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लघुकथा :: पूंछ कटे कुत्ते का भरोसा:

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 मुख्यमंत्री के कार्यक्रम हेतु भव्य मंच का निर्माण किया गया था।वहां की सुरक्षाऔर चाक-चौबंद व्यवस्था की जांच करने के लिए कार्यक्रम के पहले एक रौबदार मूछों वालाअधिकारीअपनी टीम के साथआयाऔर मंच की जांच बारीकी से करके चला गया।उसके जाने के बाद एक और सुरक्षा दल मंच को जांचने -परखने के लिए आया।                       

              अत्याधुनिक जांच यंत्रों के साथ ही उस टीम के साथ एक पूंछकटा कुत्ता भी था।वह पूंछकटा कुत्ता मंच,  मुख्यमंत्री के बैठने वाली कुर्सी,मुख्यमंत्री के गले में डालने वाले पुष्पहार,सहित जहां मुख्यमंत्री दीप प्रज्जवलित करने वाले थे वहां रखे पूजा सामग्रियों को भी सूंघ सूंघ कर देख रहा था।सब कुछ ठीक-ठाक पाए जाने पर वह कुत्ता शांत बैठ गया।वह टीम मंच को ओके करके लौट गई ।

     तब दर्शक दीर्घा में मेरी बाजू वाली कुर्सी पर बैठी एक भद्र महिला के साथ आए बच्चे ने पूछा-अंकल जी,पहले तो एक रोबदार मूंछों वाला अधिकारी मंच को जांच परख कर गया था,फिर यह पूंछ कटा कुत्ता क्यों लाया गया? मैंने हंसते हुए कहा- दरअसल मूंछ वाले से ज्यादा पूछ परख पूंछकटे कुत्ते की होती है।इंसान की तुलना में उसकी वफादारीऔर समझदारी को कहीं ज्यादा भरोसेमंद माना जाता है।मेरा यह जवाब सुनकर वह बच्चा मुझे ही संदेह की नजर से देखने लगा था। 

विजय मिश्रा अमित, पूर्वअति.महाप्रबंधक(जन), छग पावर कम्पनी, एम 8, सेक्टर 2,अग्रोहा सोसायटी, पो.आ.-सुंदर नगर, रायपुर (छत्तीसगढ़),492013. मोबा.न.9893123310


 मुख्यमंत्री के कार्यक्रम हेतु भव्य मंच का निर्माण किया गया था।वहां की सुरक्षाऔर चाक-चौबंद व्यवस्था की जांच करने के लिए कार्यक्रम के पहले एक रौबदार मूछों वालाअधिकारीअपनी टीम के साथआयाऔर मंच की जांच बारीकी से करके चला गया।उसके जाने के बाद एक और सुरक्षा दल मंच को जांचने -परखने के लिए आया।                       

              अत्याधुनिक जांच यंत्रों के साथ ही उस टीम के साथ एक पूंछकटा कुत्ता भी था।वह पूंछकटा कुत्ता मंच,  मुख्यमंत्री के बैठने वाली कुर्सी,मुख्यमंत्री के गले में डालने वाले पुष्पहार,सहित जहां मुख्यमंत्री दीप प्रज्जवलित करने वाले थे वहां रखे पूजा सामग्रियों को भी सूंघ सूंघ कर देख रहा था।सब कुछ ठीक-ठाक पाए जाने पर वह कुत्ता शांत बैठ गया।वह टीम मंच को ओके करके लौट गई ।

     तब दर्शक दीर्घा में मेरी बाजू वाली कुर्सी पर बैठी एक भद्र महिला के साथ आए बच्चे ने पूछा-अंकल जी,पहले तो एक रोबदार मूंछों वाला अधिकारी मंच को जांच परख कर गया था,फिर यह पूंछ कटा कुत्ता क्यों लाया गया? मैंने हंसते हुए कहा- दरअसल मूंछ वाले से ज्यादा पूछ परख पूंछकटे कुत्ते की होती है।इंसान की तुलना में उसकी वफादारीऔर समझदारी को कहीं ज्यादा भरोसेमंद माना जाता है।मेरा यह जवाब सुनकर वह बच्चा मुझे ही संदेह की नजर से देखने लगा था। 

विजय मिश्रा अमित, पूर्वअति.महाप्रबंधक(जन), छग पावर कम्पनी, एम 8, सेक्टर 2,अग्रोहा सोसायटी, पो.आ.-सुंदर नगर, रायपुर (छत्तीसगढ़),492013. मोबा.न.9893123310


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