जीवन अनमोल है ये सब जानते हैं लेकिन अनमोल है जानते हुए भी ऐसे कृत्य कर जाते हैं जिससे सजा मिलने पर उनकी वास्तविक जीवनचर्या जो चल रही थी वो ऑफ मोड में आ जाती है। मनुष्य का जीवन 84 लाख योनियों से गुजरने के बाद मिलता है, कितना अमूल्य है, पर इसे समझने वाले कुछ प्रतिशत ही होते हैं। मनुष्य जीवन मिलने के पश्चात लोग रोटी, कपड़ा और मकान की व्यवस्था करने में लग जाते हैं। जिन्हें विरासत में मूलभूत सुविधाएं मिली हुई हो या जो जीवन के शुरुआती दौर में अपने मेहनत से मुकाम, धन, दौलत, यश , सम्मान अर्जित किये हों वे और ज्यादा पैसों के पीछे भागते हुए दिखाई देते हैं। आडंबर, दिखावे ने समाज के अन्य लोगों के मन के अंदर एक ईर्ष्या का भाव पैदा कर देता है जिससे वे भी ऐन केन प्रकारेण धन दौलत अर्जित करने में लग जाते हैं। यदि आप सत्य की राह में हैं तो आप ऑन मोड में हैं लेकिन जहां असत्य या शॉर्टकट की राह पकड़े वो जीवन को ऑफ मोड पर ले जाने हेतु राह प्रशस्त करते हैं।
वर्ष 2019 में आये कोरोना महामारी आज वर्ष 2022 में भी अपना कहर बरपा रहा है। इस महामारी ने विश्व के मानव जीवन को ऑन एंड ऑफ मोड पर ला दिया है। प्रकोप बढ़ता है तो लोकडौन या पाबंदी लग जाते हैं। कल कारखाने, कार्यालय 50 प्रतिशत की संख्या में चलने लगते हैं। कुछ लोग वर्क फ्रॉम होम कर रहे हैं तो कुछ लोग नौकरी से हाथ धोकर ऑफ मोड पर आ जाते हैं। वैसे ही व्यापार इस महामारी में कभी ऑन तो कभी ऑफ। बच्चों का स्कूल जाना जरूर ऑफ हुआ हो लेकिन ऑनलाइन व्यवस्था से पढ़ाई ऑन है । देखा जाए तो जीवन एक तरह से ऑनलाइन हो गया है। घर बैठे राशन , सब्जी से लेकर सब कुछ ऑनलाइन से मंगवा सकते हैं। पहले लोग खुद बाजार जाते थे जो आज अधिकांश ऑफ हो गया है। प्रदूषण की वजह से शहर में गाड़ियां एक दिन इवन और एक दिन ऑड नम्बर पर शहर में निकल रही है। जिस तरह पेट्रोल और डीजल महंगाई का रिकॉर्ड तोड़ रहे हैं आगे वो दिन दूर नहीं जब ये ऑफ होंगे और इलेक्ट्रिक वाहन ऑन हो जाएंगे। जीवन की अमूल्यता को समझते हुए प्रत्येक व्यक्ति को सकारात्मक सोच के साथ ऑन मोड में रहने की कला को सीखना होगा तभी पूरी दुनिया, समाज ऑन रहेगा।
जीवन अनमोल है ये सब जानते हैं लेकिन अनमोल है जानते हुए भी ऐसे कृत्य कर जाते हैं जिससे सजा मिलने पर उनकी वास्तविक जीवनचर्या जो चल रही थी वो ऑफ मोड में आ जाती है। मनुष्य का जीवन 84 लाख योनियों से गुजरने के बाद मिलता है, कितना अमूल्य है, पर इसे समझने वाले कुछ प्रतिशत ही होते हैं। मनुष्य जीवन मिलने के पश्चात लोग रोटी, कपड़ा और मकान की व्यवस्था करने में लग जाते हैं। जिन्हें विरासत में मूलभूत सुविधाएं मिली हुई हो या जो जीवन के शुरुआती दौर में अपने मेहनत से मुकाम, धन, दौलत, यश , सम्मान अर्जित किये हों वे और ज्यादा पैसों के पीछे भागते हुए दिखाई देते हैं। आडंबर, दिखावे ने समाज के अन्य लोगों के मन के अंदर एक ईर्ष्या का भाव पैदा कर देता है जिससे वे भी ऐन केन प्रकारेण धन दौलत अर्जित करने में लग जाते हैं। यदि आप सत्य की राह में हैं तो आप ऑन मोड में हैं लेकिन जहां असत्य या शॉर्टकट की राह पकड़े वो जीवन को ऑफ मोड पर ले जाने हेतु राह प्रशस्त करते हैं।
वर्ष 2019 में आये कोरोना महामारी आज वर्ष 2022 में भी अपना कहर बरपा रहा है। इस महामारी ने विश्व के मानव जीवन को ऑन एंड ऑफ मोड पर ला दिया है। प्रकोप बढ़ता है तो लोकडौन या पाबंदी लग जाते हैं। कल कारखाने, कार्यालय 50 प्रतिशत की संख्या में चलने लगते हैं। कुछ लोग वर्क फ्रॉम होम कर रहे हैं तो कुछ लोग नौकरी से हाथ धोकर ऑफ मोड पर आ जाते हैं। वैसे ही व्यापार इस महामारी में कभी ऑन तो कभी ऑफ। बच्चों का स्कूल जाना जरूर ऑफ हुआ हो लेकिन ऑनलाइन व्यवस्था से पढ़ाई ऑन है । देखा जाए तो जीवन एक तरह से ऑनलाइन हो गया है। घर बैठे राशन , सब्जी से लेकर सब कुछ ऑनलाइन से मंगवा सकते हैं। पहले लोग खुद बाजार जाते थे जो आज अधिकांश ऑफ हो गया है। प्रदूषण की वजह से शहर में गाड़ियां एक दिन इवन और एक दिन ऑड नम्बर पर शहर में निकल रही है। जिस तरह पेट्रोल और डीजल महंगाई का रिकॉर्ड तोड़ रहे हैं आगे वो दिन दूर नहीं जब ये ऑफ होंगे और इलेक्ट्रिक वाहन ऑन हो जाएंगे। जीवन की अमूल्यता को समझते हुए प्रत्येक व्यक्ति को सकारात्मक सोच के साथ ऑन मोड में रहने की कला को सीखना होगा तभी पूरी दुनिया, समाज ऑन रहेगा।



Journalist खबरीलाल














