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Raipur (खबरीलाल न्यूज़) :: रायपुर के बहुत से फ्लैट सोसाइटीयों में पेय जल की समस्या देखी जा रही है ! :

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रायपुर । राजधानी रायपुर दिनों दिन फैलते जा रहा है और एक महानगर का रूप ले रहा है जो 26 सालों में विभिन्न सरकार द्वारा योजनाओं का क्रियान्वयन कर हुआ है साथ ही छग के लगे हुए राज्यों के लिए राजधानी रायपुर बिज़नेस का बहुत बड़ा हब बन गया है साथ ही राजधानी बनने के बाद विभिन्न प्रदेशों से लोग यहां जॉब, व्यवसाय करने हेतु आये जो बिल्डरों हेतु एक सुअवसर बन गया साथ ही बजट फ्रेंडली फ्लैट रायपुर के रहवासियों, इन्वेस्टरों के लिए फर्स्ट चॉइस बन गया।

फल स्वरूप रायपुर के चारों दिशाओं में बहुमंजिला इमारत बनने लगे, फ्लैट कल्चर का चलन बढ़ा साथ ही बिल्डरों द्वारा लुभावने सुविधा और वादों ने कस्टमरों को उनके तरफ खींचा। जिसके चलते लोग बैंकों से आसान किश्तों में लोन लेकर फ्लैट खरीदकर रहने लगे।

बहुत से फ्लैट सोसाइटी, कॉलोनियां ऐसे स्थानों पर बने हैं जहां भूजल का स्तर बहुत ही कम था या ड्राई जोन था और इसके फलस्वरूप जिन्होंने भी इस तरह ड्राई ज़ोन में आवास या फ्लैट लिया वे विशेषकर गर्मी के समय (फरवरी के मध्य से जुलाई तक) पानी की भारी किल्लतों से जूझ रहे हैं। बिल्डर का काम था बनाना और कस्टमर को बेचना। उनका उद्देश्य सफल हुआ, प्रॉफिट कमाया और वर्तमान में ऐसा प्रतीत होता है कि मानवता कहीं भटक गया है। गलती बिल्डरों के साथ साथ टाउन एंड कंट्री प्लांनिग, छग-रेरा की भी है। 

टाउन एंड कंट्री प्लानिंग को एप्रूव करने से पहले बिल्डरों द्वारा जिस स्थान पर कॉलोनियां बनाई जानी थी उसका निरीक्षण कर, जल स्तर को देखकर लेआउट एप्रूव करना था और उसके अनुसार छग-रेरा इजाजत देता ! पर ऐसा शायद ही हुआ होगा, नहीं तो लोग इस भीषण गर्मी में पानी के लिए नहीं तरसते होते। ये मानवता का पहचान किसी भी तरह से नहीं होता है। ऐसे कॉलोनियां, फ्लैट जहां पानी की भारी किल्लत है वहां उक्त बिल्डर द्वारा निःशुल्क पानी की व्यवस्था करनी चाहिए। जब आप फ्लैट या मकान बेच रहे थे तब आपने कस्टमरों से क्यों नहीं कहा कि इस क्षेत्र में आगे चलकर जल संकट हो सकता है। इसका मतलब आपने सरासर सफेद झूठ बोलकर कस्टमरों के साथ छल किया !

अब देखना है कि बिल्डर क्या कदम उठाते हैं !?


रायपुर । राजधानी रायपुर दिनों दिन फैलते जा रहा है और एक महानगर का रूप ले रहा है जो 26 सालों में विभिन्न सरकार द्वारा योजनाओं का क्रियान्वयन कर हुआ है साथ ही छग के लगे हुए राज्यों के लिए राजधानी रायपुर बिज़नेस का बहुत बड़ा हब बन गया है साथ ही राजधानी बनने के बाद विभिन्न प्रदेशों से लोग यहां जॉब, व्यवसाय करने हेतु आये जो बिल्डरों हेतु एक सुअवसर बन गया साथ ही बजट फ्रेंडली फ्लैट रायपुर के रहवासियों, इन्वेस्टरों के लिए फर्स्ट चॉइस बन गया।

फल स्वरूप रायपुर के चारों दिशाओं में बहुमंजिला इमारत बनने लगे, फ्लैट कल्चर का चलन बढ़ा साथ ही बिल्डरों द्वारा लुभावने सुविधा और वादों ने कस्टमरों को उनके तरफ खींचा। जिसके चलते लोग बैंकों से आसान किश्तों में लोन लेकर फ्लैट खरीदकर रहने लगे।

बहुत से फ्लैट सोसाइटी, कॉलोनियां ऐसे स्थानों पर बने हैं जहां भूजल का स्तर बहुत ही कम था या ड्राई जोन था और इसके फलस्वरूप जिन्होंने भी इस तरह ड्राई ज़ोन में आवास या फ्लैट लिया वे विशेषकर गर्मी के समय (फरवरी के मध्य से जुलाई तक) पानी की भारी किल्लतों से जूझ रहे हैं। बिल्डर का काम था बनाना और कस्टमर को बेचना। उनका उद्देश्य सफल हुआ, प्रॉफिट कमाया और वर्तमान में ऐसा प्रतीत होता है कि मानवता कहीं भटक गया है। गलती बिल्डरों के साथ साथ टाउन एंड कंट्री प्लांनिग, छग-रेरा की भी है। 

टाउन एंड कंट्री प्लानिंग को एप्रूव करने से पहले बिल्डरों द्वारा जिस स्थान पर कॉलोनियां बनाई जानी थी उसका निरीक्षण कर, जल स्तर को देखकर लेआउट एप्रूव करना था और उसके अनुसार छग-रेरा इजाजत देता ! पर ऐसा शायद ही हुआ होगा, नहीं तो लोग इस भीषण गर्मी में पानी के लिए नहीं तरसते होते। ये मानवता का पहचान किसी भी तरह से नहीं होता है। ऐसे कॉलोनियां, फ्लैट जहां पानी की भारी किल्लत है वहां उक्त बिल्डर द्वारा निःशुल्क पानी की व्यवस्था करनी चाहिए। जब आप फ्लैट या मकान बेच रहे थे तब आपने कस्टमरों से क्यों नहीं कहा कि इस क्षेत्र में आगे चलकर जल संकट हो सकता है। इसका मतलब आपने सरासर सफेद झूठ बोलकर कस्टमरों के साथ छल किया !

अब देखना है कि बिल्डर क्या कदम उठाते हैं !?


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