Shreekant Jaiswal Koriya
बैकुठपुर/कृषकों के लिए कृषि उत्पादन को बढ़ाने के लिए डेम एवं नेहरो के माध्यम से उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से कई प्रकार की योजनाएं लागू की गई| जिसमें जल संसाधन विभाग के द्वारा कृषि कार्य हेतु शंकरगढ़ ग्राम में स्थित शंकरगढ़ व्यपवर्तन योजना करोड़ों रुपए खर्च करने के उपरांत भी अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है, इस योजना का उद्देश्य कृषकों को नहर के माध्यम से पर्याप्त पानी मुहैया कराना था किंतु 4 साल होने के उपरान्त आज हालात यह है कि नहर भी पूर्णरूपेण नहीं बन सकी व अत्यंत कंडम स्थिति पर हैं।
वहीं योजना के तहत बने डैम के हालात यह है कि उसमें से भी पानी जगह जगह से बह रहा है जिससे अनुमान यह लगाया जा सकता है कि भविष्य में इसके टूटने का खतरा बना हुआ है। वही ग्रामीणों ने भी बताया की इस योजना का लाभ व इस योजना का उद्देश्य भी हमारी समझ से परे है कहकर अपनी बात रखी।
नहर के लिये अधिग्रहीत भूमि का नहीं मिला मुआवजा :: वहीं दूसरी तरफ नहर बनाने के दौरान कई कृषकों की भूमि अधिग्रहित की गई थी जिसका मुआवजा उन्हें भी आज तक नहीं मिला है, जल संसाधन विभाग की इस योजना से कृषकों को लाभ तो नहीं मिला वरन शासन को करोड़ों रुपए की क्षति अवश्य पहुंची है। वही जब जल संसाधन विभाग के इंजीनियर दुबे से इस संबंध में जानकारी देने हेतु कई बार उनके नंबर पर फोन किया गया किंतु उन्होंने कॉल रिसीव करना उचित नहीं समझा एवं ऑफिस में मुलाकात के समय में भी वे नहीं मिले।
ग्राम पंचायत डंगौरा के सरपंच ने बताया कि यह योजना खुद अपनी बदहाली में आंसू बहा रही है, गुणवत्ता विहीन डैम का निर्माण किया गया है, नहरों का काम आज तक अधूरा पड़ा हुआ है ऐसे में कृषकों को क्या लाभ पहुंचेगा|उन्होंने कहा की ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्यवाही की जानी चाहिए जो शासन के पैसों का गलत इस्तेमाल कर गुणवत्ता विहीन कार्य किए हैं एवं शासन को करोडो़ रुपए की क्षति पहुंचाए हैं। शासन को त्वरित संज्ञान में लेकर काय॔वाही करते हुए सुधार काय॔ करवाया जाये जिससे ग्रामीणों के हितो की इस योजना का लाभ ग्रामीणों को मिल सके।
Shreekant Jaiswal Koriya
बैकुठपुर/कृषकों के लिए कृषि उत्पादन को बढ़ाने के लिए डेम एवं नेहरो के माध्यम से उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से कई प्रकार की योजनाएं लागू की गई| जिसमें जल संसाधन विभाग के द्वारा कृषि कार्य हेतु शंकरगढ़ ग्राम में स्थित शंकरगढ़ व्यपवर्तन योजना करोड़ों रुपए खर्च करने के उपरांत भी अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है, इस योजना का उद्देश्य कृषकों को नहर के माध्यम से पर्याप्त पानी मुहैया कराना था किंतु 4 साल होने के उपरान्त आज हालात यह है कि नहर भी पूर्णरूपेण नहीं बन सकी व अत्यंत कंडम स्थिति पर हैं।
वहीं योजना के तहत बने डैम के हालात यह है कि उसमें से भी पानी जगह जगह से बह रहा है जिससे अनुमान यह लगाया जा सकता है कि भविष्य में इसके टूटने का खतरा बना हुआ है। वही ग्रामीणों ने भी बताया की इस योजना का लाभ व इस योजना का उद्देश्य भी हमारी समझ से परे है कहकर अपनी बात रखी।
नहर के लिये अधिग्रहीत भूमि का नहीं मिला मुआवजा :: वहीं दूसरी तरफ नहर बनाने के दौरान कई कृषकों की भूमि अधिग्रहित की गई थी जिसका मुआवजा उन्हें भी आज तक नहीं मिला है, जल संसाधन विभाग की इस योजना से कृषकों को लाभ तो नहीं मिला वरन शासन को करोड़ों रुपए की क्षति अवश्य पहुंची है। वही जब जल संसाधन विभाग के इंजीनियर दुबे से इस संबंध में जानकारी देने हेतु कई बार उनके नंबर पर फोन किया गया किंतु उन्होंने कॉल रिसीव करना उचित नहीं समझा एवं ऑफिस में मुलाकात के समय में भी वे नहीं मिले।
ग्राम पंचायत डंगौरा के सरपंच ने बताया कि यह योजना खुद अपनी बदहाली में आंसू बहा रही है, गुणवत्ता विहीन डैम का निर्माण किया गया है, नहरों का काम आज तक अधूरा पड़ा हुआ है ऐसे में कृषकों को क्या लाभ पहुंचेगा|उन्होंने कहा की ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्यवाही की जानी चाहिए जो शासन के पैसों का गलत इस्तेमाल कर गुणवत्ता विहीन कार्य किए हैं एवं शासन को करोडो़ रुपए की क्षति पहुंचाए हैं। शासन को त्वरित संज्ञान में लेकर काय॔वाही करते हुए सुधार काय॔ करवाया जाये जिससे ग्रामीणों के हितो की इस योजना का लाभ ग्रामीणों को मिल सके।



Journalist खबरीलाल














