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Raipur (खबरीलाल न्यूज़) :: कवर्धा में हरित क्रांति की नई इबारत, वनमंत्री केदार कश्यप के नेतृत्व में मजबूत होगा पर्यावरण और ग्रामीण अर्थतंत्र :

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में वन संपदा के संरक्षण, विस्तार और आर्थिक उपयोगिता को बढ़ाने की दिशा में लगातार उल्लेखनीय कार्य किए जा रहे हैं। वन मंत्री केदार कश्यप के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम ने कवर्धा परियोजना मंडल के माध्यम से बीते वर्षों में व्यापक वृक्षारोपण अभियान संचालित कर पर्यावरणीय संतुलन और भविष्य की आर्थिक समृद्धि की मजबूत नींव रखी है। वन विकास निगम ने उन क्षेत्रों को प्राथमिकता दी, जहां वन घनत्व कम था या भूमि अनुपयोगी पड़ी थी। सुनियोजित रणनीति और आधुनिक वानिकी तकनीकों की मदद से इन क्षेत्रों को पुनर्जीवित कर हरित संपदा में परिवर्तित किया जा रहा है।

पिछले पांच वर्षों के दौरान कवर्धा परियोजना मंडल में लगभग 1500 हेक्टेयर क्षेत्र में करीब 25 लाख सागौन पौधे लगाए गए हैं। पौधरोपण के लिए उन्नत रूट आधारित तकनीक अपनाई गई, जिससे पौधों की जड़ों का विकास अधिक प्रभावी हुआ और उनकी वृद्धि क्षमता बेहतर बनी। इस पद्धति ने पौधों को मौसम संबंधी चुनौतियों और अन्य प्राकृतिक प्रभावों का सामना करने में भी सक्षम बनाया है।

हरित विकास की अवधारणा को आगे बढ़ाते हुए राजस्व भूमि पर विभिन्न स्थानीय प्रजातियों के हजारों पौधे लगाए गए हैं। इस पहल का उद्देश्य केवल हरियाली बढ़ाना नहीं, बल्कि स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना और जैव विविधता का संरक्षण सुनिश्चित करना भी है। व्यावसायिक दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में उन्नत किस्म के नीलगिरी पौधों का रोपण किया गया है। इससे भविष्य में कम समय में वनोपज उपलब्ध होगी और वन आधारित आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।

कवर्धा परियोजना की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक यह है कि विशाल क्षेत्र में किए गए पौधारोपण को किसी भी प्रकार की महंगी फेंसिंग के बिना सुरक्षित रखा गया है। वन अमले की सतत निगरानी और स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग से पौधों की जीवित रहने की दर 80 प्रतिशत से अधिक बनी हुई है। यह उपलब्धि वन प्रबंधन के क्षेत्र में एक प्रभावी मॉडल के रूप में उभर रही है।

वर्तमान में विकसित हो रही सागौन संपदा आने वाले वर्षों में उच्च गुणवत्ता की लकड़ी उपलब्ध कराएगी। चरणबद्ध प्रबंधन और वैज्ञानिक कटाई व्यवस्था के माध्यम से वन विकास निगम को दीर्घकालिक आय प्राप्त होगी, जिससे वन संरक्षण और विकास गतिविधियों को और मजबूती मिलेगी।

बड़े पैमाने पर विकसित हो रहे ये वन क्षेत्र भविष्य में कार्बन अवशोषण की क्षमता बढ़ाकर जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में मदद करेंगे। इसके साथ ही भूजल संरक्षण, मृदा संरक्षण और स्थानीय पारिस्थितिक संतुलन को भी महत्वपूर्ण लाभ मिलेगा। वन क्षेत्र में बढ़ती हरियाली वन्यजीवों और पक्षियों के लिए नए आवास तैयार करेगी।

रोपण कार्यों से लेकर रखरखाव तक की विभिन्न गतिविधियों में स्थानीय ग्रामीणों को प्राथमिकता दी गई। इससे वनांचल क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़े हैं और समुदाय की भागीदारी भी मजबूत हुई है। ग्रामीणों की सक्रिय सहभागिता ने पौधारोपण क्षेत्रों की सुरक्षा और सफलता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

कवर्धा परियोजना मंडल का यह अभियान दर्शाता है कि दूरदर्शी योजना, वैज्ञानिक प्रबंधन और जनसहयोग के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण तथा आर्थिक विकास को साथ-साथ आगे बढ़ाया जा सकता है। आने वाले वर्षों में यह पहल प्रदेश के हरित भविष्य और वन आधारित अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।


रायपुर। छत्तीसगढ़ में वन संपदा के संरक्षण, विस्तार और आर्थिक उपयोगिता को बढ़ाने की दिशा में लगातार उल्लेखनीय कार्य किए जा रहे हैं। वन मंत्री केदार कश्यप के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम ने कवर्धा परियोजना मंडल के माध्यम से बीते वर्षों में व्यापक वृक्षारोपण अभियान संचालित कर पर्यावरणीय संतुलन और भविष्य की आर्थिक समृद्धि की मजबूत नींव रखी है। वन विकास निगम ने उन क्षेत्रों को प्राथमिकता दी, जहां वन घनत्व कम था या भूमि अनुपयोगी पड़ी थी। सुनियोजित रणनीति और आधुनिक वानिकी तकनीकों की मदद से इन क्षेत्रों को पुनर्जीवित कर हरित संपदा में परिवर्तित किया जा रहा है।

पिछले पांच वर्षों के दौरान कवर्धा परियोजना मंडल में लगभग 1500 हेक्टेयर क्षेत्र में करीब 25 लाख सागौन पौधे लगाए गए हैं। पौधरोपण के लिए उन्नत रूट आधारित तकनीक अपनाई गई, जिससे पौधों की जड़ों का विकास अधिक प्रभावी हुआ और उनकी वृद्धि क्षमता बेहतर बनी। इस पद्धति ने पौधों को मौसम संबंधी चुनौतियों और अन्य प्राकृतिक प्रभावों का सामना करने में भी सक्षम बनाया है।

हरित विकास की अवधारणा को आगे बढ़ाते हुए राजस्व भूमि पर विभिन्न स्थानीय प्रजातियों के हजारों पौधे लगाए गए हैं। इस पहल का उद्देश्य केवल हरियाली बढ़ाना नहीं, बल्कि स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना और जैव विविधता का संरक्षण सुनिश्चित करना भी है। व्यावसायिक दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में उन्नत किस्म के नीलगिरी पौधों का रोपण किया गया है। इससे भविष्य में कम समय में वनोपज उपलब्ध होगी और वन आधारित आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।

कवर्धा परियोजना की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक यह है कि विशाल क्षेत्र में किए गए पौधारोपण को किसी भी प्रकार की महंगी फेंसिंग के बिना सुरक्षित रखा गया है। वन अमले की सतत निगरानी और स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग से पौधों की जीवित रहने की दर 80 प्रतिशत से अधिक बनी हुई है। यह उपलब्धि वन प्रबंधन के क्षेत्र में एक प्रभावी मॉडल के रूप में उभर रही है।

वर्तमान में विकसित हो रही सागौन संपदा आने वाले वर्षों में उच्च गुणवत्ता की लकड़ी उपलब्ध कराएगी। चरणबद्ध प्रबंधन और वैज्ञानिक कटाई व्यवस्था के माध्यम से वन विकास निगम को दीर्घकालिक आय प्राप्त होगी, जिससे वन संरक्षण और विकास गतिविधियों को और मजबूती मिलेगी।

बड़े पैमाने पर विकसित हो रहे ये वन क्षेत्र भविष्य में कार्बन अवशोषण की क्षमता बढ़ाकर जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में मदद करेंगे। इसके साथ ही भूजल संरक्षण, मृदा संरक्षण और स्थानीय पारिस्थितिक संतुलन को भी महत्वपूर्ण लाभ मिलेगा। वन क्षेत्र में बढ़ती हरियाली वन्यजीवों और पक्षियों के लिए नए आवास तैयार करेगी।

रोपण कार्यों से लेकर रखरखाव तक की विभिन्न गतिविधियों में स्थानीय ग्रामीणों को प्राथमिकता दी गई। इससे वनांचल क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़े हैं और समुदाय की भागीदारी भी मजबूत हुई है। ग्रामीणों की सक्रिय सहभागिता ने पौधारोपण क्षेत्रों की सुरक्षा और सफलता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

कवर्धा परियोजना मंडल का यह अभियान दर्शाता है कि दूरदर्शी योजना, वैज्ञानिक प्रबंधन और जनसहयोग के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण तथा आर्थिक विकास को साथ-साथ आगे बढ़ाया जा सकता है। आने वाले वर्षों में यह पहल प्रदेश के हरित भविष्य और वन आधारित अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।


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