगे। जग विदित है कि भारत और पाक में आपस में नहीं बनती और इस बात का फायदा उठाते हुए ठीक निर्वाचन के समय हिन्दू, मुस्लिम, हिन्दुतत्व आदि को लाकर खड़ा कर दिया जाता है। इससे वे अपना उल्लू भले ही सीधा कर ले लेकिन सत्य तो सत्य है जिसका हिसाब चुकाकर जाना होता है।

प्रत्येक देश मे एक अनुशासन होता है जिस पर प्रत्येक नागरिक अमल करते हैं। ऐसा व्यक्ति बचपन से देखते हुए आत्मसात कर बड़ा होता है। लेकिन अति महत्त्वकांक्षा लोगों को पथ भ्रमित कर देता है जिससे मुद्दा को गर्मा दिया जाता है। All Indians are brother & sister. सन 2000 के बाद और स्मार्ट फ़ोन आने के बाद साम्प्रदायिकता, कट्टरता आदि जैसे बढ़ गई है। इसका जिम्मेदार कौन ? लोग एक धारा प्रवाह में बह जाते हैं लेकिन हिंदुस्तान/ इंडिया के सुख शांति के लिए बहुत कम लोग ही सोचते हैं और बाकी खुद को इससे दूर रखते हैं। जिम्मेदारी से भागना कायरता है। क्यों प्रत्येक एक अखंड भारत के बारे में नहीं सोचते हैं। WE ARE ALL EQUAL.


तन को ढकना जितना महत्त्वपूर्ण और जरूरी है ठीक उसी तरह मन और मस्तिष्क का खुला रहना जरूरी है। मन की बात मस्तिष्क और मस्तिष्क की बात मन समझते हैं, लेकिन हम प्रोपोगंडा में फंस जाते है और दिमाग एवं दिल से कोई निर्णय नहीं लेते हैं अपितु लहर में बहते जाते हैं। आज के समय मे सोशल मीडिया इतना ज्यादा सशक्त है कि वो दूध का दूध और पानी का पानी निकाल देते हैं। इस बाबत लोग एक हवा सोशल मीडिया में वायरल कर देते हैं लेकिन अन्य इसी के विरोध में डेटा जनता तक पहुंचा देते हैं। 

भारत एक लोकतांत्रिक देश के साथ धर्मनिरपेक्ष देश है। यहां सभी धर्म के लोग एक दूसरे के साथ भाई चारे के साथ रहते हैं। लेकिन कुछ राजनीतिक प्रोपोगंडा इसमें सेंध लगाने की कोशिश कर भारत देश के मुस्लिम और हिन्दू कौमों में विभाजन करने की कोशिश करने लगे। जग विदित है कि भारत और पाक में आपस में नहीं बनती और इस बात का फायदा उठाते हुए ठीक निर्वाचन के समय हिन्दू, मुस्लिम, हिन्दुतत्व आदि को लाकर खड़ा कर दिया जाता है। इससे वे अपना उल्लू भले ही सीधा कर ले लेकिन सत्य तो सत्य है जिसका हिसाब चुकाकर जाना होता है।

प्रत्येक देश मे एक अनुशासन होता है जिस पर प्रत्येक नागरिक अमल करते हैं। ऐसा व्यक्ति बचपन से देखते हुए आत्मसात कर बड़ा होता है। लेकिन अति महत्त्वकांक्षा लोगों को पथ भ्रमित कर देता है जिससे मुद्दा को गर्मा दिया जाता है। All Indians are brother & sister. सन 2000 के बाद और स्मार्ट फ़ोन आने के बाद साम्प्रदायिकता, कट्टरता आदि जैसे बढ़ गई है। इसका जिम्मेदार कौन ? लोग एक धारा प्रवाह में बह जाते हैं लेकिन हिंदुस्तान/ इंडिया के सुख शांति के लिए बहुत कम लोग ही सोचते हैं और बाकी खुद को इससे दूर रखते हैं। जिम्मेदारी से भागना कायरता है। क्यों प्रत्येक एक अखंड भारत के बारे में नहीं सोचते हैं। WE ARE ALL EQUAL.


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